नई दिल्ली: जम्मू-कश्मीर बोर्ड ऑफ प्रोफेशनल एंट्रेंस एग्ज़ामिनेशन (जेकेबीओपीईई) ने शैक्षणिक सत्र 2025-26 के लिए नई काउंसलिंग कराने से इनकार कर दिया है. बोर्ड ने केंद्र शासित प्रदेश की सरकार से कहा है कि वह कटरा स्थित श्री माता वैष्णो देवी इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल एक्सीलेंस के छात्रों को अन्य मेडिकल कॉलेजों में सुपरन्यूमरेरी (अतिरिक्त) सीटों पर अपने स्तर पर दाख़िला दे.
ज्ञात हो कि इस महीने की शुरुआत में नेशनल मेडिकल कमीशन (एनएमसी) ने वैष्णोदेवी मेडिकल कॉलेज को एमबीबीएस पाठ्यक्रम में दाख़िले की पिछले साल सितंबर में दी गई अनुमति को वापस ले लिया था. इसके बाद संस्थान में दाख़िला ले चुके 50 एमबीबीएस छात्र बिना कॉलेज के रह गए हैं.
यह फ़ैसला कॉलेज की 50 सीटों में से 48 पर ग़ैर हिंदू छात्रों के दाखिले के बाद भाजपा, बजरंग दल समेत अन्य दक्षिणपंथी संगठनों के विरोध के बाद लिया गया था. हालांकि एनएमसी ने इसके लिए कॉलेज के बुनियादी ढांचे और संचालन में खामियों का हवाला दिया. यह भी गौर करने योग्य है कि यह फैसला ऐसे समय आया, जब कोर्स की छात्र संरचना को लेकर दक्षिणपंथी संगठनों ने विरोध किया था. 50 में से 47 छात्र मुस्लिम थे और अधिकांश कश्मीर से थे.
कोर्स की अनुमति वापस लेते समय एनएमसी ने जम्मू-कश्मीर सरकार से इन छात्रों को केंद्र शासित प्रदेश के अन्य मेडिकल कॉलेजों में सुपरन्यूमरेरी सीटों के तहत दाख़िला देने को कहा था. इसके बाद जम्मू-कश्मीर के स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग ने जेकेबीओपीईई को पत्र लिखकर अन्य मेडिकल कॉलेजों में सुपरन्यूमरेरी सीटें आवंटित करने का अनुरोध किया था.
लेकिन इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, 21 जनवरी को स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के प्रशासनिक सचिव को भेजे गए पत्र में जेकेबीओपीईई की अंडर सेक्रेटरी नाज़िया चौधरी ने कहा, ‘बोर्ड ने यह पाया है कि वह वर्ष 2025-26 के लिए किसी भी नई काउंसलिंग के लिए बाध्य नहीं है, क्योंकि वह मेडिकल काउंसलिंग कमेटी (एमसीसी), स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, नई दिल्ली द्वारा जारी काउंसलिंग शेड्यूल से आगे नहीं जा सकता.’
पत्र में आगे कहा गया, ‘इसके अलावा, एमसीसी के निर्देशों के अनुसार 1,410 एमबीबीएस छात्रों का डेटा, जिसमें वैष्णो देवी मेडिकल कॉलेज के 50 छात्र भी शामिल हैं, जॉइनिंग की अंतिम तिथि, यानी 31 दिसंबर 2025 को उनके पोर्टल पर अपडेट कर दिया गया है.’
यह कहते हुए कि सुपरन्यूमरेरी सीटों का सृजन और आवंटन उसके दायरे में नहीं आता, बोर्ड ने जम्मू-कश्मीर सरकार से कहा है कि वह वैष्णो देवी मेडिकल कॉलेज में पहले दाख़िला ले चुके छात्रों के लिए अन्य मेडिकल कॉलेजों में सुपरन्यूमरेरी सीटों का नया आवंटन एनएमसी और संबंधित मेडिकल कॉलेजों से परामर्श कर अपने स्तर पर करे.
दक्षिणपंथी संगठनों का विरोध
इस वर्ष कॉलेज के पहले बैच में मेरिट लिस्ट में अधिकांश मुस्लिम छात्रों का नाम आने के बाद भाजपा समेत अन्य दक्षिणपंथी संगठन मेरिट लिस्ट को रद्द करने की मांग कर रहे थे. बाद में बजरंग दल और अन्य हिंदुत्व संगठनों के कार्यकर्ताओं ने संस्थान में घुसकर प्रदर्शन किया था. और संस्थान बंद करने की मांग भी कर रहे थे.
संगठनों ने सवाल उठाया था कि वैष्णो देवी के श्रद्धालुओं द्वारा दान की गई राशि से चलने वाले इस कॉलेज में इतनी बड़ी संख्या में मुस्लिम छात्रों को कैसे दाख़िला दिया गया. हालांकि, बाद में यह भी सामने आया कि श्री माता वैष्णो देवी (एसएमवीडी) विश्वविद्यालय, जो इस संस्थान का संचालन करता है, उसे जम्मू कश्मीर की सरकार से लगातार अनुदान मिलता रहा है.
बाद में कॉलेज से दाखिले की अनुमति वापिस ली जाने के बाद दक्षिणपंथी संगठनों ने जश्न भी मनाया था.
