नई दिल्ली: बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) देश के ऐतिहासिक 2026 आम चुनाव में निर्णायक जीत की ओर बढ़ती दिख रही है. शुरुआती नतीजों में अब तक गिने गए सीटों में स्पष्ट बहुमत पर बीएनपी के जीतने या आगे रहने के संकेत मिले हैं.
इसी बीच भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बीएनपी के अध्यक्ष तारिक रहमान को बधाई देने वाले पहले वैश्विक नेता बने.
प्रधानमंत्री मोदी ने एक्स पर लिखा, ‘मैं बांग्लादेश के संसदीय चुनावों में बीएनपी को निर्णायक जीत दिलाने के लिए श्री तारिक रहमान को हार्दिक बधाई देता हूं. यह जीत आपके नेतृत्व में बांग्लादेश की जनता के विश्वास को दर्शाती है.’
उन्होंने आगे कहा, ‘भारत एक लोकतांत्रिक, प्रगतिशील और समावेशी बांग्लादेश के समर्थन में खड़ा रहेगा. मैं हमारे बहुआयामी संबंधों को और मजबूत करने तथा साझा विकास लक्ष्यों को आगे बढ़ाने के लिए आपके साथ काम करने को उत्सुक हूं.’
बीएनपी अध्यक्ष तारिक रहमान की मां और पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के निधन पर शोक संवेदना व्यक्त करने के लिए पिछले साल भारत सरकार ने विदेश मंत्री एस. जयशंकर को बीएनपी अध्यक्ष से मुलाकात के लिए भेजा था. इस मुलाक़ात को इस संकेत के रूप में देखा गया था कि अंतरिम सरकार के दौर में द्विपक्षीय संबंधों में तनाव के बाद नई दिल्ली, चुनावों के प्रबल दावेदार माने जा रहे बीएनपी प्रमुख से संपर्क बढ़ा रही है.
आधिकारिक नतीजे घोषित होने से पहले ही प्रधानमंत्री मोदी का बयान शुक्रवार तड़के आया, यहां तक कि सभी सीटों के लिए अनौपचारिक नतीजे भी सामने नहीं आए थे.
प्रथम आलो की रिपोर्ट के मुताबिक, 300 सदस्यीय संसद में बीएनपी और उसके सहयोगियों को 166 सीटें मिली हैं, जो की बहुमत से अधिक है.
सोमय टीवी द्वारा जारी निर्वाचन क्षेत्रवार आंकड़ों के अनुसार, गुरुवार (12 फरवरी) को मतदान हुई 299 में से 287 सीटों पर नतीजे घोषित हो चुके हैं या लगभग तय हो चुके हैं. इनमें बीएनपी उम्मीदवारों ने 210 सीटें जीती हैं, 11-दलीय गठबंधन को 72 सीटें मिली हैं, जबकि निर्दलीय और छोटे दलों को कुल मिलाकर सिर्फ सात सीटें मिली हैं.
बांग्लादेश के प्रमुख न्यूज चैनल जमुना टीवी ने दावा किया है कि आधी रात तक बीएनपी को 212, जमात को 74 और अन्य को छह सीटें मिली हैं.
आधिकारिक नतीजे आ जाने के बाद भी अगर ये नतीजे कायम रहते हैं, तब यह बीएनपी का अब तक का सबसे अच्छा प्रदर्शन होगा, जो 2001 में खालिदा जिया के नेतृत्व में जीती गई 193 सीटों के रिकॉर्ड को पार कर जाएगा.
यह जमात-ए-इस्लामी के लिए भी अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन होगा, जिसकी सर्वोच्च उपलब्धि 1991 के चुनावों में 18 सीटें थीं.
समर्थकों में जीत का उत्साह
ढाका में बीएनपी कार्यालय के बाहर समर्थकों में जबरदस्त उत्साह देखा गया. गुरुवार देर रात एक समर्थक ने दावा किया कि पार्टी कम से कम 218 सीटें जीत चुकी है. बड़ी संख्या में मीडिया कर्मी भी कार्यालय के बाहर मौजूद रहे और जीत दर्ज करने वाले उम्मीदवारों से बातचीत करते दिखे, जो नई सरकार के स्वरूप पर पार्टी नेतृत्व से चर्चा करने के लिए पहुंचे थे.
