राजस्थान: बीएलओ के वीडियो पर बवाल, मतदाताओं के नाम हटाने के आरोप पर कांग्रेस-भाजपा आमने-सामने

हवामहल क्षेत्र के एक बूथ लेवल अधिकारी (बीएलओ) का हाल ही में आत्महत्या करने की धमकी को लेकर एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था, जिसके बाद सत्तारूढ़ भाजपा और विपक्षी कांग्रेस के बीच एसआईआर के दौरान बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम हटाने की राजनीति को लेकर आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है.

बीएलओ की वायरल वीडियो पर कांग्रेस ने भाजपा की तीखी आलोचना की. (फोटो साभार: सोशल मीडिया)

नई दिल्ली: राजस्थान के हवामहल क्षेत्र के एक बूथ लेवल अधिकारी (बीएलओ) का हाल ही में आत्महत्या करने की धमकी को लेकर एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था, जिसके बाद पक्ष और विपक्ष विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम हटाने की राजनीति को लेकर आमने-सामने हैं.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, वायरल वीडियो में जयपुर के हवा महल विधानसभा क्षेत्र के सरकारी शिक्षक बीएलओ कीर्ति कुमार को कथित तौर पर आत्महत्या की धमकी देते हुए सुना गया था, जिसमें उन्होंंने आरोप लगाया था कि उन पर प्रक्रिया का पालन किए बिना मुस्लिम वोटर्स के नाम मतदाता सूची से हटाने का दबाव डाला जा रहा है.

इस संबंध में अखबार से बात करते हुए कीर्ति कुमार ने दावा किया कि उन पर अपने इलाके से 450 नाम हटाने का ‘भारी दबाव’ था.

कीर्ति ने कहा, ‘मैं इलाके के पार्षद से बात कर रहा था जो मुझ पर नाम हटाने का दबाव डाल रहे थे. प्रक्रिया का पालन किए बिना मैं यह कैसे कर सकता हूं? मेरा वीडियो वायरल होने के बाद वरिष्ठ अधिकारियों ने हस्तक्षेप किया और मुझे नियमों का पालन करने को कहा गया.’

उल्लेखनीय है कि इस मामले के सामने आने के बाद कांग्रेस ने दावा किया कि यह राजस्थान भर में मतदाता सूची से नाम हटाने के व्यापक पैटर्न को दर्शाता है.

पार्टी ने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने एसआईआर के दौरान प्रत्येक निर्वाचन क्षेत्र में हजारों अल्पसंख्यक और कांग्रेस समर्थक मतदाताओं के नाम हटाने के लिए पहले से भरे हुए फॉर्म 7 आवेदन जमा किए थे.

हालांकि, इस आरोप को सत्तारूढ़ दल भाजपा ने पूरी तरह से खारिज़ किया है.

जयपुर नगर निगम (हेरिटेज) के वार्ड 13 के पार्षद सुरेश सैनी ने अपने ऊपर लगे आरोपों के जवाब में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी से इनकार किया और दावा किया कि उनके क्षेत्र में ‘बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी’ हुई है.

उन्होंने कहा, ‘फर्जी पते का इस्तेमाल फर्जी मतदाताओं को पंजीकृत करने के लिए किया जा रहा है. मैंने आपत्ति जताई और सबूतों के साथ ऐसे नामों को हटाने के लिए आवेदन किया. यह कांग्रेस द्वारा मतदाता धोखाधड़ी के बराबर है.’

इस बीच, हवा महल से भाजपा विधायक बालमुकुंद आचार्य, जिनका नाम बीएलओ के कथित वीडियो सामने आया था, ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर कांग्रेस के आरोपों को ‘बेबुनियाद’ बताया.

उन्होंने कहा, ‘ऐसा लगता है कि कांग्रेस पार्टी के नेताओं का मानसिक संतुलन बिगड़ गया है. चुनाव आयोग एक स्वतंत्र संवैधानिक निकाय है जिसका उद्देश्य लोकतांत्रिक प्रक्रिया को जीवित रखना है. आयोग कुशलता से काम कर रहा है. कांग्रेस ने हाल ही में हुए उपचुनावों में राजस्थान में एक सीट जीती थी. उन्होंने तब आपत्ति क्यों नहीं जताई? कांग्रेस को वास्तविक मुद्दों पर लड़ना चाहिए.’

