फिल्म ‘घूसखोर पंडत’ के ख़िलाफ़ यूपी में केस दर्ज, निर्देशक ने माफ़ी मांगी; नेटफ्लिक्स ने टीज़र हटाया

नेटफ्लिक्स पर आने वाली नीरज पांडे की फिल्म ‘घूसखोर पंडत’ के ख़िलाफ़ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आदेश पर लखनऊ में एफआईआर दर्ज होने के बाद नेटफ्लिक्स द्वारा फिल्म के टीज़र समेत सभी प्रचार सामग्री हटा ली गई है. निर्देशक नीरज पांडे ने लोगों की भावनाओं को ठेस पहुंचाने के लिए माफ़ी भी मांगी है.

फिल्म के टीजर का एक दृश्य. (फोटो साभार: सोशल मीडिया)

नई दिल्ली: मनोज बाजपेयी की आने वाली फिल्म ‘घूसखोर पंडत’ के शीर्षक को लेकर उठा विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है. मुंबई स्थित फिल्म निर्माता संस्था फिल्म मेकर्स कंबाइन (एफएमसी) से नोटिस मिलने के बाद अब उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आदेश पर राजधानी लखनऊ की हज़रतगंज कोतवाली में फिल्म के निर्देशक व उनकी टीम के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है.

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, लखनऊ पुलिस कमिश्नरेट की ओर से शुक्रवार (6 फरवरी) को जारी किए गए प्रेस नोट में  फिल्म पर जातिगत अपमान, सामाजिक आक्रोश और शांति भंग करने की कोशिश का आरोप लगाया है.

इसमें आगे कहा गया है कि फिल्म का शीर्षक एक विशेष समुदाय/जाति (ब्राह्मण) को लक्षित कर अपमानित करने के उद्देश्य से रखा गया है. फिल्म के नाम और सामग्री को लेकर ब्राह्मण समाज और कई सामाजिक संगठनों में भारी गुस्सा है. संगठनों ने इसके ख़िलाफ़ उग्र प्रदर्शन की चेतावनी भी दी है.

मालूम हो कि इससे पहले अधिवक्ता विनीत जिंदल ने दिल्ली हाईकोर्ट में एक रिट याचिका दायर कर फिल्म की रिलीज पर तत्काल रोक लगाने की मांग की थी. याचिका में कहा गया है कि शीर्षक ‘घूसखोर पंडित’ ब्राह्मण समुदाय की गरिमा, प्रतिष्ठा और भावनाओं को ठेस पहुंचाता है और जानबूझकर अपमानजनक बनाया गया है.

हालांकि, नेटफ्लिक्स ने अभी तक इस घटनाक्रम पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन शुक्रवार को ही इस फिल्म से जुड़ी सभी प्रमोशनल सामग्री को हटा लिया गया, जैसा कि इसके निर्देशक नीरज पांडे ने अपने बयान में भी कहा था.

शीर्षक से लोगों को पहुंची ठेस के लिए माफी: नीरज पांडे

इस पूरे विवाद पर निर्देशक नीरज पांडे ने सोशल मीडिया पर एक बयान जारी कर स्पष्ट किया है कि फिल्म में ‘पंडत’ शब्द एक उपनाम था, न कि किसी समुदाय पर हमला. नीरज पांडे ने शीर्षक से लोगों को पहुंची ठेस के लिए माफी भी मांगी है.

उन्होंने कहा, ‘हम समझते हैं कि फिल्म के शीर्षक से कुछ दर्शकों को ठेस पहुंची है और हम उनकी भावनाओं को समझते हैं. फिल्म से संबंधित सभी प्रचार सामग्री, जिसमें फर्स्ट लुक टीजर भी शामिल है, हटा दी गई है.’

नीरज पांडे ने लिखा, ‘हमारी फिल्म एक काल्पनिक पुलिस ड्रामा है, और ‘पंडित’ शब्द का प्रयोग केवल एक काल्पनिक किरदार के बोलचाल के नाम के रूप में किया गया है. कहानी एक व्यक्ति के कार्यों और विकल्पों पर केंद्रित है. किसी भी जाति, धर्म या समुदाय पर टिप्पणी या प्रतिनिधित्व नहीं करती है. एक फिल्म निर्माता के रूप में, मैं अपने काम को गहरी जिम्मेदारी की भावना के साथ करता हूं – ऐसी कहानियां सुनाने के लिए जो विचारशील और सम्मानजनक हों. यह फिल्म, मेरे पिछले कामों की तरह, पूरी ईमानदारी से बनाई गई है और इसका एकमात्र उद्देश्य दर्शकों का मनोरंजन करना है.’

फिल्म पर जताई जा रही आपत्तियों पर एक्टर मनोज बाजपेयी ने भी प्रतिक्रिया दी है. मनोज बाजपेयी ने सोशल मीडिया पर एक बयान साझा करते हुए लोगों की चिंताओं को स्वीकार किया.

उन्होंंने एक्स पर लिखा, ‘एक एक्टर के तौर पर मैं किसी फिल्म में अपने किरदार और कहानी के ज़रिए आता हूं. मेरे लिए, यह (‘घूसखोर पंडत’ का किरदार) एक कमज़ोर इंसान और उसकी खुद को पहचानने की यात्रा को दिखाने के बारे में था. इसका मकसद किसी भी समुदाय के बारे में कोई बयान देना नहीं था.’

मनोज बाजपेयी ने आगे कहा कि नीरज पांडे के साथ काम करने के मेरे अनुभव में, उन्होंने जिस तरह से अपनी फिल्मों पर काम किया है, उसमें लगातार गंभीरता और सावधानी रही है. लोगों की भावनाओं को देखते हुए, फिल्म बनाने वालों ने प्रमोशनल सामग्री हटाने का फैसला किया है. यह दिखाता है कि चिंताओं को कितनी गंभीरता से लिया जा रहा है.

बसपा सुप्रीमो ने भी की आलोचना

वहीं, इस मामले को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं. बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रमुख मायावती ने केंद्र सरकार से इस फिल्म पर प्रतिबंध लगाने की मांग की है.

उन्होंने एक सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, ‘यह बड़े दुख व चिंता की बात है कि पिछले कुछ समय से अकेले यूपी में ही नहीं बल्कि अब तो फिल्मों में भी ‘पंडित’ को घुसपैठिया बताकर पूरे देश में जो इनका अपमान व अनादर किया जा रहा है.’

मायावती ने लिखा कि इससे ब्राह्मण समाज में इस समय ‘ज़बरदस्त रोष’ है और इसकी उनकी पार्टी भी ‘कड़े शब्दों में निंदा’ करती है.

उन्होंने आगे लिखा कि ऐसी इस जातिसूचक फिल्म पर केंद्र सरकार को तुरंत प्रतिबंध लगाना चाहिए.

वहीं, केंद्रीय मंत्री सतीश चंद्र दुबे ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कदम की सराहना करते हुए कहा कि निर्देशक नीरज पांडे द्वारा बनाई जा रही उस फिल्म को हटाने का फैसला बेहद सराहनीय और ऐतिहासिक है. यह फिल्म रचनात्मकता के नाम पर ब्राह्मण समाज को नीचा दिखाने और उसकी छवि खराब करने की एक और कोशिश थी, जिसे किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जा सकता.

गौरतलब है कि इससे पहले विश्व हिंदू परिषद के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने नेटफ्लिक्स को पत्र लिखकर फिल्म के शीर्षक की आलोचना की थी और सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय से कार्रवाई की मांग की थी.