नई दिल्ली: देहरादून में रविवार (8 फरवरी) को हुई एक महापंचायत ने अंकिता भंडारी हत्याकांड के कथित गलत तरीके से निपटारे को लेकर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को पद से हटाने की मांग करते हुए एक प्रस्ताव पारित किया.
मालूम हो कि 19 वर्षीय अंकिता भंडारी पौड़ी गढ़वाल के एक रिजॉर्ट में काम करती थीं और 18 सितंबर 2022 में उनकी इसलिए हत्या कर दी गई थी, क्योंकि कथित तौर पर उन्होंने किसी वीआईपी मेहमान को ‘विशेष सेवाएं’ (सेक्स वर्क के लिए इस्तेमाल होने वाला शब्द) देने से इनकार कर दिया था.
रिजॉर्ट के मालिक और भाजपा के निष्कासित नेता विनोद आर्य के बेटे पुलकित आर्य और उनके स्टाफ सदस्यों- सौरभ भास्कर और अंकित गुप्ता को अंकिता की हत्या के आरोप में गिरफ्तार किया गया था.
जनवरी में धामी ने इस मामले में एक वीआईपी की संलिप्तता के आरोपों के चलते सीबीआई जांच के आदेश दिए थे – कहा जा रहा है कि वह वीआईपी भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री दुष्यंत कुमार गौतम हैं.
महापंचायत
अंकिता न्याय यात्रा संयुक्त संघर्ष मंच द्वारा बुलाई गई इस महापंचायत में 40 संगठनों से जुड़े 500 से अधिक लोगों ने हिस्सा लिया. इंडिया गठबंधन की राजनीतिक पार्टियों ने भी इस सभा को अपना समर्थन दिया.
महापंचायत में पास किए गए प्रस्तावों में धामी को हटाने और पिछले महीने आदेश दी गई सीबीआई जांच में उन्हें शामिल करने की मांग प्रमुख रही.
महापंचायत के जरिए राष्ट्रपति के नाम एक ज्ञापन भी भेजा गया. महापंचायत ने पद्म भूषण से सम्मानित अनिल जोशी द्वारा दायर उस अलग एफआईआर को रद्द करने की भी मांग की, जिसमें मामले में कथित तौर पर शामिल वीआईपी के खिलाफ जांच की मांग की गई थी.
पर्यावरणविद् अनिल जोशी, जो ‘हिमालयन एनवायरनमेंटल स्टडीज़ एंड कंजरवेशन ऑर्गनाइजेशन’ चलाते हैं, ने इस साल 9 जनवरी को इस संबंध में एफआईआर दर्ज कराई थी – उसी दिन जब सीबीआई जांच की सिफारिश की गई थी. इसे मामले में कथित तौर पर शामिल वीआईपी को बचाने की कोशिश के तौर पर देखा गया.
वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने जोशी की एफआईआर के पीछे के मकसद पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार-प्रायोजित किसी व्यक्ति के आधार पर होने वाली जांच निष्पक्ष नहीं हो सकती.
रविवार को पारित प्रस्तावों में यह भी मांग की गई कि सीबीआई जांच जोशी की एफआईआर के आधार पर नहीं की जानी चाहिए.
अंकिता के पिता वीरेंद्र भंडारी ने कहा, ‘मैंने मुख्यमंत्री को एक ज्ञापन देकर सेवानिवृत्त सुप्रीम कोर्ट जज की निगरानी में जांच कराने की मांग की थी. लेकिन डॉ. अनिल जोशी की शिकायत पर एफआईआर दर्ज कर दी गई, जिनसे मेरा कोई संबंध नहीं है.’
भंडारी ने मामले में कॉल रिकॉर्ड की भी जांच कराने की मांग की. उन्होंने कहा, ‘अगर मेरी बेटी नहीं झुकी, तो मैं कैसे झुक सकता हूं?’
कांग्रेस नेता सूर्यकांत धस्माना ने नई एफआईआर पर सवाल उठाते हुए कहा था, ‘इस नई एफआईआर की कोई जरूरत नहीं थी, क्योंकि अंकिता भंडारी मामला उस मूल एफआईआर के तहत चलता है, जो शुरू में लक्ष्मणझूला थाने में दर्ज की गई थी. उसी एफआईआर की जांच हुई, फिर चार्जशीट दाखिल हुई और कोटद्वार की सेशंस कोर्ट में मुकदमा चला, जिसके बाद तीनों आरोपियों को दोषी ठहराया गया.’
ज्ञात हो कि मई 2025 में कोटद्वार की एक जिला अदालत ने रिसॉर्ट के मालिक पुलकित आर्य और उनके दो सहायकों सौरभ भास्कर और अंकित गुप्ता को दोषी ठहराया था.