बीएनपी के वरिष्ठ नेता रूहुल कबीर रिज़वी ने पार्टी की ओर से बयान जारी करते हुए कहा, ‘बीएनपी की प्रचंड जीत के बावजूद कोई विजय रैली नहीं निकाली जाएगी.’ उन्होंने कहा कि देशभर में जुमे की नमाज़ के बाद विशेष दुआएं की जाएंगी और खालिदा जिया की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की जाएगी.
टेलीविजन चैनलों पर दिखाए जा रहे आंकड़े रिटर्निंग अधिकारियों की घोषणाओं और लगभग पूर्ण मतगणना पर आधारित हैं और चुनाव आयोग द्वारा आधिकारिक नतीजे जारी किए जाने तक इन्हें अस्थायी माना जा रहा है.
वहीं, ख़बरों के अनुसार, जनमत संग्रह में ‘हां’ के पक्ष में 65.3 प्रतिशत वोट पड़े हैं, जबकि करीब एक-तिहाई मतदाताओं ने ‘न’ के समर्थन में मतदान किया.
गौरतलब है कि गुरुवार को बांग्लादेश के मतदाताओं ने न सिर्फ सांसदों के चुनाव में, बल्कि ‘जुलाई चार्टर’ में प्रस्तावित संवैधानिक सुधारों पर ‘हां’ या ‘न’ के जनमत संग्रह में भी मतदान किया. इस पर आधिकारिक नतीजे अभी घोषित नहीं हुए हैं, लेकिन अनौपचारिक आंकड़े ‘हां’ के पक्ष में बहुमत की ओर इशारा करते हैं.
मुख्य चुनाव आयुक्त एएमएम नासिर उद्दीन ने कहा कि गुरुवार को हुआ जनमत संग्रह और 13वां संसदीय चुनाव देश के चुनावी इतिहास में किसी भी मानक पर बेहद अच्छा माना जा सकता है. उन्होंने गुरुवार रात 10 बजे निर्वाचन भवन में आयोजित प्रेस ब्रीफिंग में कहा, ‘यदि आप इसे देश के चुनावी इतिहास के किसी भी मानक पर परखें, तो यह एक बहुत अच्छा चुनाव कहा जा सकता है.’
बीएनपी के चुनाव संचालन समिति के प्रवक्ता महदी अमीन ने बताया कि पार्टी अध्यक्ष तारिक रहमान को ढाका-17 और बोगुरा-6, दोनों निर्वाचन क्षेत्रों से अनौपचारिक रूप से निर्वाचित घोषित किया गया है.
इससे पहले, जिला रिटर्निंग अधिकारी कार्यालय द्वारा घोषित और डेली स्टार में प्रकाशित नतीजों के अनुसार, बोगुरा-6 से रहमान को 2,16,284 वोट मिले, जबकि उनके निकटतम प्रतिद्वंद्वी जमात-ए-इस्लामी के अबीदुर रहमान सोहेल को 97,626 वोट प्राप्त हुए.
वहीं, यूएनबी न्यूज के अनुसार, बीएनपी के महासचिव मिर्ज़ा फखरुल इस्लाम आलमगीर ने ठाकुरगांव-1 सीट से जीत दर्ज की.
गुरुवार शाम जमात अमीर ने कहा था कि शुरुआती नतीजों में जमात के नेतृत्व में 11-दलीय गठबंधन के उम्मीदवार कई सीटों पर आगे हैं और अंतिम निष्कर्ष निकालने के लिए धैर्य रखने की अपील की थी. उन्होंने कहा था कि बड़े पैमाने पर अनियमितताओं की खबर नहीं है और मतदान बिना किसी गंभीर परेशानी के संपन्न हुआ है.
अनियमितताओं के आरोप
हालांकि, जैसे-जैसे बीएनपी बहुमत की ओर बढ़ी, इस्लामी दल ने परिणामों में असामान्य देरी और छेड़छाड़ के आरोप लगाए और चेतावनी दी कि यदि जनादेश छीना गया तो वे बड़ा आंदोलन करेंगे.
अपनी आधिकारिक फेसबुक पेज पर जमात ने करीब आधी रात के आसपास दावा किया कि उसने बीएनपी से ज्यादा सीटें जीती हैं.
