नई दिल्ली: उत्तराखंड के कुमाऊं की पहाड़ियों में स्थित कौसानी के एक सरकारी स्कूल परिसर में छोटा-सा ‘भूत का मंदिर’ बनाए जाने का मामला सामने आया है, जिसे लेकर विवाद खड़ा हो गया है.
टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक, यह मंदिर ‘पिछले 30 वर्षों से परिसर में भटकने वाली एक आत्मा को शांत करने’ के उद्देश्य से बनाया गया था और इसके निर्माण के लिए छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों से चंदा इकट्ठा किया गया था.
बताया जा रहा है कि शुरुआत में ‘आत्मा को दूर रखने’ के लिए ईंटों से एक अस्थायी संरचना बनाई गई थी. लेकिन जब स्कूल में कई लड़कियां अज्ञात कारणों से बेहोश होने लगीं, तो इसका कारण ‘नेपाल के एक मजदूर की आत्मा’ को माना गया.
लोगों के अनुसार, तीन दशक पहले स्कूल के पास एक दुर्घटना में उसकी मौत हो गई थी. उस मजदूर की आत्मा की शांति के लिए बाद में एक छोटा सा स्थाई ‘मंदिर’ बना दिया गया.
इस संबंध स्कूल की एक शिक्षिका ने नाम न छापने की शर्त पर अखबार को बताया कि मंदिर निर्माण से पहले उन्होंने परिसर में बेहोश हो रही लड़कियों को समझाने की कोशिश की थी. उन्होंने आगे कहा, ‘पहाड़ी इलाकों में देवी-देवताओं और आत्माओं में आस्था बहुत प्रबल है. मंदिर को डर कम करने के एक तरीके के रूप में देखा गया.’
इस मंदिर के निर्माण की पहल इस साल जनवरी में स्कूल के अभिभावक-शिक्षक संघ (पीटीए) ने की थी.
अखबार ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि कक्षा 6 से 12 तक के 218 छात्रों में से प्रत्येक से 100 रुपये एकत्र किए गए, जिससे कुल 21,800 रुपये जमा हुए, जबकि कुल लागत लगभग 25,000 रुपये होने का अनुमान है. इस निर्माण में अभिभावकों और शिक्षकों ने भी योगदान दिया.
पीटीए अध्यक्ष चंदन सिंह भंडारी ने बताया कि छात्रों के बार-बार बीमार पड़ने के कारण उन्होंने इस संरचना को बनाने का निर्णय लिया.
इस संबंध में प्रधानाचार्य ताजबर सिंह नेगी ने कहा कि पीटीए की बैठक में अभिभावकों की सहमति से धनराशि एकत्र की गई थी और इसका उद्देश्य छोटे मंदिर की सफाई और निर्माण दोनों था. नेगी ने आगे कहा, ‘इसका उद्देश्य पढ़ाई के लिए शांतिपूर्ण वातावरण बनाना था.’
हालांकि, हाल ही में अभिभावकों और छात्रों द्वारा पैसे इकट्ठा करने और उपयोग पर सवाल उठाए जाने पर विवाद खड़ा हो गया. इसके बाद मामला शिक्षा विभाग के संज्ञान में आया, जिसके बाद गुरुवार को जांच के आदेश दिए.
वहीं, जिले के मुख्य शिक्षा अधिकारी विनय कुमार ने कहा कि मामले की जांच की जाएगी और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी. उन्होंने आगे बताया कि जांच का जिम्मा गरुड़ के ब्लॉक शिक्षा अधिकारी को सौंपा गया है.
