असम: वीसी के ख़िलाफ़ 75 दिनों के तीव्र आंदोलन के बाद तेज़पुर यूनिवर्सिटी में कार्यवाहक कुलपति नियुक्त

असम की तेज़पुर यूनिवर्सिटी के छात्र, शिक्षक और ग़ैर-शैक्षणिक स्टाफ वाइस चांसलर शंभू नाथ सिंह पर भ्रष्टाचार और वित्तीय गड़बड़ियों का आरोप लगाते हुए उन्हें हटाने की मांग को लेकर पिछले 75 दिनों से ज़ोरदार विरोध कर रहे थे. अब गुरुवार को वरिष्ठ फैकल्टी सदस्य डॉ. ध्रुब कुमार भट्टाचार्य को कार्यवाहक कुलपति नियुक्त किया गया है.

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असम की तेजपुर यूनिवर्सिटी में कुलपति को हटाने की मांग करते विरोध प्रदर्शन कर रहे छात्र. (फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: असम की तेजपुर यूनिवर्सिटी के छात्र, शिक्षक और गैर-शैक्षणिक स्टाफ वाइस-चांसलर शंभू नाथ सिंह पर भ्रष्टाचार और वित्तीय गड़बड़ियों का आरोप लगाते हुए उन्हें हटाने की मांग को लेकर पिछले 75 दिनों से जोरदार विरोध कर रहे थे.

सोनितपुर ज़िले में स्थित विश्वविद्यालय में पिछले दो महीनों से विरोध जारी था. शनिवार को छात्रों और कर्मचारियों ने सभी शैक्षणिक और प्रशासनिक गतिविधियों के पूर्ण शटडाउन की घोषणा कर दी थी.

एनडीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक, इस बीच वरिष्ठ  फैकल्टी सदस्य डॉ. ध्रुब कुमार भट्टाचार्य ने गुरुवार (4 दिसंबर) को तेजपुर यूनिवर्सिटी के कार्यवाहक कुलपति की ज़िम्मेदारी संभाल ली.

पदभार संभालने के बाद डॉ. भट्टाचार्य ने छात्रों को संबोधित करते हुए पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया. उन्होंने कहा, ‘मेरी पहली प्राथमिकता छात्र हैं. हमने छात्र संगठन के सदस्यों के साथ मुद्दों पर चर्चा कर ली है. एक पारदर्शी व्यवस्था कायम रहनी चाहिए. आइए, हम मिलकर एक स्वस्थ वातावरण बनाएं और इस विश्वविद्यालय को देश के शीर्ष संस्थानों में शामिल करें.’

विरोध की शुरुआत

छात्र आंदोलन 21 सितंबर, 2025 को तब शुरू हुआ था जब प्रशासन पर गायक जुबिन गर्ग के सार्वजनिक शोक के प्रति असम्मान दिखाने का आरोप लगा. स्थिति तब और गंभीर हो गई जब कुलपति ने कथित तौर पर आपत्तिजनक टिप्पणियां कीं और बाद में कैंपस छोड़ दिया. इससे छात्र, शिक्षक और कर्मचारियों का एकजुट आंदोलन भड़क उठा.

सितंबर के अंत और पूरे अक्टूबर में संबंधित पक्षों ने प्रशासनिक कदाचार, वित्तीय अनियमितताओं और पर्यावरणीय क्षति जैसे गंभीर मुद्दों को उठाया. इस दौरान उन्होंने 5,000 दीयों की श्रद्धांजलि और ‘ब्लैक-क्लैड रैली’ जैसी प्रतीकात्मक गतिविधियां भी आयोजित कीं.

इसके बाद राज्यपाल द्वारा गठित एक समिति और शिक्षा मंत्रालय की एक अन्य उच्चस्तरीय समिति ने मामले की जांच के लिए विश्वविद्यालय का दौरा किया.

ज्ञात हो कि तेज़पुर विश्वविद्यालय, राज्य में असम विश्वविद्यालय के अलावा दूसरा एकमात्र केंद्रीय विश्वविद्यालय है. सिंह ने मार्च 2023 में कुलपति का पद संभाला था. इससे पहले वे पटना विश्वविद्यालय के कुलपति और इग्नू में प्रोफ़ेसर रह चुके हैं.

इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, छात्र और कर्मचारी सिंह पर वित्तीय अनियमितताओं और लंबे समय तक कैंपस से अनुपस्थित रहने का आरोप लगाया. उनका कहना है कि इस अनुपस्थिति के कारण प्रशासनिक कामकाज ठप हो गया, कैंपस का बुनियादी ढांचा जर्जर हुआ और शैक्षणिक प्रक्रियाएं बाधित रहीं.

