छात्र देश का भविष्य हैं, पीएम मोदी अतीत हैं: राहुल गांधी

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी शनिवार को आंदोलन करने वाले छात्रों के एक समूह के साथ मीडिया से बात करते हुए कहा कि छात्र देश का भविष्य हैं, पीएम मोदी अतीत हैं, और अतीत कभी भविष्य का मुकाबला नहीं कर सकता.

आंदोलन करने वाली छात्राओं के साथ कांग्रेस सांसद राहुल गांधी. (फोटो साभार: एक्स/@RahulGandhi)

नई दिल्ली: लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने शनिवार (25 जुलाई) को नीट पेपर लीक के विरोध में हो रहे प्रदर्शनों को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर अपना हमला तेज़ कर दिया. उन्होंने कहा कि जहां छात्र देश का भविष्य हैं, वहीं पीएम मोदी अतीत हैं, और अतीत कभी भविष्य का मुकाबला नहीं कर सकता.

राहुल गांधी अपने आवास पर विरोध प्रदर्शन कर रहे छात्रों के एक समूह से मुलाकात के बाद पत्रकारों से बात करते हुए कहा, ‘छात्रों की तीन मांगे हैं जिन पर कोई समझौता नहीं हो सकता.’

यह दावा करते हुए कि उन्हें पता चला है कि केंद्रीय मंत्रिमंडल धर्मेंद्र प्रधान को शिक्षा मंत्रालय से हटाकर किसी दूसरे मंत्रालय में भेजने पर विचार कर रहा है, गांधी ने कहा कि ऐसा करने से समस्या का समाधान नहीं होगा. धर्मेंद्र प्रधान को हटाना ही होगा, इस पर कोई समझौता नहीं हो सकता

उन्होंने कहा, ‘यह छात्रों को स्वीकार नहीं है. यह किसी को मंजूर नहीं है. प्रधान भ्रष्टाचार का प्रतीक है और देश के बच्चों के भविष्य के साथ जो हुआ उसका प्रतीक हैं.

ज्ञात हो कि प्रधान ने इसी दोपहर इस्तीफ़ा दे दिया है.

राहुल गांधी ने दिल्ली में 20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान छात्रों पर हुए पुलिस कार्रवाई के लिए जवाबदेही की मांग करते हुए कहा, ‘इसका आदेश देने वाले और इसको अमल करने वालों को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए और उनको सजा होनी चाहिए.’

उन्होंने कहा, ‘वे (युवा) भारत का भविष्य हैं और कोई उनसे लड़ नहीं सकता. नरेंद्र मोदी भारत का अतीत हैं; अतीत कभी भविष्य से नहीं लड़ सकता.’

राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि सरकार युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले जिम्मेदारों को बचाने की कोशिश कर रही है.

गांधी ने यह भी मांग की कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी छात्रों से माफी मांगें और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को तुरंत हटाने की अपनी मांग दोहराई.

इस बीच, शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इस्तीफा पत्र भेज दिया है.

‘आंदोलन रोकने लिए मेट्रो स्टेशन, सड़कें, दुकानें, इंटरनेट सेवाएं बंद’

इससे पहले उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने आंदोलन को रोकने के लिए मेट्रो स्टेशन, सड़कें, दुकानें, इंटरनेट सेवाएं और यहां तक ​​कि खाने-पीने की सप्लाई भी बंद कर दी, लेकिन वह पेपर लीक को रोकने में नाकाम रही.

लोकसभा में विपक्ष के नेता ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि सरकार ने अपने अधिकारों की मांग कर रहे छात्रों के खिलाफ ‘क्रूर’ कदम उठाए हैं.

उन्होंने लिखा, ‘मेट्रो बंद कर दी. रास्ते बंद कर दी, दुकानें बंद कर दी, इंटरनेट बंद कर दी, खाना बंद कर दी. सरकार ने अपने अधिकारों की मांग कर रहे छात्रों के खिलाफ ये क्रूर कदम उठाए. बस एक चीज़ बंद नहीं कर पाए, मोदी जी – पेपर लीक.’

इससे पहले लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने राष्ट्रीय राजधानी में 20 जुलाई को हुए छात्र विरोध प्रदर्शनों के दौरान केंद्र और दिल्ली पुलिस की ‘बर्बरता’ की कड़ी आलोचना की थी.

शुक्रवार (24 जुलाई) को उन्होंने साहिल नाम के युवक को मीडिया के सामने पेश किया. उन्होंने आरोप लगाया कि दिल्ली पुलिस ने 20 जुलाई को दिल्ली में शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे 19 वर्षीय साहिल के चेहरे पर पैलेट गन से हमला किया.

राहुल गांधी ने बताया, ‘साहिल दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्र हैं, लेकिन अपने परिवार का सहारा बनने के लिए वे पार्ट-टाइम कार भी चलाते हैं. वे ख़ुद 2025 में एसएससी दिल्ली कांस्टेबल भर्ती परीक्षा के पेपर लीक के पीड़ित रहे हैं.’

उन्होंने एक्स पर एक पोस्ट में वीडियो साझा करते हुए कहा  कि आज के दौर में, अपने अधिकारों के लिए विरोध करने वाले बच्चों को ‘न्याय’ के बजाय ‘पैलेट’ मिलते हैं.

पोस्ट में लिखा था, ‘साहिल हाथ में तिरंगा लेकर बस साफ़-सुथरी परीक्षा और मेहनत का फल मांग रहा था – पुलिस ने बंदूक उठाई और छर्रे दाग कर बुरी तरह घायल कर दिया. ये अंग्रेज़ों का ज़ुल्म नहीं, आज़ाद भारत की मोदी सरकार की बर्बरता है – जहां अपना हक़ मांगते मासूम छात्रों को न्याय नहीं, छर्रे मिलते हैं.’

न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, शुक्रवार को नीट-यूजी विवाद को लेकर देशभर में जारी छात्र आंदोलनों के बीच केंद्रीय मंत्रिमंडल ने ‘सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024’ में संशोधन के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी. इस संशोधन का उद्देश्य पेपर लीक और सार्वजनिक परीक्षाओं में होने वाली अन्य अनियमितताओं के खिलाफ कानूनी प्रावधानों को और अधिक सख्त बनाना बताया जा रहा है.

अखबार ने सूत्रों के हवाले से बताया कि प्रस्तावित संशोधन विधेयक सोमवार 27 जुलाई को संसद में पेश किया जा सकता है.

यह घटनाक्रम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुक्रवार देर रात सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर जारी एक वीडियो संदेश के बाद सामने आया. अपने संदेश में प्रधानमंत्री ने पेपर लीक के मामलों में ‘सख्त कार्रवाई’ का भरोसा दिया और कहा कि केंद्रीय मंत्रिमंडल इस संबंध में एक मसौदा विधेयक पर विचार कर रहा है.

प्रधानमंत्री का यह संदेश ऐसे समय आया है जब ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के नेतृत्व में छात्र आंदोलन लगातार जारी हैं और प्रदर्शनकारी नीट परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर जवाबदेही तय करने और व्यापक परीक्षा सुधारों की मांग कर रहे हैं.