मणिपुर: जातीय हिंसा से प्रभावित पांच ज़िले, इंटरनेट और वीपीएन पर रोक

मणिपुर सरकार ने जातीय हिंसा से प्रभावित राज्य के पांच ज़िलों - इंफाल पश्चिम, इंफाल पूर्व, थौबल, काकचिंग और बिष्णुपुर में मोबाइल इंटरनेट और डेटा सेवाओं, जिसमें वीपीएन एक्सेस भी शामिल है, पर लगी रोक को दो और दिनों के लिए बढ़ा दिया है.

मणिपुर के इंफाल में बुधवार, 8 अप्रैल, 2026 को बिष्णुपुर में मंगलवार को हुए बम हमले के बाद भड़की हिंसा के बाद कर्फ्यू, इंटरनेट सेवा पर रोक और भारी पुलिस बल तैनात है; इसी माहौल के बीच एक महिला जले हुए बस के पास से गुज़र रही है. (फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: मणिपुर सरकार ने रविवार (12 अप्रैल) को जातीय हिंसा से प्रभावित राज्य के पांच जिलों में मोबाइल इंटरनेट और डेटा सेवाओं, जिसमें वीपीएन एक्सेस भी शामिल है, पर लगी रोक को दो और दिनों के लिए बढ़ा दिया.

मंगलवार (7 अप्रैल) को राज्य के कुछ हिस्सों में इंटरनेट सेवाएं निलंबित कर दी गईं थी और कर्फ्यू लगा दिया गया था. यह कदम तब उठाया गया जब बिष्णुपुर में एक अर्धसैनिक शिविर पर धावा बोलने वाली भीड़ पर सुरक्षा बलों द्वारा कथित तौर पर गोलीबारी किए जाने से दो लोगों की मौत हो गई और 29 अन्य घायल हो गए. यह भीड़ एक धमाके में मारे गए पांच साल के एक बच्चे और उसकी छह महीने की बहन की मौत का विरोध कर रही थी.

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, ताज़ा हिंसा भड़कने के बाद पांच जिलों में विरोध प्रदर्शन हुए हैं. तब से तीन और नागरिकों की जान जा चुकी है. रविवार को इंफाल पश्चिम, इंफाल पूर्व, बिष्णुपुर, काकचिंग और थौबल में सुबह 5 बजे से दोपहर 3 बजे तक, यानी 10 घंटे के लिए कर्फ्यू में ढील दी गई.

राज्य के गृह विभाग ने कहा कि इंफाल पश्चिम, इंफाल पूर्व, थौबल, काकचिंग और बिष्णुपुर जिलों में ये पाबंदियां जारी रहेंगी.

विभाग ने यह भी बताया कि यह निर्णय स्थिति की समीक्षा करने और सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक निवारक उपायों की जरूरत का आकलन करने के बाद लिया गया है.

अधिकारियों ने चिंता जताई कि वॉट्सऐप, फेसबुक, इंस्टाग्राम और एक्स जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से गलत जानकारी और अफवाहों के संभावित प्रसार से भीड़ जुट सकती है और हिंसा, आगजनी या संपत्ति को नुकसान हो सकता है.

उन्होंने यह भी कहा कि मोबाइल डेटा सेवाओं की प्रभावी निगरानी एक चुनौती बनी हुई है, इसलिए प्रतिबंध जारी रखना आवश्यक है.

राज्य सरकार ने मंगलवार को ‘कानून-व्यवस्था की अस्थिर स्थिति’ का हवाला देते हुए इंटरनेट सेवाओं को तीन दिनों के लिए निलंबित करने की घोषणा की थी. बुधवार को ब्रॉडबैंड सेवाएं, विशेष रूप से इंटरनेट लीज्ड लाइन और फाइबर टू द होम कनेक्शन, सशर्त रूप से बहाल कर दी गई थीं, लेकिन मोबाइल इंटरनेट पर प्रतिबंध जारी रहा.

शुक्रवार को मोबाइल इंटरनेट और डेटा सेवाओं पर लगी रोक को दो दिनों के लिए और बढ़ा दिया गया.

ज्ञात हो कि मणिपुर में मई 2023 से जारी जातीय हिंसा में अब तक कम से कम 260 लोगों की जान जा चुकी है और लगभग 60,000 लोग विस्थापित हुए हैं. यह हिंसा सबसे पहले मेईतेई और कुकी समुदायों के बीच शुरू हुई थी और अब लगभग सभी समूह इसमें शामिल हो गए हैं. मेईतेई समुदाय मुख्य रूप से इंफाल घाटी के मैदानी इलाकों में रहते हैं, जबकि कुकी पहाड़ी क्षेत्रों में निवास करते हैं. हिंसा शुरू होने के बाद मेईतेई और कुकी अपने-अपने क्षेत्रों में सिमट गए हैं.

ताज़ा हिंसा के बाद मणिपुर के गृहमंत्री ने अमित शाह से मुलाक़ात की

मणिपुर के गृहमंत्री गोविंददास कोंथौजम ने रविवार को नई दिल्ली में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से मुलाक़ात की. बताया गया है कि इस मुलाक़ात का मकसद जातीय हिंसा से प्रभावित राज्य में ताज़ा हिंसा के बाद की स्थिति का जायज़ा लेना था.

हिंदुस्तान टाइम्स ने जानकारों के हवाले से बताया कि कोंथौजम और शाह ने हालात सामान्य करने के उपायों पर चर्चा की.

मीटिंग के बाद एक सोशल मीडिया पोस्ट में कोंथौजम ने लिखा कि उन्होंने मणिपुर में मौजूदा हालात पर विचार-विमर्श किया. उन्होंने लिखा, ‘हमने शांति को मज़बूत करने, स्थिरता सुनिश्चित करने और लोगों के हितों की रक्षा करने पर एक रचनात्मक चर्चा की.’