नई दिल्ली: पंचकुला स्थित प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की एक विशेष अदालत ने शुक्रवार (3 मार्च) को हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपिंदर सिंह हुड्डा और नेशनल हेराल्ड अखबार के प्रकाशक एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (एजेएल) को पंचकुला में एजेएल को कथित तौर पर अवैध रूप से भूखंड आवंटित करने के 2005 के मामले में बरी कर दिया है.
हिंदुस्तान टाइम्स की खबर के मुताबिक, यह फैसला पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट द्वारा 25 फरवरी को केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) मामले में हुड्डा को बरी किए जाने के लगभग एक महीने बाद आया है.
उच्च न्यायालय ने माना था कि रिकॉर्ड पर मौजूद सबूतों से प्रथमदृष्टया भी अपराध साबित नहीं होता. तीसरे आरोपी मोती लाल वोरा की मृत्यु के बाद विशेष न्यायालय ने उनके खिलाफ कार्यवाही समाप्त कर दी थी.
सीबीआई के प्राथमिक मामले में बरी होने के बाद विशेष न्यायाधीश राजीव गोयल ने अभियुक्तों के खिलाफ ईडी की मनी लॉन्ड्रिंग की शिकायत भी बंद कर दी. ईडी की जांच सीबीआई द्वारा दर्ज किए गए आधारभूत अपराध पर आधारित थी.
78 वर्षीय हुड्डा कार्यवाही के दौरान स्वयं उपस्थित हुए, जहां भ्रष्टाचार, धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश के आरोपों से जुड़े एक दशक से चल रहे मुकदमे का प्रभावी रूप से अंत हो गया.
हालांकि, इस संबंध में दिल्ली की अदालतों में अलग से मामले लंबित हैं, जिनमें ईडी ने आरोप लगाया है कि सोनिया गांधी और राहुल गांधी ने नेशनल हेराल्ड अखबार चलाने वाली एजेएल की संपत्तियों को अवैध रूप से हासिल किया और अपराध की प्रत्यक्ष आय के रूप में करोड़ों रुपये अर्जित किए.
उल्लेखनीय है कि बीते दिसंबर में दिल्ली की एक अदालत ने ईडी की चार्जशीट का संज्ञान लेने से इनकार कर दिया था. अब यह मामला दिल्ली उच्च न्यायालय में लंबित है.
मामले राजनीतिक रूप से प्रेरित थे: भूपिंदर हुड्डा
इस फैसले का स्वागत करते हुए हुड्डा ने कहा कि इससे उनकी उस पुरानी बात की पुष्टि होती है कि ये मामले राजनीतिक रूप से प्रेरित थे और इनका कोई तथ्यात्मक आधार नहीं था. उन्होंने आगे कहा, ‘मैं शुरू से ही कहता आया हूं कि मुझे न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है.’
गौरतलब है कि इस मामले में ईडी की जांच सीबीआई द्वारा 2005 में दर्ज इसी विवाद से जुड़े एक मामले पर आधारित थी, जब हुड्डा मुख्यमंत्री थे.
हरियाणा सतर्कता विभाग ने मई 2016 में कथित भूमि आवंटन के संबंध में एफआईआर दर्ज की थी और सीबीआई ने अगले साल जांच अपने हाथ में ले ली थी. सीबीआई ने दिसंबर 2018 में हुड्डा, वोरा और एजेएल को दोषी ठहराते हुए आरोप पत्र दाखिल किया था.
पंचकुला स्थित एक विशेष सीबीआई अदालत ने 2021 में दोनों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 120-बी (आपराधिक साजिश) और 420 (धोखाधड़ी) तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के प्रावधानों के तहत आरोप तय किए थे.
सीबीआई की एफआईआर दर्ज होने के समय दिवंगत मोती लाल वोरा एजेएल के अध्यक्ष थे और कांग्रेस नेता सोनिया गांधी और राहुल गांधी शेयरधारकों में शामिल थे. इस अखबार की शुरुआत 1938 में प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने की थी.
इसके बाद ईडी ने 26 अगस्त, 2019 को पंचकुला ट्रायल कोर्ट में अभियोग शिकायत दर्ज कराई. ट्रायल कोर्ट ने 26 सितंबर, 2019 को इस पर संज्ञान लिया और हुडा को आरोपी के रूप में तलब किया.
इस मामले में हुड्डा की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता आरएस चीमा के साथ पेश हुए अर्शदीप सिंह चीमा ने कहा कि हुड्डा और एजेएल, दोनों को पहले ही उच्च न्यायालय से मूल मामले (सीबीआई एफआईआर) में क्लीन चिट मिल चुकी है.
उन्होंने आगे कहा कि यह निर्णय विजय मंदनलाल चौधरी मामले में सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के आलोक में आया है, जिसमें सर्वोच्च न्यायालय ने कहा था कि यदि किसी व्यक्ति को अनुसूचित अपराध से अंततः बरी कर दिया जाता है या उसके खिलाफ आपराधिक मामला सक्षम न्यायालय द्वारा रद्द कर दिया जाता है, तो उसके खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का कोई अपराध नहीं हो सकता.
