नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश के संभल में 48 घंटों के भीतर दो मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) का तबादला हो गया है. इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 20 जनवरी को सिविल जज (सीनियर डिवीजन) आदित्य सिंह को संभल का सीजेएम घोषित किया था, अब गुरुवार (22 जनवरी) में हाईकोर्ट ने अपने आदेश में संशोधन करते हुए कौशांबी के सीजेएम दीपक कुमार जयसवाल को संभल का नया जज नियुक्त किया है.
यह फ़ैसला ऐसे समय में आया है जब चंदौसी कोर्ट और राज्य के अन्य हिस्सों में वकील विरोध प्रदर्शन और कर रहे थे.
गौरतलब है कि संभल के निवर्तमान सीजेएम विभांशु सुधीर के स्थान पर आदित्य सिंह की नियुक्ति का व्यापक विरोध हो रहा था और इस पर सार्वजनिक बहस तेज़ हो चुकी थी. आदित्य सिंह वही न्यायिक अधिकारी हैं, जिन्होंने संभल की शाही जामा मस्जिद के सर्वेक्षण का आदेश दिया था, जिसके बाद से संभल में चल रहे विवाद की शुरुआत हुई थी.
हालांकि, संभल की चंदौसी बार एसोसिएशन ने इस विवाद से खुद को अलग करते हुए कहा था कि वकीलों द्वारा किया गया विरोध व्यक्तिगत स्तर पर किया गया था.
22 जनवरी को जारी नए आदेश में कोर्ट ने जज आदित्य सिंह का तबादला रद्द करते हुए उन्हें उनके मूल पद, सिविल जज (सीनियर डिवीजन), संभल पर वापस भेज दिया है.
नए आदेश के अनुसार, जज जयसवाल निवर्तमान सीजेएम विभांशु सुधीर की जगह लेंगे, जिनका तबादला सुल्तानपुर किया जाना पहले ही तय किया जा चुका है.
गौरतलब है कि सीजेएम सुधीर का तबादला उनके उस आदेश के कुछ ही दिनों बाद किया गया था, जिसमें उन्होंने नवंबर 2024 में हुए संभल हिंसा मामले में तत्कालीन सर्किल ऑफिसर अनुज चौधरी समेत कई पुलिस अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया था.
कोर्ट का यह आदेश 9 जनवरी को यामीन नामक एक शख्स द्वारा दाखिल अर्जी पर सुनवाई के बाद पारित किया गया था. यामीन का आरोप है कि 24 नवंबर 2024 को संभल में हुई हिंसा के दौरान उनके 24 वर्षीय बेटे आलम को पुलिस फायरिंग में गोली लगी थी. यामीन के मुताबिक, उनका बेटा उस दिन सुबह अपने घर से ठेले पर पापड़ और बिस्कुट बेचने निकला था. सुबह करीब 8:45 बजे जब वह शाही जामा मस्जिद इलाके के पास पहुंचा, तब वहां पहले से ही भारी भीड़ मौजूद थी.
पुलिस अधिकारियों पर आरोप है कि उन्होंने जान से मारने की नीयत से फायरिंग की थी, जिसमें आलम गंभीर रूप से घायल हो गया था.
सीजेएम ने अपने आदेश में कहा था कि प्रथमदृष्टया यह मामला गंभीर संज्ञेय अपराध का प्रतीत होता है और इसकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है. साथ ही, सात दिनों के भीतर एफआईआर दर्ज होने की सूचना अदालत के समक्ष प्रस्तुत करने का भी निर्देश दिया था.
हालांकि संभल पुलिस ने एफआईआर दर्ज करने से इनकार करते हुए कहा था कि वह कोर्ट के इस आदेश के विरुद्ध अपील करेगी.
ज्ञात हो कि 24 नवंबर 2024 को कोर्ट के आदेश पर संभल स्थित मुग़लकालीन शाही जामा मस्जिद के सर्वेक्षण के दूसरे दिन हिंसा भड़क उठी थी, जिसमें 5 लोग मारे गए थे. तब से संभल सुर्खियों में है.
19 नवंबर 2024 को मस्जिद के सर्वे के लिए याचिका दायर की गई, उसी दिन अदालत ने सर्वे की अनुमति भी दे दी और रात के अंधेरे में मस्जिद का पहला सर्वे भी कर लिया गया था. लेकिन 24 नवंबर को सर्वे के दूसरे दिन, सर्वेक्षण का विरोध कर रहे प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच हिंसक झड़प हो गई. हालांकि पुलिस इस बात से इनकार करती है कि किसी भी शख्स की मौत उनकी गोलियों से हुई थी.
