नई दिल्ली: एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय द वायर के इंस्टाग्राम पेज से प्रधानमंत्री नरेंद्र पर प्रकाशित एक कार्टून हटाने के आदेश की कड़ी निंदा की है. गिल्ड ने इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला बताया है.
कार्टून हटाने के साथ-साथ ‘द वायर’ का इंस्टाग्राम पेज लगभग दो घंटे के लिए ब्लॉक भी कर दिया गया था, जिसे बाद में मेटा ने बहाल किया. उल्लेखनीय है कि कार्टून हटाए जाने और पेज ब्लॉक किए जाने के करीब 22 घंटे बाद ‘द वायर’ से अपने ‘आचरण की व्याख्या’ करने को कहा गया.
वक्तव्य में कहा गया है कि ‘द वायर’ को औपचारिक रूप से यह नहीं बताया गया कि कार्टून क्यों हटाया गया. मौखिक रूप से जो कारण बताया गया, वह यह था कि कार्टून देश की सुरक्षा और प्रतिष्ठा को प्रभावित कर सकता है. गिल्ड ने इस तर्क को ‘हास्यास्पद’ करार देते हुए कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता संविधान में निहित एक मौलिक अधिकार है और उच्च पदों पर आसीन सार्वजनिक अधिकारी भी संपादकीय समीक्षा और टिप्पणी के वैध विषय होते हैं, जिनमें कार्टून भी शामिल हैं.
गिल्ड ने इस घटना को सरकार और उसके प्रतिनिधियों में आलोचना के प्रति बढ़ती असहिष्णुता का उदाहरण बताया और कहा कि यह भारत की एक समावेशी लोकतंत्र के रूप में छवि को धूमिल करता है, जहां मीडिया, व्यंग्य और हास्य को स्थान प्राप्त है.
वक्तव्य में हाल ही में जारी सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यस्थ दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) संशोधन नियम, 2026 का भी उल्लेख किया गया. इंटरनेट फ्रीडम फाउंडेशन के हवाले से कहा गया कि नए प्रावधान अत्यधिक व्यापक हैं और इससे व्यंग्य, पैरोडी, राजनीतिक टिप्पणी तथा कलात्मक अभिव्यक्ति पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है.
एडिटर्स गिल्ड ने सरकार से मांग की है कि एआई और डिजिटल कंटेंट के नियमन के नाम पर लाए जा रहे नए नियमों की गंभीर समीक्षा की जाए, ताकि वे मीडिया की स्वतंत्रता को कमजोर करने या अभिव्यक्ति की आज़ादी को सीमित करने का माध्यम न बनें.
प्रेस क्लब और डिजीपब पर जता चुके हैं आपत्ति
इस मामले में डिजीपब न्यूज़ इंडिया फ़ाउंडेशन और प्रेस क्लब ऑफ इंडिया भी आपत्ति दर्ज करवा चुके हैं. डिजीपब ने अपने बयान में कहा कि संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) के तहत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता भारतीय लोकतंत्र की बुनियाद है. ‘व्यंग्य और आलोचनात्मक प्रश्न लोकतांत्रिक व्यवस्था को बाधित नहीं करते, बल्कि उसे जीवंत बनाए रखते हैं.’ संगठन ने कहा.
डिजीपब ने पूछा है कि सरकार ने अब तक यह स्पष्ट नहीं किया है कि कार्टून किस कानून का उल्लंघन करता है.
वहीं, प्रेस क्लब ऑफ इंडिया ने भी ‘द वायर’ के इंस्टाग्राम पेज को अस्थायी रूप से ब्लॉक करने और 52 सेकंड की व्यंग्यात्मक क्लिप हटाने की निंदा की. क्लब ने कहा कि वेबसाइट को सरकार या सोशल मीडिया कंपनियों की ओर से कोई पूर्व सूचना नहीं दी गई थी. बयान में कहा गया, ‘बिना कारण बताए किसी मीडिया संगठन की सामग्री को सेंसर करना और उसे सार्वजनिक दृश्य से हटाना चिंताजनक रूप से आम होता जा रहा है.’
क्लब ने याद दिलाया कि व्यंग्य और कार्टून भारतीय पत्रकारिता की पुरानी परंपरा का हिस्सा रहे हैं और ऐसे कंटेंट को दबाना संविधान द्वारा प्रदत्त अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को कमजोर करता है. उसने यह भी सवाल उठाया कि वीडियो को किस आधार पर सेंसर किया गया और इंस्टाग्राम पेज को क्यों ब्लॉक किया गया.
गौरतलब है कि 9 फरवरी को ‘द वायर’ का इंस्टाग्राम पेज, जिसके 13 लाख से अधिक फॉलोअर हैं, भारत में लगभग दो घंटे तक उपलब्ध नहीं था. यूजर्स को एक संदेश दिखाई दे रहा था, जिसमें लिखा था कि ‘कानूनी अनुरोध का पालन करने के कारण यह सामग्री भारत में उपलब्ध नहीं है.’
इन घटनाओं के बाद मीडिया संगठनों ने सरकार और डिजिटल प्लेटफॉर्म कंपनियों से पारदर्शिता बरतने और लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप कार्रवाई करने की अपील की है.
