नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल के राज्यपाल सीवी आनंद बोस ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. गुरुवार (5 मार्च) को आई खबरों के बाद इस कदम पर राजनीतिक हलकों में तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि यह फैसला संभवतः राज्य में होने वाले आगामी विधानसभा चुनावों से जुड़ा हो सकता है.
समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार, अपने कार्यकाल के दौरान राज्य सरकार के साथ कई सार्वजनिक मतभेदों में रहे बोस इस समय नई दिल्ली में हैं. इस्तीफा देने के बाद वे बंग भवन पहुंचे.
उनके इस्तीफे के कारणों का आधिकारिक रूप से खुलासा नहीं किया गया है. बोस को 17 नवंबर 2022 को पश्चिम बंगाल का राज्यपाल नियुक्त किया गया था. उन्होंने पीटीआई से कहा, ‘हां, मैंने इस्तीफा दे दिया है. मैं साढ़े तीन साल तक बंगाल का राज्यपाल रहा हूं. मेरे लिए इतना काफी है.’
अपनी पहली प्रतिक्रिया में ममता बनर्जी ने कहा कि इस घटनाक्रम से वे ‘हैरान और बहुत चिंतित’ हैं. उन्होंने कहा कि चुनावों से पहले राज्यपाल पर केंद्र सरकार का दबाव रहा होगा.
उन्होंने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, ‘उनके इस्तीफे के पीछे के कारण इस समय मुझे पता नहीं हैं. हालांकि वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए मुझे आश्चर्य नहीं होगा यदि आगामी विधानसभा चुनावों से ठीक पहले कुछ राजनीतिक हितों को साधने के लिए राज्यपाल पर केंद्रीय गृह मंत्री की ओर से दबाव डाला गया हो.’
I am shocked and deeply concerned by the sudden news of the resignation of Shri C. V. Ananda Bose, the Governor of West Bengal.
The reasons behind his resignation are not known to me at this moment. However, given the prevailing circumstances, I would not be surprised if the…
— Mamata Banerjee (@MamataOfficial) March 5, 2026
ममता बनर्जी ने यह भी दावा किया कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने उन्हें बताया है कि वर्तमान में तमिलनाडु के राज्यपाल आरएन रवि को बोस के उत्तराधिकारी के रूप में नियुक्त किया जाएगा.
उन्होंने आरोप लगाया कि इस नियुक्ति के बारे में उनसे कोई परामर्श नहीं किया गया, जो स्थापित परंपराओं का उल्लंघन है और भारत की संघीय व्यवस्था के लिए एक झटका है.
इस बीच राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु 6 से 7 मार्च तक पश्चिम बंगाल की यात्रा पर रहेंगी. इस दौरान वे दार्जिलिंग में ‘वंदे मातरम’ की 150वीं वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित दार्जिलिंग हिल फेस्टिवल का उद्घाटन करेंगी और लोक भवन में ‘रूट एंड रिद्म्स’ प्रदर्शनी का भी शुभारंभ करेंगी.
राष्ट्रपति सचिवालय के एक बयान के अनुसार वे आईआईटी खड़गपुर में महिला नेतृत्व और सशक्तिकरण पर आधारित एक प्लैटिनम जुबली प्रमुख कार्यक्रम का वर्चुअल उद्घाटन भी करेंगी और 7 मार्च को दार्जिलिंग में आयोजित 9वें अंतरराष्ट्रीय संताल सम्मेलन में भाग लेंगी.
इस बीच कांग्रेस के संचार प्रभारी महासचिव जयराम रमेश ने एक्स पर कहा, ‘सबसे पहले जगदीप धनखड़ को 21 जुलाई 2025 को भारत के उपराष्ट्रपति पद से तुरंत हटा दिया गया. कोलकाता में राजभवन में उनके बाद आए सीवी आनंद बोस के साथ भी आज ऐसा ही बर्ताव हुआ है.’
राज्यपालों और उपराज्यपालों में फेरबदल: आरएन रवि बंगाल भेजे गए, वीके सक्सेना लद्दाख के उपराज्यपाल बने
केंद्र सरकार ने गुरुवार (5 मार्च) को देश के कई राज्यों के राज्यपालों और दिल्ली व लद्दाख के उपराज्यपालों से जुड़े बड़े पैमाने पर फेरबदल की घोषणा की. इस बदलाव के तहत कुल नौ नियुक्तियां और तबादले किए गए.
