गुजरात अशांत क्षेत्र क़ानून में संशोधन: कलेक्टरों को संपत्ति क़ब्ज़ाने तक की व्यापक शक्तियां दी गईं

गुजरात विधानसभा ने बुधवार को राज्य के विवादित ‘डिस्टर्ब्ड एरियाज’ यानी अशांत क्षेत्र क़ानून में संशोधन किया है. इन संशोधनों के तहत अब इन क्षेत्रों को स्पेसिफाइड एरियाज़ कहा जाएगा और ज़िला कलेक्टरों को यहां संपत्ति अपने क़ब्ज़े में लेने तक की शक्तियां दी गई हैं.

गुजरात विधानसभा भवन. (फाइल फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: गुजरात विधानसभा ने बुधवार (25 मार्च) को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) शासित राज्य के विवादित ‘अशांत क्षेत्र (डिस्टर्ब्ड एरियाज)’ कानून में बहुमत से संशोधन किया है.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, नए संशोधनों के तहत अब इन क्षेत्रों को ‘निर्दिष्ट क्षेत्र’ (स्पेसिफाइड एरियाज) कहा जाएगा और जिला कलेक्टरों को यहां संपत्ति अपने कब्जे में लेने तक की शक्तियां दी गई हैं.

राज्य के राजस्व राज्यमंत्री संजयसिंह महीड़ा ने कहा कि इस कदम का उद्देश्य ‘निर्दिष्ट क्षेत्रों में संपत्तियों के अनैच्छिक हस्तांतरण को रोकना और वैध मालिकों के हितों की रक्षा करना’ है. 

‘गुजरात प्रोहिबिशन ऑफ ट्रांसफर ऑफ इमूवेबल प्रॉपर्टी एंड प्रोविजन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ टेनेंट्स फ्रॉम एविक्शन फ्रॉम प्रिमाइसेज इन द डिस्टर्ब्ड एरियाज (संशोधन) विधेयक, 2026’ में ‘पीड़ित पक्ष’ की परिभाषा का दायरा बढ़ाया गया है. इसके तहत कलेक्टरों को यह अधिकार दिया गया है कि वे किसी ‘असंतुष्ट’ पक्ष की शिकायत पर संपत्ति के हस्तांतरण का स्वतः संज्ञान लेकर जांच कर सकते हैं.

महीड़ा के अनुसार, यदि संपत्ति का हस्तांतरण ‘आपत्तिजनक’ पाया जाता है, तब कलेक्टर को ऐसी संपत्ति अपने कब्जे में लेने का भी अधिकार होगा.

संशोधन में एक मॉनिटरिंग और सलाहकार समिति के गठन का प्रावधान भी शामिल किया गया है, जो सरकार को किसी क्षेत्र में संभावित सांप्रदायिक तनाव और उसके कारण होने वाले ‘अनैच्छिक विस्थापन’ के बारे में सलाह देगी. साथ ही ‘पीड़ित व्यक्तियों’ की परिभाषा का दायरा भी बढ़ाया गया है.

अख़बार के अनुसार, मौजूदा कानून में किसी क्षेत्र को ‘अशांत क्षेत्र’ घोषित करने के प्रावधान की जगह नया प्रावधान लाया गया है, जिसमें उन स्थितियों को भी शामिल किया जाएगा जहां किसी क्षेत्र में सांप्रदायिक तनाव के कारण सार्वजनिक व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका हो.

बहस के दौरान भाजपा विधायकों, जिनमें केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के क्षेत्र और वेजलपुर के विधायक अमित ठाकर शामिल हैं, उन्होंने दावा किया कि हिंदुओं को अपनी संपत्ति मुसलमानों को बेचकर ‘मजबूरन’ पलायन करना पड़ रहा और अहमदाबाद की जनसांख्यिकी बदलने की ‘साजिश’ चल रही है.

विधानसभा में एकमात्र मुस्लिम विधायक इमरान खेड़ावाला ने इस विधेयक का विरोध करते हुए कहा कि भाजपा विधायक वोट खोने के डर से ऐसे मुद्दे उठा रहे हैं. उन्होंने राज्य सरकार से अल्पसंख्यक समुदाय के लिए उनकी आबादी के अनुपात में जमीन आवंटित करने की भी मांग की.

जमालपुर-खाड़िया से कांग्रेस विधायक खेड़ावाला ने कहा, ‘अगर भाजपा के 30 साल के शासन में गुजरात में शांति है, तब फिर नए क्षेत्रों को डिस्टर्ब्ड एरियाज कानून में क्यों जोड़ा जा रहा है? पिछले कुछ वर्षों में 44 नए क्षेत्रों को इस कानून के तहत शामिल किया गया है.’

गुजरात का मौजूदा ‘अशांत क्षेत्र’ कानून अक्सर अल्पसंख्यकों, खासकर मुसलमानों के गेट्टोकरण को लेकर सवालों के घेरे में रहा है.

द वायर की एक रिपोर्ट के अनुसार, सितंबर 2025 में गुजरात की एक 15 वर्षीय मुस्लिम किशोरी ने आत्महत्या कर ली थी. उसके परिवार को अपने ही इलाके में घर खरीदने के बाद महीनों तक उत्पीड़न, हिंसा और धमकियों का सामना करना पड़ा था, जो इस कानून की पृष्ठभूमि में हुआ.

परिवार के अनुसार, पड़ोसियों ने उन्हें ‘डिस्टर्ब्ड एरियाज’ कानून के तहत कानूनी कार्रवाई की धमकी दी थी, जिससे उनकी खरीद को अवैध ठहराया जा सकता है. इससे परिवार पुलिस कार्रवाई के लिए आगे बढ़ने से हिचकता रहा और उत्पीड़न झेलता रहा.