पाकिस्तान ने इस्लामाबाद धमाके के लिए भारत को ज़िम्मेदार कहा, नई दिल्ली ने कहा- आरोप बेबुनियाद

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ ने 11 नवंबर को इस्लामाबाद में हुए आतंकी हमले के लिए भारत पर आरोप लगाया है. उस हमले में कम से कम 12 लोगों की मौत हुई है. भारतीय विदेश मंत्रालय ने शरीफ़ के आरोपों को ख़ारिज करते हुए कहा कि भारत के ख़िलाफ़ झूठी कहानियां गढ़ना पाकिस्तान की पुरानी रणनीति है, ताकि जनता का ध्यान वहां के संवैधानिक संकट से हटाया जा सके.

मंगलवार, 11 नवंबर को पाकिस्तान के इस्लामाबाद में ज़िला अदालत के बाहर हुए आत्मघाती धमाके के बाद मौके पर खड़ी क्षतिग्रस्त गाड़ी की जांच करते सुरक्षा अधिकारी. (फोटो: एपी/पीटीआई)

नई दिल्ली: पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ ने मंगलवार (11 नवंबर) को इस्लामाबाद में हुए आतंकी हमले के लिए भारत पर आरोप लगाया है, हमले में कम से कम 12 लोगों की मौत हुई है.

इसके जवाब में भारत ने पाकिस्तान पर झूठे और निराधार आरोप लगाने का आरोप लगाते हुए कहा कि इस तरह के बयान पाकिस्तान में हो रहे ‘संवैधानिक उथल पुथल’ से ध्यान भटकाने की कोशिश है. 

पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नक़वी के मुताबिक़, मंगलवार को इस्लामाबाद की ज़िला अदालत के बाहर हुए धमाके में 12 लोगों की मौत हो गई और 27 से अधिक लोग घायल हो गए. 

शहबाज़ शरीफ़ ने बयान में कहा कि इस हमले के पीछे तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) का हाथ है. हालांकि संगठन ने इसकी ज़िम्मेदारी लेने से इनकार किया है. शरीफ़ ने कहा कि सोमवार को ख़ैबर पख़्तूनख़्वा के एक शैक्षणिक संस्थान पर हुए हमले और इस्लामाबाद धमाके दोनों ही ‘भारत प्रायोजित आतंकवाद के सबसे भयानक उदाहरण’ हैं.

भारत ने सख्ती से खंडन किया

भारत के विदेश मंत्रालय ने शरीफ़ के आरोपों को पूरी तरह खारिज किया है. मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने मंगलवार रात एक बयान में कहा, ‘भारत पाकिस्तान के भ्रमित नेतृत्व द्वारा लगाए गए निराधार और बेबुनियाद आरोपों को सख्ती से खारिज करता है.’ 

उन्होंने पाकिस्तान की संसद में सोमवार को पारित उस विवादास्पद संवैधानिक संशोधन का हवाला दिया, जो सेना प्रमुख फील्ड मार्शल असीम मुनीर को अधिक शक्तियां और कानूनी छूट देने के साथ-साथ देश की शीर्ष न्यायपालिका में बदलाव से जुड़ा है.

जायसवाल ने कहा कि पाकिस्तान की सरकार अपने देश में चल रही ‘संवैधानिक उथल-पुथल’ से जनता का ध्यान हटाने की कोशिश कर रही है.

उन्होंने कहा, ‘भारत के ख़िलाफ़ झूठी कहानियां गढ़ना पाकिस्तान की पुरानी रणनीति है, ताकि जनता का ध्यान उसकी सेना-प्रेरित सत्ता हथियाने की कोशिशों और संवैधानिक संकट से हटाया जा सके. अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस सच्चाई से वाकिफ है और पाकिस्तान की इस ध्यान भटकाने की कोशिश से गुमराह नहीं होगा.’ 

अधिकारियों के अनुसार, विस्फोट इस्लामाबाद के ज़िला न्यायिक परिसर के प्रवेश द्वार पर खड़ी एक कार में हुआ.

यह घटना दिल्ली के लाल क़िला के पास सोमवार को हुई एक अन्य कार धमाके के ठीक अगले दिन हुई, जिसमें कम से कम 13 लोगों की मौत हुई थी.

