मणिपुर में विरोध प्रदर्शन के दौरान नगा और कुकी समुदायों के बीच झड़प

हिंसाग्रस्त मणिपुर में यूनाइटेड नगा परिषद द्वारा बुलाए गए बंद के दौरान कांगपोकपी ज़िले में तांगखुल नगा और कुकी समुदायों के बीच झड़पें हुईं. इस दौरान गोलियां भी चलीं. अभी तक इस बात की पुष्टि नहीं हो सकी है कि गोली किसने चलाई. नगा संगठन ने नगा बहुल इलाकों में तीन दिन का बुलाया है.

9 फरवरी 2026 को उखरुल ज़िले में संदिग्ध उग्रवादियों द्वारा कथित तौर पर कई घरों में आग लगाने के बाद तैनात किए सुरक्षाकर्मी. (फाइल फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: जातीय हिंसा से प्रभावित मणिपुर में मंगलवार (21 अप्रैल) को दो आदिवासी समुदायों के बीच झड़पें हुईं. ऐसा तब हुआ जब स्थानीय पुलिस द्वारा सेनापति और उससे सटे कांगपोकपी जिलों की सीमा पर विरोध स्वरूप लगाए गए सड़क अवरोध को हटाने की कोशिश की. यह बंद यूनाइटेड नगा परिषद (यूएनसी) ने बुलाया है.

न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, अधिकारियों बताया कि यह सड़क अवरोध नगा वालिंटयर्स द्वारा लगाया गया था, ताकि 18 अप्रैल को उखरुल जिले में दो लोगों की हत्या के विरोध में तीन दिन के बंद को लागू किया जा सके.

एक अधिकारी ने बताया कि स्थिति तब और बिगड़ गई चांगौबुंग कुकी गांव के लोगों ने नाकाबंदी हटाने की कोशिश, जिसके चलते दोनों पक्षों के बीच पत्थरबाज़ी शुरू हो गई. अधिकारी ने कहा, ‘इस हंगामे के दौरान कुछ राउंड गोलियां भी चलीं. हालांकि, यह साफ नहीं है कि गोलियां किसने चलाईं.’

स्थानीय खबरों के अनुसार, तांगखुल नगा समूहों ने आरोप लगाया है कि वहां हथियारबंद कुकी लोग मौजूद थे और गोलीबारी चागौबुंग की तरफ से हुई थी. वहीं, नगा संगठनों के प्रतिनिधियों ने कहा है कि जिस शांतिपूर्ण विरोध को बाधित किया गया, उसके जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए.

दूसरी ओर, कुकी इनपी मणिपुर ने कुकी गांवों की ओर गोलीबारी की खबरों पर चिंता जताई है. संगठन ने अपने बयान में संयम बरतने की अपील की और बंद समर्थकों से ऐसे कदमों से बचने को कहा जो आम नागरिकों के लिए खतरा बन सकते हैं.

स्थिति को और बिगड़ने से रोकने और शांति बनाए रखने के लिए प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा बलों को तैनात किया गया है. अधिकारियों ने बताया कि घटनाक्रम की पूरी जानकारी जुटाने और जिम्मेदार लोगों की पहचान के लिए जांच जारी है.

यूएनसी द्वारा बुलाए गए इस तीन-दिवसीय बंद ने राज्य के सभी नगा-बहुल इलाकों – जिनमें उखरुल, कामजोंग, सेनापति, नोनी और तामेंगलोंग शामिल हैं- में सामान्य जनजीवन को पूरी तरह से ठप कर दिया है. यह बंद 18 अप्रैल को उखरुल में संदिग्ध कुकी उग्रवादियों द्वारा कथित तौर पर किए गए एक हमले के विरोध में बुलाया गया है, जिसमें दो तांगखुल नगाओं (जिनमें एक पूर्व सैनिक भी शामिल था) की हत्या कर दी गई थी.

बता दें कि बीते 10 अप्रैल को उखरुल जिले के लितान क्षेत्र में कथित उग्रवादियों की बिना उकसावे की गोलीबारी में बीएसएफ का एक जवान मारा गया. उखरुल का नगा-बहुल लितान क्षेत्र 7 फरवरी से नगा और कुकी समुदायों के बीच हिंसा और आगजनी की घटनाएं हुईं थीं, जिनमें दोनों पक्षों के 30 से अधिक घर जलकर नष्ट हो गए थे.

ज्ञात हो कि मणिपुर में मई 2023 से जारी जातीय हिंसा में अब तक कम से कम 260 लोगों की जान जा चुकी है और लगभग 60,000 लोग विस्थापित हुए हैं. यह हिंसा सबसे पहले मेईतेई और कुकी समुदायों के बीच शुरू हुई थी और अब लगभग सभी समूह इसमें शामिल हो गए हैं. मेईतेई समुदाय मुख्य रूप से इंफाल घाटी के मैदानी इलाकों में रहते हैं, जबकि कुकी पहाड़ी क्षेत्रों में निवास करते हैं. हिंसा शुरू होने के बाद मेईतेई और कुकी अपने-अपने क्षेत्रों में सिमट गए हैं.