नई दिल्ली: ओडिशा के कोरापुट ज़िला प्रशासन ने व्यापक विरोध के बीच रविवार (25 जनवरी) को अपने दो दिन पहले जारी उस आदेश को वापस ले लिया, जिसमें गणतंत्र दिवस के अवसर पर मांस, चिकन, मछली, अंडे और अन्य मांसाहारी (नॉन-वेज) खाद्य पदार्थों की बिक्री पर प्रतिबंध लगाया गया था.
रिपोर्ट के मुताबिक, रविवार को कलेक्टर और जिलाधीश मनोज सत्यवान महाजन द्वारा हस्ताक्षरित एक आधिकारिक पत्र में कहा गया है कि गणतंत्र दिवस पर मांसाहारी भोजन की बिक्री पर प्रतिबंध लगाने का यह निर्देश ‘ज़िला स्तरीय गणतंत्र दिवस तैयारी समिति के सुझाव पर जारी किया गया था, जिसे विचार-विमर्श के बाद तत्काल प्रभाव से रद्द किया जाता है.
उल्लेखनीय है कि इससे पहले मनोज सत्यवान महाजन ने शुक्रवार (23 जनवरी) को जारी एक आदेश में तहसीलदारों, खंड विकास अधिकारियों (बीडीओ) और नगर निकाय के कार्यकारी अधिकारियों को अपने क्षेत्रों में एक आधिकारिक अधिसूचना जारी कर 77वें गणतंत्र दिवस समारोह, 2026 के अवसर पर मांस, चिकन, मछली, अंडे आदि और अन्य मांसाहारी खाद्य पदार्थों की बिक्री पर प्रतिबंध लगाने का निर्देश दिया था.
Odisha: Koraput Collector & DM has written to all Tahsildars, all Block Development Officers and all Executive Officers of the district to issue an official order in their jurisdiction for prohibition on selling of meat, chicken, fish, egg, etc and non- vegetarian food on the… pic.twitter.com/4WmcCMtOXv
— ANI (@ANI) January 24, 2026
इंडियन एक्सप्रेस ने अज्ञात अधिकारियों के हवाले से बताया है कि एक शुरुआती बैठक के दौरान कुछ लोगों छात्रों के देशभक्ति परेड में हिस्सा लेते समय प्रमुख शहरी क्षेत्रों में मांसाहारी खाद्य पदार्थों की बिक्री पर आपत्ति जताई थी.
प्रशासन के इस विवादास्पद आदेश की व्यापक आलोचना हुई और लोगों ने इसका कड़ा विरोध किया.
इस संबंध में सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी और केंद्रीय जांच ब्यूरो के पूर्व निदेशक एम. नागेश्वर राव ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा, ‘कोरापुट के कलेक्टर और ज़िला मजिस्ट्रेट या उनके अधिकारियों के पास गणतंत्र दिवस (26 जनवरी) पर मांसाहारी भोजन पर प्रतिबंध लगाने का कोई वैधानिक अधिकार नहीं है.’
Neither the Collector & District Magistrate of Koraput, nor his officers, has any statutory powers to impose a ban on non-vegetarian food on Republic Day (26 January).👇.This constitutes a clear case of jurisdictional overreach.
Moreover, what possible connection exists between… pic.twitter.com/PsJav2gtT1
— M. Nageswara Rao IPS (Retired) (@MNageswarRaoIPS) January 24, 2026
उन्होंने आगे कहा, ‘यह अधिकारक्षेत्र का स्पष्ट उल्लंघन है. इसके अलावा गणतंत्र दिवस मनाने और शाकाहार को लागू करने के बीच ऐसा क्या संबंध है जो मांसाहारी भोजन पर प्रतिबंध को उचित ठहरा सके? इससे वैधता, अधिकारक्षेत्र के उल्लंघन और नैतिकता के गंभीर प्रश्न उठते हैं.’
इस मामले को लेकर कोरापुट निर्वाचन क्षेत्र से सांसद और ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज संबंधी स्थायी समिति के अध्यक्ष सप्तगिरि उलका ने भी मांसाहारी भोजन की बिक्री पर प्रतिबंध को ‘मनमाना, भेदभावपूर्ण और असंवैधानिक’ बताया.
An elected Republic cannot honour the Constitution by curbing constitutional freedoms. The ban on sale of non-veg food on #RepublicDay in #Koraput is arbitrary, exclusionary, unconstitutional. What was the necessity, Why single out a tribal dominated, culturally diverse district? https://t.co/ISotWxHyC2
— Saptagiri Ulaka (@saptagiriulaka) January 24, 2026
उलका ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर सवाल उठाया, ‘एक निर्वाचित गणतंत्र संवैधानिक स्वतंत्रता पर अंकुश लगाकर संविधान का सम्मान नहीं कर सकता… इसकी क्या आवश्यकता थी? आदिवासी बहुल और सांस्कृतिक रूप से विविध जिले को ही क्यों निशाना बनाया गया?’
गौरतलब है कि 2011 की जनगणना के अनुसार, कोरापुट मुख्य रूप से एक आदिवासी ज़िला है. इसकी आधी आबादी अनुसूचित जनजाति (50.6%) है. जबकि ज़िले की कुल आबादी में अनुसूचित जाति के लोग 14.2% हैं.