शुक्रवार तड़के करीब 4 बजे चुनाव आयोग भवन में पत्रकारों से बात करते हुए जमात के सहायक महासचिव अहसानुल महबूब जुबैर ने आरोप लगाया कि रिटर्निंग अधिकारी जानबूझकर किसी खास पार्टी को फायदा पहुंचाने के लिए नतीजों में देरी कर रहे हैं. उन्होंने ढाका-17 सीट का विशेष रूप से जिक्र करते हुए दावा किया कि हस्ताक्षरित परिणाम पत्रों में बदलाव कर उनके उम्मीदवार के करीब 5,000 वोट घटा दिए गए.
जुबैर ने चेतावनी दी कि 2024 के जनआंदोलन में शहीद हुए 1,400 लोगों के बलिदान का अपमान नहीं होना चाहिए. उन्होंने कहा, ‘इस देश के लोगों ने फासीवाद के खिलाफ खून बहाया है. यदि नए बांग्लादेश में भी जनमत की अनदेखी की गई, तो जनता इसे स्वीकार नहीं करेगी.’
जमात के सहयोगी, युवाओं के नेतृत्व वाले नेशनलिस्ट सिटिजन पार्टी (एनसीपी) ने भी शुक्रवार तड़के प्रेस कॉन्फ्रेंस में आरोप लगाया कि मीडिया से मिलीभगत कर चुनाव परिणामों में धांधली की साजिश रची जा रही है.
निर्वाचन आयोग ने नहीं बताया मत प्रतिशत
इस बीच, गुरुवार को मतदान समाप्त होने के बावजूद चुनाव आयोग ने अब तक कुल मतदान प्रतिशत घोषित नहीं किया है, जिससे सवाल खड़े हो रहे हैं. आधिकारिक आंकड़ा दोपहर 2 बजे तक का है, जिसमे मतदान प्रतिशत 47.91 बताया जा रहा है. मतदान सुबह 7:30 बजे शुरू हुआ था और शाम 4:30 बजे शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ.
आयोग का दावा है कि अब तक चुनावी हिंसा से किसी की मौत नहीं हुई है.
पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की संसदीय सीट रही गोपालगंज-3 में अपेक्षाकृत कम, करीब 41 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया. हसीना के गृहनगर तुंगिपारा में बीएनपी उम्मीदवार एसएम जिलानी ने 17,195 वोट पाकर जीत हासिल की, जबकि हिंदू महाजोटे के गोविंद चंद्र प्रमाणिक को 6,393 वोट मिले.
इस सीट पर करीब 40 प्रतिशत हिंदू आबादी है, जिससे तुंगिपारा का यह नतीजा राजनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है.
यह चुनाव जुलाई 2024 में छात्र आंदोलन से शुरू हुए 18 महीने लंबे राजनीतिक उथल-पुथल के दौर का समापन करता है, जिसने अंततः शेख हसीना को सत्ता छोड़ने और भारत में निर्वासन जाने के लिए मजबूर कर दिया था. इसके बाद राष्ट्रपति मोहम्मद शाहबुद्दीन ने संसद भंग कर नोबेल पुरस्कार विजेता मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व में अंतरिम सरकार बनाई थी, जिसने चुनावी सुधार और नए चुनाव की तैयारी की.
अंतरिम सरकार ने मानवाधिकार उल्लंघनों और विवादित चुनावों में भूमिका का हवाला देते हुए अवामी लीग को इस चुनाव में हिस्सा लेने से रोक दिया था. वहीं, उसी दौरान एक कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रिया की निगरानी की गई, जिसके तहत 2025 में बांग्लादेश जमात-ए-इस्लामी का लंबे समय से रद्द पंजीकरण बहाल किया गया और इस्लामी दल तथा उसके सहयोगियों के लिए फिर से चुनावी मैदान में उतरने का रास्ता साफ किया गया.
इसी दौरान, 17 वर्षों के निर्वासन के बाद दिसंबर 2025 में तारिक रहमान की ढाका वापसी ने बीएनपी को नई ताकत दी. अब उनकी बांग्लादेश के अगले प्रधानमंत्री बनने की संभावना जताई जा रही है.
