नई दिल्ली: मध्य प्रदेश के शिवपुरी ज़िले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मिमिक्री कर गैस सिलेंडर की कथित किल्लत पर कटाक्ष करने वाले सरकारी प्राथमिक विद्यालय के एक शिक्षक साकेत पुरोहित को 13 मार्च (शुक्रवार) को निलंबित कर दिया गया है.
इंडियन एक्सप्रेस की ख़बर के मुताबिक, यह कार्रवाई वीडियो के सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पिछोर विधायक प्रीतम सिंह लोधी की शिकायत पर की गई है.
इस संबंध में निलंबित शिक्षक का कहना है कि उनका मकसद सिर्फ लोगों को हंसाना था, किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं. शिक्षक ने इस पूरी कार्रवाई को एकतरफा बताते हुए अखबार से कहा है कि उन्हें कोई नोटिस या सुनवाई का मौका नहीं दिया गया.
उन्होंने कहा, ‘लोगों को अपनी आवाज़ उठाने का पूरा अधिकार है. शिक्षकों को भी अभिव्यक्ति की आज़ादी है. पिछले कुछ सालों में मैंने देखा है कि व्यंग्य और हास्य पर प्रतिबंध लगाए जा रहे हैं.’
उन्होंने यह भी कहा, ‘अगर लोगों को खुलकर बोलने में डर लगता है, तो यह उनकी समस्या है. मुझे लगा कि मुझे अपने मन की बात कहनी चाहिए.’
उल्लेखनीय है कि साकेत पुरोहित का यह वीडियो स्थानीय आनंद भवन में आयोजित एक कार्यक्रम का था, जो हैप्पीनेस विभाग के अंतर्गत आता है.
#WATCH | ‘Mere Pyaare Bhaiyon Aur Behno…’: Primary School Teacher Suspended For Mimicking PM Modi Over #LPG Price Jibe#MadhyaPradesh #MPNews #NarendraModi #LPGCylinder #IndiaNews pic.twitter.com/3qERstRlVM
— Free Press Madhya Pradesh (@FreePressMP) March 14, 2026
उन्होंने बताया, ‘लोग यहां मनोरंजन के लिए आते हैं. कुछ गाते हैं, कुछ अभिनय करते हैं. मैंने मिमिक्री की.’
उल्लेखनीय है कि इस प्रदर्शन में पुरोहित ने एलपीजी सिलेंडरों की बढ़ती कीमतों पर व्यंग्य करते हुए प्रधानमंत्री मोदी के बोलने के अंदाज की नकल की थी.
इस संबंध में उन्होंने कहा, ‘गैस की किल्लत एक सच्चाई है जिस पर व्यंग्य किया गया. मैं इस बात को सामने रख रहा था कि कीमतें बढ़ने से लोग पारंपरिक चूल्हे पर खाना पकाने की ओर लौट सकते हैं.’
उनका कहना है कि उन्हें नहीं लगा था कि यह वीडियो इतना वायरल हो जाएगा. जब यह वायरल हुआ, तो उन्होंने इसे डिलीट कर दिया. उन्होंने कहा, ‘मुझे नहीं पता कि मैंने एक मज़ाक से शांति कैसे भंग कर दी.’
विधायक ने की थी शिकायत
इस संबंध में पिछोर के भाजपा विधायक प्रीतम लोधी ने ज़िला प्रशासन को लिखित शिकायत सौंपी, जिसमें आरोप लगाया गया कि एक सरकारी कर्मचारी द्वारा प्रधानमंत्री का सार्वजनिक रूप से ‘मजाक उड़ाना’ सेवा आचरण नियमों का उल्लंघन है.
शिकायत के बाद इस मामले में ज़िला शिक्षा विभाग ने प्रारंभिक जांच की और ज़िला शिक्षा अधिकारी विवेक श्रीवास्तव ने मध्यप्रदेश सिविल सेवा नियमों के तहत कार्रवाई करते हुए शिक्षक साकेत पुरोहित को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया.
निलंबन अवधि के दौरान उनका मुख्यालय विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय, बदरवास निर्धारित किया गया है. वहीं, शिक्षक का कहना है कि आदेश आने से पहले उन्हें कोई कारण बताओ नोटिस नहीं दिया गया था.
उन्होंने पत्रकारों से कहा, ‘मेरी बात सुने बिना कार्रवाई करना उचित नहीं है.’ उन्होंने आगे कहा, ‘मुझे रात में निलंबित कर दिया गया, और कारण बताओ नोटिस भी नहीं भेजा गया.’
उल्लेखनीय है कि पुरोहित शिवपुरी जिले के सरकारी प्राथमिक विद्यालय में कक्षा एक से पांच तक पढ़ाते हैं. उनका कहना है कि वे बचपन से ही प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे थे और उन्होंने कई परीक्षाएं पास करने के बाद शिक्षा प्रणाली में ही शामिल होने का फैसला किया.
अखबार के अनुसार, उन्हें 2014 में स्थानीय प्राथमिक विद्यालय में तैनात किया गया था. 2017 तक वे आनंद भवन में ‘हैप्पीनेस के मास्टर प्रशिक्षक’ बन चुके थे. उन्होंने बताया कि उनकी विशेषज्ञता ‘कठिन समय में खुशी कैसे फैलाई जाए’ इसमें थी.
पुरोहित पहले भी स्थानीय रक्तदान शिविरों में अपने योगदान और कोविड-19 महामारी के दौरान किए गए कार्यों के लिए सुर्खियों में रहे हैं.
उन्होंने बताया कि कोविड-19 महामारी के दौरान जब ऑक्सीजन सिलेंडरों की भारी कमी हो गई थी, तब उन्होंने एक सामुदायिक संग्रह अभियान चलाया था और करीब 3.5 लाख रुपये एकत्र किए थे. उस समय अखबारों ने उनके सामाजिक कार्यों पर खबरें छापी थीं; अब, वही उन पर शांति भंग करने का आरोप लगा रहे हैं.
गौरतलब है कि सोशल मीडिया और अभिव्यक्ति की बहस यह मामला सरकारी कर्मचारियों के सोशल मीडिया अधिकार पर सवाल उठा रहा है.
इस संबंध में विपक्षी दल कांग्रेस ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सच्चाई भाजपा को रास नहीं आती.
कड़वी सच्चाई भाजपा सरकार को रास नहीं आती!⁰शिवपुरी जिले के शिक्षक श्री साकेत पुरोहित ने गैस किल्लत की आवाज क्या उठाई, उन्हें निलंबित कर दिया गया।
क्या अब सच बोलना भी अपराध है?⁰भाजपा राज में सवाल पूछना, जनता की समस्या उठाना और असहमति जताना सबको कुचलने की कोशिश की जा रही है।
यह… pic.twitter.com/64UOnffcUP
— MP Congress (@INCMP) March 14, 2026
बताया जा रहा है कि कई शिक्षक संगठनों ने भी एकपक्षीय कार्रवाई का विरोध किया है.
