बांग्लादेश में एक और हिंदू व्यक्ति की लिंचिंग, अंतरिम सरकार बोली- घटना सांप्रदायिक नहीं

बांग्लादेश के राजबाड़ी ज़िले में कथित उगाही के प्रयास को लेकर एक हिंदू व्यक्ति को भीड़ ने पीट-पीटकर मार डाला. हालांकि, अंतरिम सरकार ने कहा है कि यह मामला आपराधिक है, न कि सांप्रदायिक. हाल के दिनों में वहां यह किसी हिंदू व्यक्ति की लिंचिंग की दूसरी घटना है.

बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों पर कथित अत्याचारों के विरोध में ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन और ऑल इंडिया डेमोक्रेटिक स्टूडेंट्स ऑर्गनाइजेशन के सदस्यों ने 24 दिसंबर को कोलकाता में प्रदर्शन किया. (फोटो: पीटीआई / मानवेंद्र वशिष्ठ लव)

नई दिल्ली: बांग्लादेश के राजबाड़ी ज़िले में कथित उगाही (extortion) के प्रयास को लेकर एक हिंदू व्यक्ति को भीड़ ने पीट-पीटकर मार डाला. हाल के दिनों में किसी हिंदू व्यक्ति की लिंचिंग की यह दूसरी घटना है. हालांकि, अंतरिम सरकार ने कहा है कि यह मामला आपराधिक है, न कि सांप्रदायिक.

द डेली स्टार की रिपोर्ट के मुताबिक, अमृत मंडल उर्फ़ सम्राट को 24 दिसंबर की रात करीब 11 बजे राजबाड़ी के पांग्शा उपजिला स्थित पांग्शा थाने के अंतर्गत होसेंदंगा गांव में स्थानीय लोगों ने पीटा. पुलिस के अनुसार, यह हिंसा इस आरोप के बाद हुई कि मंडल इलाके में उगाही की रकम वसूलने आया था. 

सहायक पुलिस अधीक्षक देब्रता सरकार ने पत्रकारों को बताया कि सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और गंभीर रूप से घायल हालत में मंडल को बचाकर पांग्शा उपजिला स्वास्थ्य परिसर ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया.

पुलिस ने घटनास्थल से मंडल के एक सहयोगी मोहम्मद सलीम को गिरफ्तार किया और दो हथियार- एक पिस्तौल और एक पाइप गन बरामद किया. सरकार ने बताया कि पांग्शा थाने में मंडल के खिलाफ कम से कम दो मामले दर्ज थे, जिनमें एक हत्या का मामला भी शामिल है. इसके अलावा, साल 2023 में दर्ज कई उगाही से जुड़े मामलों में भी वह आरोपी था.

स्थानीय निवासियों ने द डेली स्टार को बताया कि मंडल पर उगाही और अन्य आपराधिक गतिविधियों में शामिल होने के आरोप थे और वह हाल ही में भारत से लौटा था, जहां वह कुछ समय से रह रहा था. घटना की रात वह अपने कुछ साथियों के साथ एक ग्रामीण के घर पैसे वसूलने गया था. जब ग्रामीणों ने शोर मचाया, तब आसपास के लोग मौके पर जमा हो गए और मंडल पर हमला कर दिया, जबकि उसके साथ के अन्य लोग भागने में सफल रहे. 

गुरुवार (25 दिसंबर) को जारी एक बयान में बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने इस हत्या की निंदा की, साथ ही, जनता और अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों से अपील की कि इस घटना को धार्मिक दृष्टि से न देखा जाए. 

बयान में कहा गया, ‘पुलिस से मिली जानकारी और प्रारंभिक जांच के आधार पर यह स्पष्ट है कि यह घटना किसी भी तरह से सांप्रदायिक हमला नहीं था. यह उगाही और आपराधिक गतिविधियों से उपजी एक हिंसक स्थिति का परिणाम था.’

ढाका ने मंडल को ‘शीर्ष अपराधी’ बताया, जिसके ख़िलाफ़ साल 2023 से गिरफ्तारी वारंट लंबित थे. बयान में इस बात पर गहरी चिंता जताई गई कि कुछ समूह मृतक की धार्मिक पहचान को उभारकर इस घटना को सांप्रदायिक हमले के रूप में पेश करने की कोशिश कर रहे हैं, और ऐसे दावों को ‘पूरी तरह निराधार और दुर्भावनापूर्ण’ बताया गया.

बांग्लादेश सरकार ने कहा कि इस भीड़ हिंसा में शामिल लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी और दोहराया कि वह ‘किसी भी तरह की गैरकानूनी गतिविधि या भीड़ द्वारा हिंसा’ का समर्थन नहीं करती.