18 नवंबर को शिक्षा मंत्रालय को भेजे एक ज्ञापन में टीचर्स’ एसोसिएशन ने वित्त अधिकारी के कार्यकाल में बार-बार विस्तार, संदेहास्पद फ़ैकल्टी नियुक्तियां, पसंदीदा ठेके देने और वित्तीय निर्णयों में अपारदर्शिता जैसे मुद्दों को आंदोलन की वजह बताया था.

एसोसिएशन ने यह भी दावा किया कि अप्रैल 2023 से सितंबर 2025 के बीच सिंह 388 दिनों तक कैंपस में उपस्थित नहीं रहे, जिससे प्रशासन पूरी तरह जड़ हो गया और हितधारकों का विश्वास टूट गया.

खबरों अनुसार, एसोसिएशन ने मजदूरों को वेतन और वेंडरों को भुगतान न होने का आरोप भी लगाया, जिससे मूलभूत सेवाएं और बुनियादी ढांचा प्रभावित हुआ.

इस आंदोलन के बीच 11 फैकल्टी सदस्य और अधिकारी अपने पदों से इस्तीफ़ा दे चुके हैं, जिनमें वित्त अधिकारी ब्रज बंधु मिश्रा, कार्यवाहक रजिस्ट्रार और कई डीन, निदेशक और सहायक डीन शामिल हैं.

आंदोलकारियों ने मुख्यमंत्री का आग्रह खारिज कर दिया था

बुधवार (3 दिसंबर) को असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा शर्मा द्वारा केंद्र से संस्थान में एक प्रो-वाइस चांसलर नियुक्त करने के आग्रह को खारिज कर दिया था.

शर्मा ने कहा था कि उन्होंने तेज़पुर विश्वविद्यालय की स्थिति को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से बातचीत की है और उनसे तुरंत एक प्रो-वाइस चांसलर नियुक्त करने का आग्रह किया है.

मुख्यमंत्री ने कहा था, ‘मुझे विश्वास है कि माननीय मंत्री के सहयोग से यह मुद्दा जल्द से जल्द सुलझ जाएगा.’ हालांकि, तेज़पुर विश्वविद्यालय के छात्रों ने शर्मा के बयान को खारिज करते हुए कहा कि उन्होंने उनके मुख्य मांगों को ‘पूरी तरह गलत समझ लिया’ है.

प्रदर्शनकारी छात्र समूहों ने कहा था, ‘हमारी मांगें बिल्कुल स्पष्ट हैं. वर्तमान कुलपति को जांच पूरी होने तक तत्काल निलंबित किया जाए, प्रो-वीसी नहीं बल्कि एक कार्यवाहक कुलपति नियुक्त किया जाए, और सभी जांच रिपोर्टें जो पहले ही अधिकारियों को सौंपी जा चुकी हैं, सार्वजनिक की जाएं.’

प्रो वाइस-चांसलर विश्वविद्यालय में कुलपति की सहायता के लिए एक स्थायी पद होता है, जबकि कार्यवाहक कुलपति वह होता है जो कुलपति की अनुपस्थिति में अस्थायी रूप से उनके दायित्वों का निर्वहन करता है, जब तक कि नए कुलपति की नियुक्ति न हो जाए.

बता दें कि अब डॉ. ध्रुब कुमार भट्टाचार्य की नियुक्ति तेज़पुर विश्वविद्यालय अधिनियम, 1993 के अनुसार की गई है.

द्वितीय अनुसूची के उपबंध 2(6) के अनुसार, यदि कुलपति का पद मृत्यु, त्यागपत्र या किसी अन्य कारण से रिक्त हो जाए, या वे अस्वस्थता अथवा किसी अन्य वजह से अपने दायित्वों का निर्वहन करने में असमर्थ हों, तो प्रो-वाईस चांसलर कुलपति के कार्य करेंगे. और यदि प्रो-वाईस चांसलर उपलब्ध न हों, तो विश्वविद्यालय का वरिष्ठतम प्रोफ़ेसर तब तक कुलपति के दायित्व निभाएगा जब तक नए कुलपति का कार्यभार ग्रहण न हो जाए या मौजूदा कुलपति अपने दायित्वों पर वापस न लौट आए.’

विश्वविद्यालय ने अपने आधिकारिक नोटिस में कहा, ‘कुलपति की लंबे समय से विश्वविद्यालय मुख्यालय से अनुपस्थिति के चलते यह स्पष्ट है कि वे फिलहाल अपने दायित्वों का निर्वहन करने में असमर्थ हैं. इसलिए उपबंध 2(6) स्वतः लागू होता है.’

बताया गया है कि कंप्यूटर साइंस एवं इंजीनियरिंग विभाग के वरिष्ठतम प्रोफ़ेसर डॉ. भट्टाचार्य को अकादमिक जगत में व्यापक सम्मान प्राप्त है.