नई दिल्ली: ‘पहले हमारे साथ कैंपस में मारपीट हुई. एक नहीं दो-दो बार और अब हमें ही यूनिवर्सिटी प्रशासन अनुशासनहीनता के लिए कारण बताओ नोटिस जारी कर रहा है. हम से पूछा जा है कि हमारे खिलाफ छात्रावास से निष्कासन और अन्य अनुशासनात्मक कार्रवाई क्यों न की जाए. हम पीड़ित हैं और हमारे ही खिलाफ कार्रवाई की बात की जा रही है.’
ये बातें मध्य प्रदेश के सागर स्थित डॉ. हरि सिंह गौर केंद्रीय विश्वविद्यालय के स्नातक छात्र बिट्टू कुमार ने मंगलवार (24 फरवरी) को द वायर से फोन पर बातचीत में कहीं. उन्होंने बताया कि बीते पांच दिनों के भीतर कैंपस में उन पर और उनके अन्य साथियों पर दो बार हिंसक हमले हो चुके हैं, जिसकी शिकायत उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन, स्थानीय थाने और जिलाधिकारी से भी की है, लेकिन फिलहाल उनकी सुरक्षा का उन्हें कहीं से कोई आश्वासन नहीं मिला है.

बिट्टू ऑल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन (एआईएसएफ) से जुड़े हुए हैं और उन्होंने इन दोनों हिंसक घटनाओं के लिए अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् (एबीवीपी) के छात्रों और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के स्थानीय कार्यकर्ताओं पर आरोप लगाया है. हालांकि, एबीवीपी के कार्यकर्ताओं ने इन आरोपों से इनकार किया है.
बताया गया है कि इस टकराव की वजह एक ‘स्टडी सर्किल’ है.
बिट्टू के अनुसार, यह घटनाएं केवल छात्र राजनीतिक टकराव नहीं, बल्कि विश्वविद्यालयों में वैचारिक असहिष्णुता और संगठित हिंसा की खतरनाक प्रवृत्ति का संकेत हैं. इसके अलावा ऐसी घटनाएं केंद्रीय विश्वविद्यालय परिसर में छात्रों की सुरक्षा, शैक्षणिक और लोकतांत्रिक माहौल पर भी गंभीर सवाल खड़े कर करती हैं. क्योंकि जिस स्टडी सर्कल का विरोध आरएसएस-एबीवीपी के लोग कर रहे थे, उसमें दरअसल वैज्ञानिक सोच, तार्किकता, समान शिक्षा, लैंगिक समानता और सामाजिक-राजनीतिक मुद्दों पर चर्चा की जाती है. सवाल उठता है कि क्या एक केंद्रीय विश्वविद्यालय में अध्ययन और विमर्श की स्वतंत्रता भी अब हिंसा के साये में संचालित होगी?
पूरा मामला क्या है?
केरल के एर्नाकुलम के रहने वाले छात्र और एआईएसएफ के सदस्य हरि अय्यप्पन बताते हैं कि इस हिंसा की शुरुआत 20 फरवरी को तब हुई, जब वे और एआईएसएफ से जुड़े उनके अन्य साथी कैंपस के गौर स्तंभ के पास एक ‘यूनिट सम्मेलन’ और स्टडी सर्किल के आयोजन को लेकर साफ-सफाई और पोस्टर बनाने का काम कर रहे थे. उनका कहना है कि इस कार्यक्रम की पूर्व सूचना विश्वविद्यालय प्रशासन और स्थानीय पुलिस को दी गई थी.
हरि आगे दावा करते हैं कि अभी उन्होंने ‘समान शिक्षा के अधिकार’ से जुड़ा एक पोस्टर ही बनाया था कि इतने में लगभग 100 से 150 लोगों की भीड़ अचानक वहां पहुंची और वहां मौजूद छात्रों के साथ मारपीट शुरू कर दी. इस दौरान उन्होंने छात्रों के फोन छीन लिए, वीडियो डिलीट करने को कहा, छात्रों को अपमानित किया और अभद्र शब्द भी कहे, जिसके बाद पुलिस इन लोगों को सुरक्षा के लिहाज से थाने लेकर आई, लेकिन थाने में भी एबीवीपी और आरएसएस के कुछ लोग पहले से मौजूद थे, जिन्होंने पुलिस के सामने एआईएसएफ के छात्रों को धमकी दी और अभद्र भाषा का प्रयोग किया.
