मुंबई: केंद्र सरकार ने शुक्रवार (21 नवंबर) को पुराने श्रम काननों की जगह 2020 से लंबित चार नई श्रम संहिताओं को अधिसूचित कर दिया है. सरकार इसे कर्मचारियों और मज़दूरों के हित में बता रही है, जबकि कई मज़दूर संगठनों ने इसे मज़दूर विरोधी और उद्योगपतियों के हित में बताया है.
इस संबंध में शुक्रवार को प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर लिखा, ‘आज, हमारी सरकार ने चार लेबर कोड लागू कर दिए हैं. यह आज़ादी के बाद मज़दूरों लिए सबसे बड़े और प्रगतिशील सुधारों में से एक है.’
उनके मुताबिक, ‘यह हमारे कामगारों को बहुत ताकतवर बनाता है. इससे कम्प्लायंस भी काफ़ी आसान हो जाएगा और यह ‘ईज़ ऑफ़ डूइंग बिज़नेस’ को बढ़ावा देने वाला है.’
Shramev Jayate!
Today, our Government has given effect to the Four Labour Codes. It is one of the most comprehensive and progressive labour-oriented reforms since Independence. It greatly empowers our workers. It also significantly simplifies compliance and promotes ‘Ease of…
— Narendra Modi (@narendramodi) November 21, 2025
रिपोर्ट के मुताबिक मौजूदा 29 श्रम कानूनों को चार संहिताओं में समेकित किया गया है: वेतन संहिता, 2019; औद्योगिक संबंध संहिता, 2020; सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020; और व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्यदशा संहिता, 2020.
सरकार का कहना है कि इन संहिताओं का उद्देश्य ‘व्यापार में सुगमता बढ़ाना, रोज़गार सृजन को बढ़ावा देना, प्रत्येक श्रमिक के लिए सुरक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक और वेतन सुरक्षा सुनिश्चित करना’ है.
इन श्रम संहिताओं की अधिसूचना के बाद अगला कदम नियमों का निर्माण होगा. चूंकि श्रम एक समवर्ती विषय है, इसलिए केंद्र सरकार और राज्य सरकार दोनों को कानून और नियम बनाने होंगे.
सरकार ने कहा है कि नए कोड में गिग वर्कर्स को सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाने के लिए विशेष रूप से परिभाषित किया गया है. एग्रीगेटर सेवाओं को अपने वार्षिक टर्नओवर का 1-2% योगदान देना होगा.
कांग्रेस ने सरकार के इस कदम की आलोचना
हालांकि, कांग्रेस ने सरकार के इस कदम की आलोचना की है और श्रम संहिताओं की व्यवहार्यता पर सवाल उठाए हैं.
कांग्रेस नेता और सांसद जयराम रमेश ने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा, ‘मज़दूरों से जुड़े 29 मौजूदा क़ानूनों को 4 कोड में री-पैकेज किया गया है. इसका किसी क्रांतिकारी सुधार के तौर पर प्रचार किया जा रहा है, जबकि इसके नियम अभी तक नोटिफ़ाई भी नहीं हुए हैं.’
रमेश ने सवाल किया कि क्या ये संहिताएं उनकी पार्टी के श्रमिक न्याय अभियान के तहत श्रमिकों की पांच प्रमुख मांगों को संबोधित करती हैं: 400 रुपये प्रतिदिन का राष्ट्रीय न्यूनतम वेतन (मनरेगा श्रमिकों के लिए भी शामिल); 25 लाख रुपये तक की सार्वभौमिक कवरेज की पेशकश करने वाला स्वास्थ्य अधिकार कानून; शहरी क्षेत्रों के लिए रोजगार गारंटी अधिनियम; जीवन और दुर्घटना बीमा सहित असंगठित श्रमिकों के लिए व्यापक सामाजिक सुरक्षा; और प्रमुख सरकारी कार्यों में रोजगार के ठेकाकरण पर प्रतिबंध.
29 existing labour-related laws have been re-packaged into 4 codes. This is being marketed as some revolutionary reform when even the Rules have yet to be notified.
But will these codes make these 5 essential demands of India’s workers for Shramik Nyay a reality?
1. National…
— Jairam Ramesh (@Jairam_Ramesh) November 22, 2025
न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, नए लेबर कोड के अन्य प्रमुख प्रावधानों में श्रमिकों के लिए अनिवार्य नियुक्ति पत्र, महिलाओं के लिए विस्तारित अधिकार और सुरक्षा उपाय, जिनमें सहमति और अनिवार्य शिकायत समितियों के अधीन रात्रि पाली में काम करना, और 40 वर्ष से अधिक आयु के श्रमिकों के लिए निःशुल्क वार्षिक स्वास्थ्य जांच शामिल हैं.
इससे कपड़ा क्षेत्र में प्रवासी श्रमिकों को समान वेतन और कल्याणकारी लाभ प्राप्त होंगे. अखबार ने बताया कि वे लंबित बकाया राशि के लिए तीन साल तक दावा दायर कर सकते हैं, और ओवरटाइम का भुगतान मजदूरी दर से दोगुना करना होगा.
हालांकि, इसमें कंपनियों के लिए अनुपालन आवश्यकताओं को कम कर दिया गया है, जिसमें कम रिटर्न दाखिल करना, कम रिकॉर्ड रखना और कम लाइसेंस प्राप्त करना शामिल है. छंटनी के नियमों में ढील दी गई है.
इस नए श्रम संहिताओं को लेकर दस राष्ट्रीय स्तर की ट्रेड यूनियन्स के एक संयुक्त मंच ने बुधवार, 26 नवंबर को देशव्यापी विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया है.
उन्होंने इन संहिताओं को वापस लेने की मांग की है और इन्हें मज़दूर-विरोधी और नियोक्ता-समर्थक बताया है. दूसरी ओर, कुछ ट्रेड यूनियनों ने इन सुधारों का स्वागत किया है.
इन संहिताओं से कंपनियों की परिचालन लागत भी बढ़ेगी क्योंकि न्यूनतम वेतन में वृद्धि होगी और सुरक्षा व कार्य स्थितियों पर जवाबदेही बढ़ेगी.
