नई दिल्ली: बेंगलुरु के सरजापुर स्थित अजीम प्रेमजी यूनिवर्सिटी ने उन छात्रों के ख़िलाफ़ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है, जिन्होंने मंगलवार (24 फरवरी) को विश्वविद्यालय परिसर में कश्मीर से संबंधित एक कार्यक्रम आयोजित करने की योजना बनाई थी.
द न्यूज मिनट ने गुरुवार (26 फरवरी) को अपनी एक रिपोर्ट में बताया कि यह कार्यक्रम स्पार्क रीडिंग सर्कल एपीयू नामक एक समूह द्वारा ‘कुनन पोशपोरा’ घटना पर चर्चा के लिए आयोजित किया जा रहा था, जो फरवरी 1991 में कश्मीर के दो गांवों में सुरक्षाकर्मियों द्वारा सामूहिक बलात्कार के आरोपों से संबंधित है.
उल्लेखनीय है कि इस घटना को ‘राष्ट्रविरोधी गतिविधि’ बताते हुए अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने मंगलवार को विरोध प्रदर्शन किया था. संगठन के सदस्यों ने कथित तौर पर विश्वविद्यालय के साइनबोर्ड पर काली स्याही पोत दी थी और साइनबोर्ड व दीवारों पर स्प्रे पेंट कर दिया था.
उन्होंने कथित तौर पर सुरक्षा गार्डों और छात्रों पर हमला भी किया था, जिसके बाद संगठन के अठारह सदस्यों को पुलिस हिरासत में ले लिया गया था.
मालूम हो कि अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की छात्र शाखा है, जिसे भारतीय जनता पार्टी की मूल संस्था माना जाता है.
मंगलवार को ही बाद में अजीम प्रेमजी विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार ऋषिकेश बीएस द्वारा स्पार्क रीडिंग सर्कल एपीयू के ख़िलाफ़ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई, जिसमें कहा गया कि कार्यक्रम के लिए अनुमति नहीं मांगी गई थी और न ही अनुमति दी गई थी.
द हिंदू ने रजिस्ट्रार के हवाले से बताया कि विश्वविद्यालय के प्रोटोकॉल के अनुसार परिसर में कार्यक्रम आयोजित करने के लिए अनुमति अनिवार्य है.
विश्वविद्यालय अधिकारियों ने यह भी दावा किया कि स्पार्क रीडिंग सर्कल एपीयू संस्थान के साथ पंजीकृत नहीं है. अखबार के अनुसार, उन्होंने आगे कहा कि अज्ञात व्यक्ति विश्वविद्यालय के नाम का दुरुपयोग कर रहे थे और समूहों के बीच दुश्मनी भड़काने वाली सामग्री फैला रहे थे.
इस शिकायत के आधार पर एफआईआर दर्ज की गई है.
एफआईआर दर्ज करना बौद्धिक स्वतंत्रता के प्रति संस्थान की प्रतिबद्धता को कमजोर करता है: यूनियन
इस संबंध में गुरुवार को अजीम प्रेमजी विश्वविद्यालय की स्टूडेंट यूनियन ने कहा कि प्रशासनिक अनुमति के बिना परिसर में किसी कार्यक्रम का आयोजन प्रोटोकॉल का उल्लंघन हो सकता है, लेकिन ऐसी चूक को आंतरिक निकायों द्वारा निपटाया जाना चाहिए, न कि एफआईआर से.
यूनियन ने आगे कहा, ‘हमें सबसे ज्यादा चिंता पिछले कुछ दिनों की घटनाओं के बाद सामने आई परिणामों में असमानता की है. जो लोग बिना अनुमति के परिसर में घुसे, हमारे समुदाय के सदस्यों को शारीरिक नुकसान पहुंचाया और विश्वविद्यालय की संपत्ति को क्षति पहुंचाई, उन्हें जमानत मिल गई है और उन पर जमानती आरोप हैं. वहीं दूसरी ओर, शांतिपूर्ण सभा आयोजित करने वाले विश्वविद्यालय के छात्रों पर गैर-जमानती आरोप लगाए गए हैं.’
परिषद ने आगे कहा कि इस तरह की कार्रवाई पर आपराधिक एफआईआर दर्ज करना बौद्धिक स्वतंत्रता के प्रति संस्थान की प्रतिबद्धता को कमजोर करता है.
अपने विरोध प्रदर्शन से पहले एबीवीपी ने एक प्रेस विज्ञप्ति में ‘भारतीय सेना के ख़िलाफ़ राष्ट्र-विरोधी, कश्मीर अलगाववादी कार्यक्रमों और सत्रों’ की निंदा की थी.
केंद्रीय गृह मंत्रालय को संबोधित एक ज्ञापन में संगठन ने कार्यक्रम आयोजित करने वाले छात्र समूह और इसकी अनुमति देने के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन के ख़िलाफ़ कड़ी कार्रवाई की भी मांग की थी.
