मणिपुर: दिवंगत भाजपा विधायक के परिजनों का अलग ज़िले की मांग पूरी होने तक अंतिम संस्कार से इनकार

मई 2023 में मणिपुर की राजधानी इंफाल में भीड़ द्वारा किए गए हमले में गंभीर रूप से घायल हुए भाजपा विधायक वुंगज़ागिन वाल्टे का बीते हफ्ते निधन हो गया. अब उनके परिवार ने कहा कि जब तक ज़ोमी समुदाय की लंबे समय से चली आ रही अलग ज़िला बनाने की मांग सरकार द्वारा स्वीकार नहीं की जाती, तब तक उनका अंतिम संस्कार नहीं किया जाएगा.

भाजपा विधायक वुंगज़ागिन वाल्टे का पार्थिव शरीर मंगलवार, 24 फरवरी, 2026 को मणिपुर के चूड़ाचांदपुर में उनके घर लाया गया. (फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायक वुंगज़ागिन वाल्टे के निधन ने मणिपुर में राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है. उनके परिवार ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक ज़ोमी समुदाय की लंबे समय से चली आ रही अलग जिला बनाने की मांग सरकार द्वारा स्वीकार नहीं की जाती, तब तक उनका अंतिम संस्कार नहीं किया जाएगा.

ज़ोमी समुदाय से संबंध रखने वाले वाल्टे 4 मई 2023 को इंफाल में भीड़ द्वारा किए गए हमले में गंभीर रूप से घायल हो गए थे. यह हमला मेईतेई और कुकी-ज़ो समुदायों के बीच हिंसा भड़कने के एक दिन बाद हुआ था. वह इन चोटों से कभी उबर नहीं सके और बीते सप्ताह हरियाणा के एक अस्पताल में उनका निधन हो गया.

द हिंदू की रिपोर्ट के अनुसार, परिवार ने उनकी मौत की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) से कराने की मांग भी की है.

परिजनों के अनुरोध पर वाल्टे का पार्थिव शरीर पहले दिल्ली से आइजोल (मिजोरम) ले जाया गया और वहां से सड़क मार्ग से 24 फरवरी को मणिपुर के उनके गृह नगर चूड़ाचांदपुर पहुंचाया गया. रास्ते भर सैकड़ों लोगों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी.

अख़बार के मुताबिक, मणिपुर के मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह ने परिवार को राज्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार कराने की व्यवस्था का आश्वासन दिया है. हालांकि, वाल्टे के बेटे जोसेफ ने अख़बार से कहा कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक दफनाने की प्रक्रिया नहीं होगी.

उन्होंने कहा कि इन मांगों को पहले ही मणिपुर के राज्यपाल अजय कुमार भल्ला को सौंपा जा चुका है.

24 फरवरी को चूड़ाचांदपुर में पूर्ण बंद रहा. राज्य सरकार ने 22 से 24 फरवरी तक राजकीय शोक घोषित किया था.

उधर, ज़ोमी काउंसिल के अध्यक्ष वुमसुआन नौलक ने बताया कि 25 फरवरी को चूड़ाचांदपुर अस्पताल में वाल्टे का पोस्टमॉर्टम किया गया. उन्होंने कहा कि कुकी-ज़ो समुदाय के नेता आगे क्या करना है, तय करेंगे.

उन्होंने कहा, ‘हमारे पास मांगों की सूची है और जब तक सरकार शर्तें स्वीकार नहीं करती, दफनाने की संभावना कम है.’

इस बीच राज्यपाल भल्ला ने चूड़ाचांदपुर जाकर वाल्टे को श्रद्धांजलि दी और शोक संतप्त परिवार से मुलाकात कर संवेदना व्यक्त की. मणिपुर के सुरक्षा सलाहकार कुलदीप सिंह भी उनके साथ मौजूद थे.

सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने द हिंदू को पुष्टि की कि परिवार ने वाकई अपनी मांगों की सूची भल्ला को दी थी. उन्होंने कहा कि अलग जिला बनाना प्रशासनिक निर्णय है, जिसके लिए निर्वाचित सरकार की सहमति और समय दोनों आवश्यक हैं. अधिकारी ने कहा, ‘यह तीन-चार दिनों में संभव नहीं है.’

उल्लेखनीय है इलाज के दौरान वाल्टे ने 13 सितंबर 2025 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र लिखा था, जिसमें कहा था कि घर लौटते समय मेईतेई मिलिशिया (अरमबाई तेंग्गोल) ने उन पर क्रूर हमला किया. इस हमले में उन्हें गंभीर चोटें आईं, जिससे वे लकवाग्रस्त और शारीरिक तौर पर अक्षम हो गए. इतनी गंभीर घटना के बावजूद कोई विशेष जांच (सीबीआई/एनआईए) शुरू नहीं की गई और समुदाय हाशिये पर बना हुआ है.

ज्ञात हो कि 3 मई 2023 को जातीय हिंसा भड़कने के अगले दिन इंफाल में तत्कालीन मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह के कार्यालय से लौटते समय उन पर भीड़ ने हमला किया था. हमले में उनके कुकी-जो ड्राइवर की हत्या कर दी गई थी, जबकि उनके मेईतेई सुरक्षा अधिकारी को छोड़ दिया गया था. इस मामले में अब तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है. वाल्टे तीन बार विधायक रह चुके थे.