पाकिस्तानी गृहमंत्री नक़वी ने बताया कि यह एक आत्मघाती हमला था और पुलिस जांच कर रही है.  

अब तक क्या जानकारी सामने आई है

नक़वी ने बताया, ‘दोपहर 12:39 बजे अदालत के बाहर आत्मघाती हमला हुआ, जिसमे कम से कम 12 लोग मारे गए और 27 घायल हुए.’ 

उन्होंने कहा कि सीसीटीवी फुटेज में सामने आया है कि हमलावर अदालत परिसर के भीतर घुसना चाहता था लेकिन असफल रहने पर उसने बाहर खड़ी एक पुलिस गाड़ी को निशाना बनाया. 

हमले के बाद अर्धसैनिक बलों ने इलाके को घेर लिया. सामान्य दिनों में यह इलाका अदालत की कार्यवाही के चलते भीड़भाड़ वाला रहता है.

एएफपी के मुताबिक, धमाका अदालत परिसर के एक गेट के पास हुआ. एक वकील रुस्तम मलिक ने एजेंसी को बताया, ‘जैसे ही मैंने अपनी कार पार्क की और भीतर गया, अचानक एक तेज़ धमाके की आवाज़ सुनाई दी.

मलिक ने कहा, ‘इसके बाद लोग अफरा-तफरी में भाग रहे थे. मैंने गेट पर दो शव देखे और कई कारें जल रही थीं.’ 

शरीफ़ ने भारत को ठहराया ज़िम्मेदार

शरीफ़ ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर जारी बयान में इस हमले के लिए कथित ‘भारत समर्थित’ फ़ितना अल-ख़वारिज़ और ‘फ़ितना अल-हिंदुस्तान’ को ज़िम्मेदार ठहराया. जो पाकिस्तान की मीडिया के अनुसार, क्रमशः टीटीपी और बलूच उग्रवादियों के लिए इस्लामाबाद द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले शब्द हैं.

उल्लेखनीय है कि भारत और पाकिस्तान के बीच संबंध, जो अक्सर उतार-चढ़ाव से गुज़रे हैं, इस साल जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद और भी ज़्यादा बिगड़ गए हैं. उस हमले के बाद भारत ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ शुरू किया था, जिसके बाद चार दिनों तक दोनों देशों के बीच सैन्य तनाव बना रहा था.

इसके बाद दोनों देशों ने एक-दूसरे के ऊपर कई प्रतिबंध लगा दिए थे.

हालांकि शरीफ़ ने इस्लामाबाद हमले के लिए टीटीपी को ज़िम्मेदार ठहराया है. एसोसिएटेड प्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, संगठन के प्रवक्ता ने इसमें किसी भूमिका से इनकार किया है. हालांकि टीटीपी के एक अलग गुट ‘जमात-उल-अहरार’ ने शुरू में ज़िम्मेदारी ली थी, लेकिन बाद में उसके एक कमांडर ने वॉट्सऐप संदेशों में इस दावे से पल्ला झाड़ लिया था. 

पाकिस्तान की सुरक्षा स्थिति

ऐसा बताया जाता है कि पाकिस्तान में कई आतंकी और उग्रवादी समूह सक्रिय हैं, जिनमें तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी), इस्लामिक स्टेट की स्थानीय शाखा- आईएसकेपी, और बलूच अलगाववादी संगठन शामिल हैं. 

सोमवार शाम पाकिस्तान की सुरक्षा एजेंसियों ने दावा किया कि उन्होंने ख़ैबर पख़्तूनख़्वा प्रांत के वाना शहर (अफ़ग़ान सीमा के पास) स्थित एक सेना संचालित कॉलेज पर हुए हमले को नाकाम कर दिया.

पाकिस्तानी गृह मंत्री नक़वी के मुताबिक़, उस हमले में तीन लोगों की मौत हुई और अफ़ग़ानिस्तान ‘सीधे तौर पर इसमें शामिल’ था.

हालांकि शरीफ़ ने दावा किया कि ‘फ़ितना अल-ख़वारिज़’ ने यह हमला ‘भारत के उकसावे’ पर किया, लेकिन एसोसिएटेड प्रेस के अनुसार, टीटीपी ने सोमवार की घटना की ज़िम्मेदारी लेने से भी इनकार किया है.