भारत-अमेरिका व्यापार समझौता: भारत ने अमेरिकी सामानों पर टैरिफ में बड़ी कटौती की

भारत और अमेरिका ने एक संयुक्त बयान में कहा है कि दोनों देशों के बीच एक अंतरिम व्यापार समझौते के लिए एक ढांचा तय हो गया है. इसके तहत भारत पर लगने वाले टैरिफ घटाकर 18% किए जाएंगे. वहीं, भारत, अमेरिकी औद्योगिक उत्पादों और अमेरिका के कृषि व खाद्य उत्पादों की एक बड़ी श्रेणी पर टैरिफ घटाएगा या पूरी तरह ख़त्म करेगा.

ट्रंप ने कहा है कि 'अगर भारत रूसी तेल के मसले पर मदद नहीं करता, तो हम उस पर टैरिफ़ बढ़ा सकते हैं.' (फोटो: पीटीआई/एपी/canva)

नई दिल्ली: भारत और अमेरिका ने शनिवार (7 फरवरी) को कहा कि दोनों देशों के बीच एक अंतरिम व्यापार समझौते के लिए एक ढांचा तय हो गया है. संयुक्त बयान के मुताबिक, इसके तहत भारत पर लगने वाले टैरिफ घटाकर 18% किए जाएंगे. 

भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के इस ढांचे के तहत भारत, अमेरिकी औद्योगिक उत्पादों और अमेरिका के कृषि व खाद्य उत्पादों की एक बड़ी श्रेणी पर टैरिफ घटाएगा या पूरी तरह खत्म करेगा. इनमें पशु आहार के लिए इस्तेमाल होने वाला ड्राइड डिस्टिलर्स ग्रेन्स, रेड सोरघम, ड्राई फ्रूट्स, ताजे और प्रोसेस्ड फल, सोयाबीन तेल, वाइन और शराब जैसे उत्पाद शामिल हैं.

बयान में कहा गया कि अगर अंतरिम समझौता सफलतापूर्वक लागू हो जाता है, तब कई वस्तुओं पर टैरिफ शून्य कर दिया जाएगा. इनमें जेनेरिक दवाइयां, रत्न और हीरे, तथा विमान के पुर्जे शामिल हैं. इससे भारत के निर्यात को प्रतिस्पर्धी बढ़त मिलेगी और ‘मेक इन इंडिया’ पहल को भी समर्थन मिलेगा.

दोनों देशों ने कहा कि वे इस ढांचे को जल्द लागू करने की दिशा में कदम उठाएंगे और अंतरिम समझौते को अंतिम रूप देने पर काम करेंगे. इसका मकसद तय रोडमैप के मुताबिक एक व्यापक द्विपक्षीय व्यापार समझौता (बीटीए) पूरा करना है.

इस बीच, 6 फरवरी को जारी एक कार्यकारी आदेश के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत द्वारा रूस से कच्चा तेल आयात किए जाने के मुद्दे पर भारत पर नई सख़्ती दिखाई है.

आदेश में कहा गया है कि भारत ने रूस से सीधे या परोक्ष रूप से तेल आयात रोकने की प्रतिबद्धता जताई है और इसके पालन की निगरानी के लिए वॉशिंगटन एक निगरानी व्यवस्था बनाएगा. अगस्त 2025 में, रूस से सस्ता कच्चा तेल खरीदना जारी रखने पर अमेरिका ने भारत के सभी सामानों पर 25% दंडात्मक टैरिफ लगा दिया था.

इससे पहले केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने कहा था कि एक ‘औपचारिक समझौते’ पर बातचीत चल रही है और इस पर मार्च के मध्य तक हस्ताक्षर होने की उम्मीद है.

वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने कहा कि जब तक इस ढांचे को कानूनी समझौते का रूप नहीं दिया जाता, तब तक भारत टैरिफ कम नहीं कर सकता. अमेरिका की ओर से एक निगरानी समिति बनाए जाने, जो भारत के ऊर्जा स्रोतों से जुड़े फैसलों पर सीधी नज़र रखेगी, को लेकर भारत की संप्रभुता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं.

अग्रवाल ने भारत-खाड़ी सहयोग परिषद (जीसीसी) के साथ मुक्त व्यापार समझौते के टर्म्स ऑफ़ रेफरेंस पर हस्ताक्षर के मौके पर पत्रकारों से कहा कि ‘संयुक्त बयान को पहले एक कानूनी समझौते में बदलना होगा, तभी भारत अपने टैरिफ घटा पाएगा.’ उन्होंने कहा कि भारत ‘मोस्ट फेवर्ड नेशन’ टैरिफ व्यवस्था अपनाता है, जबकि अमेरिका कार्यकारी आदेश के ज़रिये शुल्क लगाता है.

गोयल ने यह भी कहा कि यह अंतरिम समझौता भारत-अमेरिका मुक्त व्यापार समझौते का पहला चरण है और इस पर बातचीत करीब एक साल पहले शुरू हुई थी. ट्रंप के उस दावे पर कि भारत ने अमेरिका से 500 अरब डॉलर का सामान खरीदने का वादा किया है, गोयल ने कहा कि ऐसी ख़रीदारी पांच साल में की जा सकती है.

ऊर्जा, डेटा सेंटर उपकरण और सूचना एवं संचार तकनीक जैसे क्षेत्रों में भारत की ज़रूरतों का ज़िक्र करते हुए गोयल ने कहा, ‘जब हमने आकलन किया कि हमें अमेरिका से क्या-क्या चाहिए, तब यह आंकड़ा कम से कम 500 अरब डॉलर तक पहुंचता है. अगले पांच साल में हम इतनी ख़रीदारी अमेरिका से कर सकते हैं.’

उन्होंने विमानन क्षेत्र का भी ज़िक्र किया और कहा, ‘केवल विमानों की हमारी मांग (बोइंग को दिए गए और दिए जाने वाले ऑर्डर) करीब 70 से 80 अरब डॉलर की है. अगर इसमें इंजन और दूसरे पुर्जे जोड़ दें, तो यह 100 अरब डॉलर से भी ऊपर जा सकती है.’

इससे पहले इसी हफ्ते ट्रंप ने इस समझौते की घोषणा करते हुए कहा था कि इसके तहत भारत ‘अमेरिका के खिलाफ अपने टैरिफ और नॉन-टैरिफ बाधाओं को शून्य तक लाने’ की दिशा में आगे बढ़ेगा.