बताया गया है कि इस घटना के करीब दो दिन बाद 23 तारीख को फिर इन छात्रों पर हमला हुआ, जिसके संबंध में बिट्टू बताते हैं, ‘पीड़ित छात्र अपनी सुरक्षा की मांग को लेकर प्रॉक्टर कार्यालय पहुंचे थे. इसी दौरान प्रॉक्टर ऑफिस के सामने ही हम लोगों पर दोबारा हमला हुआ. इस बार पहले के मुकाबले एबीवीपी और आरएसएस के कार्यकर्ताओं ने ज्यादा बल प्रयोग किया. वे अपनी शाखा वाली लाठी के साथ आए थे, जिससे उन्होंने कई छात्रों के चेहरे और आंखों पर प्रहार किया और पीठ पर भी लाठियों से वार किए गए. इस हमले में कई छात्रों को गंभीर चोट आईं, जिसके बाद पुलिस ने एफआईआर दर्ज किया है.’
बिट्टू के यह भी बताते हैं कि जब वे प्रॉक्टर से मिले, तो उन्हें कहा गया कि इसमें विश्वविद्यालय प्रशासन कुछ नहींं कर सकता.

बिट्टू के अनुसार, यह हमला स्पष्ट रूप से डर का माहौल बनाने और वैचारिक गतिविधियों को दबाने की कोशिश थी. महज़ तीन दिन के भीतर दो बार हुई हिंसा ने छात्रों के बीच डर और असुरक्षा की भावना को गहरा कर दिया है. क्योंकि यह छात्र अपने परिवारों से दूर छात्रावास में रहते हैं, ऐसे में इन्हें अपने परिवार की भी चिंता है कि जब उन्हें पता लगेगा तो उन पर क्या गुजरेगी.
बिट्टू कहते हैं, ‘ज्यादातर छात्रों ने अभी तक इस संबंध में अपने परिवार को सूचित नहीं किया है, सिर्फ मेरे परिवार को थोड़ा-बहुत पता है. वे जाहिर है, चिंतित हैं लेकिन मैंने कह दिया है कि यहां सब ठीक है और मुझसे उनकी बात भी हो जाती है, इसलिए अभी उन्हें तसल्ली है. लेकिन आगे क्या होगा पता नहीं.’
वहीं, एआईएसएफ के नेशनल काउंसिल मेंबर विशाल, जो महाराष्ट्र के महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा के छात्र हैं, इस घटना के समय हरि सिंह गौर विश्वविद्यालय में मौजूद थे, बताते हैं, ‘मैं यूनिट मीटिंग के लिए आया था, जब ये हमला हुआ. कैंपस में मौजूद सुरक्षाकर्मियों के सामने ये हमला हुआ लेकिन किसी ने हस्तक्षेप नहीं किया, जिससे हमलावरों के हौसले बुलंद हुए और उनमें दोबारा हमला करने की हिम्मत आई.
छात्रों के मन में डर का माहौल
विशाल के अनुसार, पहली बार जब हमला किया गया, तब पुलिस ने पीड़ित छात्रों की एफआईआर तक नहीं लिखी. दूसरी घटना के बाद भी काफी मशक्कत के बाद पुलिस ने मामला दर्ज किया है. उन्होंने आरोप लगाया कि स्थानीय पुलिस प्रशासन और विश्वविद्यालय प्रशासन दोनों ही इन एबीवीपी और आरएसएस के दबाव में हैं और उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं कर रहे हैं. वे पूर्व सूचना दिए जाने के बावजूद सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं किए जाने को लेकर विश्वविद्यालय और पुलिस प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठाते हैं.
वे बताते हैं कि हमले में घायल छात्रों के मन में अब भी डर का माहौल है, इसलिए उनकी पहली मांग है कि सभी पीड़ित छात्रों को तत्काल सुरक्षा प्रदान की जाए, ताकि वे बिना डर के अपनी पढ़ाई और शैक्षणिक गतिविधियां जारी रख सकें. इसके साथ ही हमले के दोषियों पर पुलिस से जल्द कार्रवाई की भी मांग करते हैं, जिससे ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो सके.