तमिलनाडु के राज्यपाल आरएन रवि का तबादला कर उन्हें पश्चिम बंगाल का राज्यपाल नियुक्त किया गया है.
साल 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु में दस विधेयकों को मंजूरी देने से रोकने के रवि के फैसले की आलोचना की थी. अदालत ने इसे ‘गैरकानूनी’ और ‘मनमाना‘ बताते हुए कहा था कि डीएमके सरकार द्वारा पारित वे विधेयक स्वीकृत माने जाएंगे.
यह फेरबदल ऐसे समय हुआ है जब विपक्ष की ओर से आश्चर्य और आलोचना की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं. कुछ नेताओं ने इसके समय पर सवाल उठाए हैं, क्योंकि जिन राज्यों में नए राज्यपाल नियुक्त किए गए हैं – जैसे पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु – वहां इसी साल विधानसभा चुनाव होने वाले हैं. जबकि दिल्ली, लद्दाख, तेलंगाना, महाराष्ट्र, नगालैंड, बिहार और हिमाचल प्रदेश में चुनाव अगले साल या उसके बाद होने हैं, इन राज्यों में भी राज्यपालों और राज्य सरकारों के बीच समय-समय पर विवाद होते रहे हैं.
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने आरएन रवि को पश्चिम बंगाल भेजे जाने की आलोचना की और उनके पिछले विवादों का उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि रवि को पहले नगालैंड से उनके कामकाज के तरीके को लेकर उठे सवालों के कारण हटाया गया था और तमिलनाडु में उनके कार्यकाल के दौरान भी विवाद बने रहे.
फिलहाल खबर है कि केरल के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर अस्थायी रूप से तमिलनाडु के राज्यपाल के कार्यों का निर्वहन करेंगे, क्योंकि रवि कोलकाता जाने वाले हैं. उनका कार्यकाल भी विवादों से मुक्त नहीं रहा है.
एक अन्य महत्वपूर्ण बदलाव में पूर्व राजनयिक तरनजीत सिंह संधू को दिल्ली का नया उपराज्यपाल नियुक्त किया गया है. वर्तमान उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना को लद्दाख का उपराज्यपाल बनाया गया है.
उपराज्यपाल के रूप में सक्सेना का आम आदमी पार्टी की सरकार – जिसका नेतृत्व पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और बाद में आतिशी सिंह ने किया था – के साथ कई बार टकराव हुआ था.
हाल ही में दिल्ली की एक अदालत ने केजरीवाल को कथित आबकारी नीति घोटाला मामले में बरी कर दिया. यह मामला उपराज्यपाल सक्सेना की सिफारिश पर सीबीआई ने दर्ज किया था. अदालत ने इस मामले को ‘गढ़ा हुआ और झूठा’ बताया.
एक और बदलाव के तहत लद्दाख के उपराज्यपाल कविंदर गुप्ता को हिमाचल प्रदेश का राज्यपाल नियुक्त किया गया है. गुप्ता ने उपराज्यपाल के रूप में केवल नौ महीने के कार्यकाल के बाद 5 मार्च को इस्तीफा दे दिया था.
तेलंगाना के राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा को महाराष्ट्र का राज्यपाल नियुक्त किया गया है. वहीं हिमाचल प्रदेश के वर्तमान राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ला का तबादला कर उन्हें तेलंगाना का राज्यपाल बनाया गया है. शुक्ला का हिमाचल प्रदेश की कांग्रेस सरकार – जिसका नेतृत्व मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू कर रहे हैं – से विश्वविद्यालयों में कुलपतियों की नियुक्ति और विधायी कामकाज को लेकर मतभेद रहा था.
इसके अलावा, जम्मू-कश्मीर के पूर्व उपमुख्यमंत्री नंद किशोर यादव को नगालैंड का नया राज्यपाल नियुक्त किया गया है. केंद्र सरकार ने सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन को बिहार का राज्यपाल नियुक्त किया है. बिहार में इससे पहले आरिफ मोहम्मद खान राज्यपाल थे. केरल में उनके कार्यकाल के दौरान मुख्यमंत्री पिनराई विजयन की वामपंथी सरकार के साथ कई टकराव हुए थे, हालांकि बिहार में उनका कार्यकाल सार्वजनिक विवादों से अपेक्षाकृत मुक्त रहा.
इन नियुक्तियों और तबादलों पर सरकार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की गई है.