भाजपा-कांग्रेस आमने-सामने

गौरतलब है कि राजस्थान के मुख्य निर्वाचन अधिकारी द्वारा प्रकाशित आंकड़ों के अनुसार, भाजपा की ओर से मतदाता सूची से नाम हटवाने के लिए 18,896 फॉर्म 7 आवेदन जमा किए गए हैं, जबकि कांग्रेस ने केवल दो आवेदन जमा किए हैं. जिन लोगों ने अपना नाम हटवाने का दावा किया है, उनमें कांग्रेस पार्षद अकबर पठान भी शामिल हैं.

इस संबंध में जयपुर के वार्ड नंबर 89 के पार्षद पठान ने अखबार से बात करते हुए दावा किया कि उनके नाम से जमा किए गए फॉर्म में गलत तरीके से यह बताया गया है कि वे जयपुर में नहीं रहते हैं.

उन्होंने कहा, ‘भाजपा का बीएलए (बूथ एजेंट) जिसने मेरे नाम से फॉर्म 7 आवेदन जमा किया है, वह मेरे घर के पास रहता है और मुझसे हर दिन मिलता है.’

इस मामले को लेकर 17 जनवरी को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में आदर्श नगर के विधायक रफीक खान ने भाजपा नेता रवि कुमार नैयर पर, जो 2023 के विधानसभा चुनावों में उनसे हार गए थे, ‘झूठी जानकारी’ का इस्तेमाल करके 400-500 नाम हटाने की सिफारिश करने का आरोप लगाया.

उन्होंने कहा, ‘विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया 15 जनवरी की समय सीमा से दो दिन पहले तक सुचारू रूप से चल रही थी, जब कांग्रेस समर्थित मतदाताओं के नाम हटाने के लिए कथित तौर पर साजिश रची गई. आदर्श नगर में अल्पसंख्यक बहुल क्षेत्रों में जाली फॉर्म 7 के माध्यम से हजारों नाम हटाने की सिफारिश की गई.’

हालांकि, नय्यर ने किसी भी प्रकार की गड़बड़ी से इनकार करते हुए दावा किया कि जिन नामों को हटाने की सिफारिश की गई थी, वे उत्तर प्रदेश और बिहार में रहने वाले लोगों के थे.

इसी तरह अलवर में कांग्रेस ने आरोप लगाया कि कांग्रेस समर्थक मतदाताओं के नाम हटाने के लिए जिला कलेक्टर कार्यालय में लगभग 10,000 फॉर्म 7 आवेदन जमा किए गए हैं.

अलवर के किशनगढ़-तिजारा में कांग्रेस इकाई के अध्यक्ष बलराम यादव ने दावा किया, ‘जब मैंने पूछा कि ये फॉर्म किसने जमा किए हैं, तो अधिकारियों ने नाम बताने से इनकार कर दिया.’

उन्होंने आगे कहा, ‘कुछ फॉर्मों की जांच करने पर हमने पाया कि आवेदक और जिसका नाम हटाने की मांग की गई थी, दोनों मुस्लिम थे. जब हमने इन मतदाताओं से संपर्क किया, तो उन्होंने कोई भी फॉर्म जमा करने से इनकार कर दिया.’

एक अन्य ज़िले बाड़मेर में एक शिकायतकर्ता ने पुलिस से संपर्क कर आरोप लगाया कि उनके नाम से जमा किया गया फॉर्म 7 जाली था.

इस संबंध में राज्य कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और विपक्ष के नेता टीकाराम जुली ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर भाजपा पर रातोंरात हजारों पहले से छपे हुए आवेदन जमा करने का आरोप लगाया और इसे ‘लोकतंत्र और मतदान के मौलिक अधिकार पर सीधा हमला’ बताया.

हालांकि, भाजपा ने इन आरोपों को ‘चुनावी प्रक्रिया में बाधा डालने का प्रयास’ बताते हुए खारिज कर दिया.

इस संबंध मेंं राजस्थान के उपमुख्यमंत्री प्रेमचंद बैरवा ने मीडिया से कहा, ‘भारत में यह पहली बार नहीं है जब एसआईआर (पूर्व-सूचना प्रणाली) का संचालन किया जा रहा है. जिन लोगों के नाम दो जगहों पर पंजीकृत हैं, या जो मृत हैं, उनके नाम हटाए जा रहे हैं. आरोप-प्रत्यारोप का खेल खेलना और प्रक्रिया में बाधा डालना सही नहीं है.’