मणिपुर: उखरुल ज़िले में तनाव, कई घरों में आगजनी; निषेधाज्ञा लागू

मणिपुर के उखरूल ज़िले में कुकी-ज़ो और नगा समुदायों के बीच कथित झड़प के बाद प्रशासन ने बीएनएसएस की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा जारी कर दी है. सोमवार रात को लितान गांव में हथियारबंद उग्रवादियों ने कई घरों में आग लगा दी, जिसके बाद इलाके में तनाव बढ़ गया है.

(प्रतीकात्मक फोटो साभार: X/@manipur_police)

नई दिल्ली: हिंसाग्रस्त मणिपुर के उखरूल जिले में रविवार (8 फरवरी) शाम दो आदिवासी समूहों के बीच कथित तौर पर जोरदार पथराव हुआ, जिसके बाद प्रशासन ने बीएनएसएस की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा जारी कर दी.

इस बीच, अधिकारियों ने सोमवार (9 फरवरी) को बताया कि मणिपुर के उखरुल जिले में कथित तौर पर हथियारबंद उग्रवादियों ने कई घरों में आग लगा दी, जिसके बाद इलाके में तनाव बढ़ गया है.

स्थानीय खबरों के मुताबिक, लितान गांव में तंगखुल नगा समुदाय के कम से कम 20 घरों को आग लगाकर जला दिया गया.

समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार, सोमवार आधी रात के आसपास लितान सरेखोंग में तंगखुल नगा समुदाय के सदस्यों के कई घरों में कथित तौर पर कुकी उग्रवादियों ने आग लगा दी. अधिकारियों ने बताया कि पास के इलाके में कुकी समुदाय के कुछ घरों में भी आग लगाई गई.

एक जिला अधिकारी ने पीटीआई से कहा, ‘नुकसान का आकलन किया जा रहा है और स्थिति अभी भी तनावपूर्ण बनी हुई है.’

इस घटना के वायरल हुए वीडियो फुटेज में हथियारबंद लोग गांव में घरों और गाड़ियों में आग लगाते दिख रहे हैं और मिलिट्री ड्रेस पहने उग्रवादी हवा में अत्याधुनिक हथियारों से फायरिंग कर रहे हैं. हालांकि वीडियो क्लिप की प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं हुई है.

उखरूल के डीएम के कार्यालय ने रविवार शाम 7 बजे से अगले आदेश तक लितान गांव में आवाजाही और गतिविधियों पर रोक लगाते हुए निषेधाज्ञा लागू कर दी.

न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, उखरूल के जिलाधिकारी आशीष दास ने कहा कि जिले के लितान क्षेत्र में शांति और सार्वजनिक सद्भाव भंग होने की आशंका को देखते हुए निषेधाज्ञा लागू की गई है.

इस आदेश के तहत लोगों की अपने निवास से बाहर आवाजाही और ऐसी किसी भी गतिविधि पर रोक लगाई गई है, जिससे शांति भंग हो सकती है. इसके अलावा प्रशासन ने सेना और अर्धसैनिक बलों की तैनाती की भी मांग की है.

शनिवार रात से ही लितान में कुकी-जो और नगा गांवों के बीच तनाव बना हुआ था, जब कथित तौर पर तंगखुल समुदाय के एक सदस्य पर कुकी-जो आदिवासियों के एक समूह ने हमला किया. क्षेत्र के कई नगा गांवों के निवासी अब दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं.

अख़बार से बात करते हुए उखरूल (जो नगा-बहुल जिला है) के स्थानीय लोगों ने बताया कि स्थिति अब भी तनावपूर्ण बनी हुई है.

द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक, इससे पहले कुकी स्टूडेंट्स ऑर्गनाइजेशन (केएसओ) ने एक बयान जारी कर कहा कि ‘यह घटना दोनों गांवों के कुछ नशे में धुत व्यक्तियों के बीच मामूली कहासुनी से शुरू हुई थी.’

इसने यह भी कहा कि इस मामले को लितन सरेखोंग गांव के स्थापित प्राधिकरण के माध्यम से ‘घायल व्यक्ति के परिवार से सलाह मशविरा करके’ शांतिपूर्ण और पारंपरिक तरीके से सुलझाया जा रहा है.

तंगखुल छात्रों के संगठन कथो कटमनाओ लोंग (केकेएल) ने केएसओ से वह बयान वापस लेने को कहा और दावा किया कि ‘स्थिति को सुधारने के लिए ऐसा कोई कदम नहीं उठाया गया है.’

केकेएल ने कहा कि स्टर्लिंग नाम के एक तंगखुल युवक ने अंधेरे में कुछ आवाज़ें सुनकर जब अपनी टॉर्च जलाई, तो उसके बाद उनकी पिटाई कर दी गई.

संगठन के मुताबिक, जो लोग उसे पीट रहे थे वे कुकी-जो समुदाय के थे और उन्होंने इस बहाने कि रोशनी उनके चेहरों पर पड़ गई. उन्हें बुरी तरह से पीटा.