विशाल आगे कहते हैं, ‘यदि छात्रों को विचार-विमर्श के लिए भी मारा जाएगा, तो यह उच्च शिक्षा संस्थानों के लोकतांत्रिक स्वरूप पर सीधा हमला है.क्योंकि विश्वविद्यालय विचार और विमर्श का खुला मंच होता है, यदि वहां छात्र संगठनों के वैचारिक मतभेद हिंसा का रूप ले ले, तो यह शिक्षा व्यवस्था के लिए गंभीर संकेत है.’
पीड़ित छात्रों का यह भी कहना है कि हमले के दौरान उनसे भारत के संविधान की एक पुस्तिका छीन ली गई और दुष्प्रचार किया गया कि ये लोग अपना संविधान बनाने की कोशिश कर रहे हैं. इसके अलावा एबीवीपी-आरएसएस कार्यकर्ता जो बाहर से आए थे, उन्होंने गलत पोस्टर्स और बैनर्स के माध्यम से सोशल मीडिया पर एआईएसएफ को बदनाम करने की कोशिश की और कहा कि यह लोग देश विरोधी, स्त्री विरोधी, समाज विरोधी और ब्राह्मणवाद के खिलाफ गतिविधियों को कैंपस में फैलाने और छात्रों को उकसाने की कोशिश कर रहे हैं.

वहीं, एबीवीपी से जुड़े विश्वविद्यालय के लॉ फाइनल ईयर के छात्र गौरव मिश्रा ने द वायर को बताया कि 23 तारीख वाली हिंसा या मारपीट से संगठन या आरएसएस का कोई संबंध नहीं है. वे खुद इस घटना के दौरान कैंपस के बाहर थे और ये सभी आरोप निराधार हैं.
जेएनयू जैसी मानसिकता यहां थोपने पर आपत्ति है: गौरव मिश्रा
गौरव 20 फरवरी को हुई घटना के संबंध में बताते हैं, ‘यह विवाद उस समय शुरू हुआ जब एआईएसएफ के कुछ छात्र छत्रपति शिवाजी महाराज के पोस्टर की जगह अपने कुछ विवादित पोस्टर, जिनमें ‘ब्राह्मणवाद मुर्दाबाद’, ‘मनुवाद मुर्दाबाद’ और ‘लाल सलाम’ जैसी बातें लिखी गई थीं, गौर स्तंभ पर लगा रहे थे. उस दौरान एबीवीपी के कुछ छात्रों ने जाकर पूछा कि ऐसा क्यों किया जा रहा है, जिस पर उनकी ओर से हमारे साथ बदसलूकी की गई. इस पर हमारे संगठन के 12-15 लोग एकत्र हुए और उनसे हमारी बहस हुई. पुलिस भी हमने ही बुलाई, जिसके बाद दोनों पक्षों की ओर से थाने में आवेदन दिए गए और उसी दिन समझौता हो गया.
स्टडी सर्कल के आयोजन को लेकर गौरव मिश्रा बताते हैं कि उन्हें इससे कोई आपत्ति नहीं है, उनका संगठन भी इसका आयोजन करता है, और जो भी कार्य छात्रों की भलाई के लिए है, उस पर किसी को कोई आपत्ति क्यों होगी. लेकिन उनका आरोप है कि एआईएसएफ के छात्र कुछ बाहरी लोगों के साथ मिलकर छात्रों के बीच गलत बातें फैलाने का काम करते हैं, जिस पर उन्हें आपत्ति है.
वह आगे कहते हैं, ‘ये लोग जेएनयू जैसी हॉस्टल की व्यवस्था यहां चाहते हैं, जिसमें लड़के-लड़कियों को एक-दूसरे के हॉस्टल में आने-जाने की आज़ादी हो, ये गलत है. ये वहां की सेक्स एजुकेशन और तमाम मुद्दों की मानसिकता को यहां लाना चाहते हैं, जिस पर हमें आपत्ति है. ये कार्ल मार्क्स के विचारों को थोपना चाहते हैं. हमें जानकारी मिली थी कि इन लोगों ने नक्सली हिड़मा के लिए शोक सभा आयोजित की, उसे क्रांतिकारी बताया था. ये देशविरोधी गतिविधियां करना चाहते हैं, जिस पर हम सबको आपत्ति है.’
गौरव के अनुसार, संविधान की पुस्तिका नहीं, कार्ल मार्क्स की किताब इनसे ली गई थी. ये लोग पैसे लेकर इसका प्रचार-प्रसार छात्रों और शिक्षकों के बीच कर रहे हैं.
