तमिलनाडु: निर्वाचन आयोग ने चुनाव से पहले गृह सचिव को बदला, हफ़्तेभर में पांचवां तबादला

चुनावी राज्य तमिलनाडु में इस सप्ताह चुनाव आयोग द्वारा प्रशासनिक अधिकारियों का बड़ा फेरबदल किया गया है. गृह सचिव धीरज कुमार को बदलने से पहले राज्य के मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक (प्रभारी), डीजीपी (सशस्त्र पुलिस, सतर्कता एवं भ्रष्टाचार-विरोधी) और चेन्नई के पुलिस आयुक्त का भी तबादला कर दिया गया है, जिन पर सत्तारूढ़ द्रमुक ने नाराज़गी जताई है.

(फोटो साभार: फेसबुक)

नई दिल्ली: चुनाव आयोग ने शनिवार (11 अप्रैल) को तमिलनाडु के गृह सचिव धीरज कुमार की जगह के मणिवासन को नियुक्त किया, जो वर्तमान में हिंदू धार्मिक एवं धर्मार्थ बंदोबस्ती विभाग के प्रमुख हैं.

द टेलीग्राफ की खबर के मुताबिक, राज्य में इस सप्ताह चुनाव आयोग द्वारा प्रशासनिक अधिकारियों का यह पांचवां बड़ा तबादला है. 23 अप्रैल को होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले किए गए इन तबादलों से सत्तारूढ़ द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) नाराज है.

मालूम हो कि अन्य जिन अधिकारियों का तबादला किया गया है और जिन्हें चुनाव संबंधी कार्यों से प्रतिबंधित किया गया है, उनमें मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक (प्रभारी), डीजीपी (सशस्त्र पुलिस, सतर्कता एवं भ्रष्टाचार-विरोधी) और चेन्नई के पुलिस आयुक्त शामिल हैं.

इससे पहले द्रमुक ने आईपीएस अधिकारी संदीप मित्तल के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी, जिन्हें चुनाव आयोग ने डीजीपी (सशस्त्र पुलिस, सतर्कता एवं भ्रष्टाचार-विरोधी) बनाया था. द्रमुक ने शिकायत में उनके एक आरएसएस समर्थक सोशल मीडिया पोस्ट का हवाला दिया था.

शनिवार को चुनाव आयोग ने अपने तबादलों के आदेश में संशोधन करते हुए मित्तल को केवल डीजीपी (सशस्त्र पुलिस) के पद पर ही बरकरार रखा.

इस संबंध में मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने गुरुवार को सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक पोस्ट में कहा था, ‘मैं चुनाव आयोग की कड़ी निंदा करता हूं, जो भाजपा के समर्थन में सीधे प्रचार करने के लिए मैदान में उतरे बिना चुनावी मैदान में पूरी तरह से सक्रिय है…’

उन्होंने आगे कहा था, ‘भाजपा शासित असम में चुनाव हो रहे हैं. वहां उन्होंने डीजीपी या मुख्य सचिव को नहीं बदला. भाजपा की सहयोगी सरकार वाले बिहार में चुनाव हुए. वहां भी उन्होंने डीजीपी या मुख्य सचिव को नहीं बदला. केवल तमिलनाडु में ही मुख्य सचिव और डीजीपी चुनाव आयोग की नजर में आए हैं. भाजपा के उकसावे पर आयोग ने उन्हें बदल दिया है.’

‘चुनाव आयोग का इतनी उतावली से उन चुनावी धांधलियों में सहायता करना अशोभनीय है, जिन्हें भाजपा, एआईएडीएमके के साथ मिलकर तमिलनाडु में अंजाम देने की योजना बना रही है. आयोग के अधिकारी आज भले ही पद पर हों, कल पद छोड़ दें. लेकिन चुनाव आयोग की निष्पक्षता को सड़कों पर घसीटना हमारे देश और स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनावों के लिए गंभीर खतरा है.’

गौरतलब है कि इस सप्ताह की शुरुआत में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार द्वारा तृणमूल सांसदों को कथित तौर पर ‘गेट लॉस्ट‘ की घटना का ज़िक्र करते हुए कांग्रेस सांसद पी. चिदंबरम ने एक्स पर कहा कि कुछ साल पहले सर्वोच्च न्यायालय ने एक फैसले में चुनाव आयोग को ‘अपने ही साम्राज्य में सत्ता हथियाने’ के खिलाफ चेतावनी दी थी. वह एक दूरदर्शी टिप्पणी थी.

उन्होंने आगे कहा कि तमिलनाडु में एक ईमानदार, कुशल और निष्पक्ष मुख्य सचिव का तबादला और चुनाव आयोग द्वारा तृणमूल सांसदों के साथ किए गए उपेक्षापूर्ण व्यवहार से सर्वोच्च न्यायालय की आशंका की पुष्टि होती प्रतीत होती है.

ज्ञात हो कि बीते महीने मार्च में चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल में भी इसी तरह की कार्रवाई की थी. 31 मार्च तक आयोग ने कम से कम 31 आईपीएस अधिकारियों और अन्य नौकरशाहों का तबादला किया था, जिनमें 17 मार्च को दो अतिरिक्त पुलिस महानिदेशकों का तबादला भी शामिल था.