नई दिल्ली: लोकसभा में सोमवार (2 फरवरी) को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव (मोशन ऑफ थैंक्स) पर चर्चा के दौरान उस समय भारी हंगामा खड़ा हो गया, जब नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने अपने भाषण की शुरुआत द कारवां मैगज़ीन की एक रिपोर्ट के उद्धरण से की.
द कारवां की यह रिपोर्ट पूर्व सेना प्रमुख जनरल मनोज नरवणे की एक अप्रकाशित किताब ‘फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी‘ (Four Stars of Destiny) को केंद्र में रखकर लिखी गई है.
राहुल गांधी ने रिपोर्ट के हवाले से कहा कि 2017 के डोकलाम गतिरोध के दौरान चीनी टैंक भारतीय सीमा में दाखिल हो गए थे. गांधी ने कहा, ‘चीनी टैंक कैलाश रेंज पर भारतीय ठिकानों से कुछ सौ मीटर की दूरी तक आ गए थे.’
नेता प्रतिपक्ष के इतना कहते ही सदन में ज़ोरदार हंगामा शुरू हो गया. राहुल गांधी के भाषण पर आपत्ति जताई गई और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह तथा गृह मंत्री अमित शाह ने उन्हें बीच में ही टोक दिया.
रक्षा मंत्री ने कहा, ‘मैं चाहता हूं कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी उस किताब को सदन के सामने पेश करें, जिससे वह उद्धरण दे रहे हैं, क्योंकि जिस किताब का वह ज़िक्र कर रहे हैं, वह अभी प्रकाशित नहीं हुई है.’
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने स्पष्ट किया कि संसद के नियमों के तहत सदन की कार्यवाही से असंबंधित किसी भी पत्रिका या अख़बार के लेख को उद्धृत नहीं किया जा सकता. इस पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत-चीन संबंधों से जुड़े एक लेख का हवाला देना सदन के नियमों का उल्लंघन है.
राहुल गांधी ने आपत्ति का जवाब देते हुए कहा कि उनका स्रोत पूरी तरह प्रामाणिक है और जिन बातों का वह उल्लेख कर रहे हैं, वे पूर्व सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे की अप्रकाशित आत्मकथा से ली गई हैं. उन्होंने कहा कि इसमें किसी तरह की असत्य जानकारी नहीं है.
हालांकि, अध्यक्ष के रुख पर कायम रहते हुए राहुल गांधी को आगे पढ़ने की अनुमति नहीं दी गई. इस पर उन्होंने सवाल उठाया, ‘इसमें ऐसा क्या है जिससे आप लोग इतना डर रहे हैं? अगर डर नहीं है तो मुझे पढ़ने दिया जाना चाहिए.’
राहुल गांधी ने यह भी पूछा कि क्या वह बिना जनरल नरवणे का सीधा हवाला दिए लेख की बात रख सकते हैं, लेकिन इसकी भी अनुमति नहीं दी गई.
इस बीच, सदन में शोर-शराबा तेज़ हो गया और कार्यवाही बाधित होती रही. चार बजे कार्यवाही दोबारा शुरू हुई लेकिन दस ही मिनट में इसे मंगलवार सुबह तक के लिए स्थगित कर दिया गया.
इस पूरे घटनाक्रम ने संसद में अभिव्यक्ति की सीमाओं, संसदीय नियमों और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर एक नई बहस को जन्म दे दिया है.
किताब का प्रकाशन रुका था
उल्लेखनीय है कि जनरल एमएम नरवणे की आत्मकथा के प्रकाशन को फिलहाल रोक दिया गया है.
पहले यह किताब दिसंबर 2023 में प्रकाशित होने वाली थी, फिर बताया गया कि 15 जनवरी 2024 को रिलीज़ होगी, लेकिन जनवरी 2024 में अमेज़ॉन वेबसाइट पर इसकी रिलीज़ की तारीख़ 30 अप्रैल के आसपास दिखाई देने लगी. तब द वायर ने एक रिपोर्ट में बताया था कि इस किताब में कई ख़ुलासे शामिल हैं, इसलिए इसकी समीक्षा रक्षा और विदेश मंत्रालय द्वारा की जा रही है.
ख़बरों के अनुसार, किताब में कई रहस्योद्घाटन शामिल हैं, जिनमें पूर्व सेना प्रमुख नरवणे विस्तार से बता रहे हैं कि कैसे उन्हें अगस्त 2020 में चीनी सेना की मूवमेंट से निपटने वाली कठिन परिस्थितियां सौंपी गई थीं और कैसे अग्निपथ योजना ने सशस्त्र बलों को आश्चर्य में डाल दिया था.
जनरल नरवणे 30 अप्रैल 2022 को सेना प्रमुख के पद से सेवानिवृत्त हुए थे और तब से उन्होंने पटियाला के पंजाबी विश्वविद्यालय से रक्षा और रणनीतिक अध्ययन में पीएचडी पूरी की है.