इस विवाद के संबंध में सिविल लाइन थाना प्रभारी आनंद कुमार ने द वायर को बताया कि इस पूरे मामले में छात्रों की शिकायत पर पुलिस ने दो नामजद आरोपियों सहित अन्य आठ-दस अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ मारपीट और बलवा की संबंधित धाराओं में एफआईआर दर्ज की है. अभी पूरे घटनाक्रम की विवेचना जारी है. फिलहाल कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है.
थाना प्रभारी ने आगे कहा कि पुलिस को इस मामले में कुछ घटनास्थल के वीडियो फुटेज मिले हैं, जिसमें एक कॉलेज परिसर में लगा सीसीटीवी कैमरा है, जो थोड़ा दूरी पर स्थित है, इसके अलावा कुछ छात्रों द्वारा उपलब्ध करवाई गई वीडियो हैं, जिनकी जांच की जा रही है. इस मामले में जांच के आधार पर ही आगे नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी.
‘प्रशासन शांति व्यवस्था, सौहार्दपूर्ण अकादमिक वातावरण बनाए रखने के लिए हर आवश्यक कदम उठा रहा है’
इस पूरे विवाद पर द वायर ने विश्वविद्यालय प्रशासन से ईमेल के माध्यम से कई सवाल पूछे थे, जिसके जवाब में जनसंपर्क अधिकारी डॉ. विवेक जायसवाल ने बताया कि विश्वविद्यालय प्रशासन परिसर में शांति व्यवस्था, सौहार्दपूर्ण अकादमिक वातावरण बनाए रखने के लिए हर आवश्यक कदम उठा रहा है. इसके अलावा परिसर में अनुशासन व्यवस्था बनाए रखने के लिए विश्वविद्यालय कुलानुशासक द्वारा एडवाइजरी जारी की गई है जिसका कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाएगा.
उन्होंने आगे कहा, ‘विश्वविद्यालय सुरक्षा विभाग द्वारा विश्वविद्यालय में घटित विवाद को लेकर छात्रों के दोनों पक्षों को नोटिस जारी कर लिखित रूप में अपना पक्ष प्रस्तुत करने की कार्यवाही की गई है. घटना के संबंध में छात्रों की शिकायत विश्वविद्यालय प्रशासन को गुरुवार (25 फरवरी) को प्राप्त हुई है जिस पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी. ‘
कैंपस में सुरक्षा इंतजाम के संबंध में विवेक जायसवाल बताते हैं कि विश्वविद्यालय में स्थायी सुरक्षाकर्मियों, एजेंसी द्वारा प्रदत्त सुरक्षाकर्मियों एवं आवश्यकता पड़ने पर नजदीकी पुलिस स्टेशन के माध्यम से सुरक्षा सुनिश्चित की जाती है. विश्वविद्यालय में छात्रों के बीच होने वाली अप्रिय स्थितियों एवं घटना संबंधी मामले कुलानुशासक बोर्ड एवं सुरक्षा समिति के माध्यम से हल किए जाते हैं.
ये पूछे जाने पर कि क्या प्रशासन ने हाल की घटनाओं के लेकर पुलिस थाने में कोई शिकायत दर्ज करवाई है, वे कहते हैं, ‘दोनों ही घटनाओं के समय विश्वविद्यालय सुरक्षाकर्मियों द्वारा घटना को रोके जाने का त्वरित प्रयास किया गया. विश्वविद्यालय सुरक्षा विभाग के माध्यम से तत्काल नजदीकी पुलिस स्टेशन को सूचना दी गई और घटनास्थल पर बुलाया गया. छात्रों द्वारा नजदीकी थाने में प्राथमिकी दर्ज कराए जाने की सूचना मिली है.’
वहीं, पीड़ित छात्रों को ‘कारण बताओ नोटिस’ किस आधार पर जारी किया गया, इस संबंध में प्रशासन का कहना है कि विश्वविद्यालय छात्रावास में बिना सक्षम अनुमति के अनाधिकृत व्यक्तियों के आगमन एवं उन अनाधिकृत व्यक्तियों के साथ छात्र समूहों की लगातार बैठकों के आयोजन की सूचना मिलने और दिनांक 20 फरवरी को हुई घटना में उनकी संदिग्ध भूमिका के कारण छात्रावास के छात्रों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है.
