ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट ‘सबसे बड़ा घोटाला, पर्यावरणीय संपत्ति की सबसे बड़ी लूट’, इसे रोका जाना चाहिए: राहुल गांधी

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने ग्रेट निकोबार द्वीप का दौरा किया और वहां के लोगों से मुलाकत बाद कहा कि ग्रेट निकोबार परियोजना विकास नहीं है, बल्कि विकास की भाषा में छिपा हुआ विनाश है. यह इस देश की प्राकृतिक और जनजातीय विरासत के ख़िलाफ़ सबसे बड़े घोटालों और सबसे गंभीर अपराधों में से एक है.

विपक्ष के नेता राहुल गांधी का अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के ग्रेट निकोबार द्वीप पर स्थित कैंपबेल बे गांव में निकोबारी समुदाय द्वारा स्वागत करते हुए. (फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने बुधवार (29 अप्रैल) को कहा कि अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के कैंपबेल बे में ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट ‘देश की प्राकृतिक और आदिवासी विरासत के खिलाफ सबसे बड़े घोटालों और सबसे गंभीर अपराधों में से एक है.’

सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर एक वीडियो पोस्ट में लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कहा कि ग्रेट निकोबार द्वीप पर केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित परियोजनाएं देश में हुए ‘सबसे बड़े घोटालों’ और ‘पर्यावरणीय संपत्ति की सबसे बड़ी लूट’ में से एक हैं.

गांधी उन कई इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स का ज़िक्र कर रहे थे जिन्हें केंद्र सरकार ग्रेट निकोबार द्वीप पर बना रही है. यह द्वीप बंगाल की खाड़ी में अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह का सबसे दक्षिणी द्वीप है.

केंद्र सरकार का दावा है कि यह परियोजना ‘रक्षा महत्व’ और ‘राष्ट्रीय सुरक्षा’ के लिए अत्यंत आवश्यक है, और इसके तहत एक अंतरराष्ट्रीय ट्रांसशिपमेंट टर्मिनल, एक टाउनशिप, एक बिजली संयंत्र और एक ग्रीनफील्ड हवाईअड्डा बनाया जाएगा. इन परियोजनाओं के कारण 130 वर्ग किलोमीटर घने, वर्षावन का विनाश होगा, साथ ही मूंगा चट्टानों (कोरल) और कछुओं के अंडे देने वाले स्थलों को भी नुकसान पहुंचेगा.

‘अडानी की इच्छाएं पूरी करने के लिए’

29 अप्रैल को ग्रेट निकोबार द्वीप के घने, पुराने वर्षावन के पेड़ों के बीच खड़े होकर गांधी ने कहा कि यह उनके जीवन में देखा गया ‘सबसे सुंदर जंगल’ है. हालांकि, ये सभी पेड़ काटे जाने वाले हैं, ‘यहां रहने वाले लोगों की पूरी तरह अनदेखी करते हुए और और भारत की पारिस्थितिकी को होने वाले नुकसान की परवाह किए बिना.’

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ये परियोजनाएं इसलिए आगे बढ़ा रही है ताकि गौतम अडानी, जो अडानी समूह के मालिक हैं, को फायदा हो सके.

गांधी ने कहा, ‘यह आश्चर्यजनक है कि इस जंगल के 160 वर्ग किलोमीटर हिस्से को काटा जाएगा ताकि एक व्यवसायी, अडानी, अपनी इच्छाएं पूरी कर सकें. यहां की लकड़ी की ही कीमत लाखों करोड़ रुपये है.’

उन्होंने आगे कहा, ‘यह शायद भारतीय संपत्ति – खासकर पर्यावरणीय संपत्ति – की अब तक हुई सबसे बड़ी लूट और सबसे बड़े घोटालों में से एक है.’

द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक, राहुल गांधी ने मंगलवार (28 अप्रैल) को ग्रेट निकोबार द्वीप का दौरा किया और कैंपबेल बे के राजीव नगर में स्थानीय निकोबारी समुदाय के नेताओं से मुलाकात की; इन नेताओं ने केंद्र सरकार की 92,000 करोड़ रुपये की बड़ी बुनियादी ढांचा परियोजना को लेकर अपनी चिंताओं और आशंकाओं से उन्हें अवगत कराया.

