‘उन्होंने हमारे ट्रक का 20–30 किलोमीटर तक पीछा किया. शुरू में वे पांच-छह लोग थे, लेकिन जब तक उन्होंने हमें ओवरटेक करके रोका, उनकी संख्या करीब 20 हो गई थी.’ ट्रक ड्राइवर एल्विन ने बताया, जो महाराष्ट्र के यवतमाल जिले के उमरखेड तालुका के पास हमले का शिकार हुए दो लोगों में से एक हैं. उन्होंने हमलावरों के समूह को ‘हिंदुत्व गिरोह’ बताया.
एल्विन और उनका साथी मोहम्मद नदाफ निसार कुरैशी, केरल के पलक्कड़ जिले के पट्टांबी कस्बे से फल लदा ट्रक लेकर मध्य प्रदेश जा रहे थे, तभी रास्ते में हथियारबंद लोगों के एक समूह ने उनकी गाड़ी को रोककर हमला कर दिया. एल्विन को मामूली चोटें आईं, जबकि कुरैशी के सिर और नाक पर गंभीर चोटें आईं और वे 24 अप्रैल से नांदेड़ के बाहरी इलाके में स्थित एक निजी अस्पताल के आईसीयू में भर्ती हैं.
फोन पर घटना का जिक्र करते हुए एल्विन ने दावा किया कि हमला बिना किसी उकसावे के हुआ. उन्होंने कहा, ‘हमें अचानक रोका गया. मैंने देखा कि उनके पास हथियार थे. मैं इतना डर गया कि मैंने गाड़ी रोकने के बजाय चलाते रहने का फैसला किया.’
महाराष्ट्र की सड़कों पर इस तरह की घटनाएं आम हैं. कई स्वयंभू निगरानी करने वाले समूह (vigilante groups), जो दक्षिणपंथी संगठनों से जुड़े बताए जाते हैं, सड़कों पर वाहनों को रोककर अवैध रूप से जांच करते हैं और चालकों को डराते-धमकाते हैं. ये ‘चेक पोस्ट’ अक्सर गोमांस की तलाश के नाम पर लगाए जाते हैं, लेकिन ज्यादातर मामलों में मुस्लिम या बहुजन समुदाय से आने वाले चालकों को निशाना बनाया जाता है और उन पर हमला किया जाता है.
लंबी दूरी तक गाड़ी चलाने वाले एल्विन और कुरैशी का कहना है कि वे काफी समय से महाराष्ट्र की सड़कों पर रात में ड्राइविंग से बचते रहे हैं. दक्षिण कर्नाटक के मुल्की निवासी एल्विन ने बताया, ‘दक्षिण भारत में पंजीकृत गाड़ियां और हमारा हुलिया, जिससे साफ पता चलता है कि हम हिंदू नहीं हैं, हमें ऐसे समूहों के निशाने पर ले आता है जो रात में सक्रिय रूप से घूमते रहते हैं और अपने शिकार की तलाश करते हैं.’
यह घटना 23 अप्रैल को हुई थी, लेकिन 24 घंटे से अधिक समय तक पुलिस ने एफआईआर दर्ज नहीं की. बाद में पुलिस ने इसे ‘रोड रेज’ यानी सड़क पर गुस्से से जुड़ा मामला बताया और कहा कि हमलावर इसलिए नाराज थे क्योंकि पीड़ितों ने उनके वाहन को ओवरटेक किया था. जांच अधिकारी बारगे ने पुष्टि की कि छह लोगों को दो दिन की पुलिस हिरासत में लिया गया है. उन्होंने कहा, ‘हम एक और व्यक्ति की तलाश कर रहे हैं.’
पीड़ितों के अनुसार, पुलिस इस मामले को साधारण ‘रोड रेज’ बताकर इसकी गंभीरता को कम करके आंक रही है. कुरैशी के एक रिश्तेदार ने द वायर को बताया, ‘वे लोग हथियारों से लैस थे और सड़क पर निगरानी कर रहे थे.’ कुरैशी के परिवार ने आरोप लगाया, ‘हमला बहुत गंभीर प्रकृति का था. उन्होंने जान से मारने के इरादे से हमला किया था.’
कुरैशी, जो हमले के बाद से आईसीयू में हैं, उन्हें कई सर्जरी की जरूरत पड़ेगी. इसके बावजूद पुलिस ने केवल हल्की धाराएं ही लगाई हैं.’
दोनों पीड़ित समाज के निचले तबके से आते हैं और 25 अप्रैल की शाम तक उनके परिवार अलग-अलग संगठनों से आर्थिक मदद की अपील कर रहे थे.
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