रिपोर्ट के अनुसार, यह दौरा उस समय हुआ जब कुछ सप्ताह पहले द्वीप का एक प्रतिनिधिमंडल इन मुद्दों को उठाने के लिए दिल्ली में उनसे मिला था.

29 अप्रैल को अपने सोशल मीडिया पोस्ट में गांधी ने कहा कि इस द्वीप पर रहने वाला हर व्यक्ति इस परियोजना के खिलाफ है, उनसे इस परियोजना के बारे में कोई राय नहीं ली गई है, और उन्हें यह भी नहीं पता कि उनकी ज़मीन के बदले उन्हें क्या मुआवज़ा मिलेगा.

उन्होंने एक्स पर लिखा, ‘सरकार इसे ‘परियोजना’ कहती है. लेकिन मैंने जो देखा, वह परियोजना नहीं है. यहां लाखों पेड़ हैं, जिन पर कुल्हाड़ी चलने का निशान लगा है. यह 160 वर्ग किलोमीटर वर्षावन है जिसे खत्म होने के लिए छोड़ दिया गया है. ये वे समुदाय हैं, जिनकी अनदेखी की गई है, जबकि उनके घर उनसे छीन लिए गए हैं. यह विकास नहीं है, बल्कि विकास की भाषा में छिपा हुआ विनाश है. इसलिए मैं साफ़ कहूंगा और बार-बार कहूंगा: ग्रेट निकोबार में जो हो रहा है, वह हमारे जीवनकाल में इस देश की प्राकृतिक और जनजातीय विरासत के खिलाफ सबसे बड़े घोटालों और सबसे गंभीर अपराधों में से एक है.’

उन्होंने कहा कि इस परियोजना को रोका जाना चाहिए – और यह रोकी जा सकती है, यदि भारत के लोग वह देखें जो उन्होंने देखा है.

गांधी के दौरे के दौरान पाबंदियां

27 अप्रैल को निकोबार टाइम्स ने रिपोर्ट किया कि चेन्नई फ्लाइट इंफॉर्मेशन रीजन द्वारा जारी ‘नोटिस टू एयरमेन’ (NOTAM) के कारण 28 अप्रैल से 1 मई तक या अगले आदेश तक निकोबार द्वीप समूह के लिए हेलीकॉप्टर सेवाएं निलंबित कर दी गई थीं. एनओटीएएम ऐसे समय-संवेदनशील अलर्ट होते हैं, जो पायलटों को अस्थायी खतरों, हवाई क्षेत्र बंद होने या प्रक्रियाओं में बदलाव के बारे में सूचित करने के लिए जारी किए जाते हैं.

रिपोर्ट के अनुसार, सेवाओं में इस अस्थायी रोक से द्वीपों के बीच संपर्क, खासकर हेलीकॉप्टर परिवहन प्रभावित हुआ, जो निवासियों, पर्यटकों और आगंतुकों के लिए आने-जाने का सबसे तेज़ साधन है.

गांधी के दौरे के ठीक उसी समय एनओटीएएम जारी किए जाने के समय को लेकर कांग्रेस ने आलोचना की.

गांधी ने 29 अप्रैल के अपने वीडियो में कहा, ‘अब मुझे समझ आया कि सरकार क्यों नहीं चाहती थी कि मैं यहां आऊं. और क्यों सरकार ने मुझे यहां पहुंचने से रोकने के लिए इतनी मशक्कत की. यह खुलेआम लूट है और मैं चाहता हूं कि ज़्यादा से ज़्यादा लोग यहां आकर इसे अपनी आखों से देखें.’

उन्होंने कहा कि वहां स्थानीय समुदाय, आदिवासी और रक्षा बलों से आए लोग रहते हैं, जिन्होंने उनसे संसद में यह मुद्दा उठाने के लिए कहा है.

गांधी ने अपने वीडियो पोस्ट में कहा, ‘ये लोग यह सब ‘छिपे हुए तरीके से, गुपचुप ढंग से’ कर रहे हैं, और यह बात पूरे देश को, खासकर युवाओं को बताई जानी चाहिए, क्योंकि यह आपका भविष्य है.’

‘पर्यावरणीय आपदा का नुस्खा’

कांग्रेस नेता जयराम रमेश, जो पूर्व केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भी रह चुके हैं, ने 27 अप्रैल को एक्स पर एक पोस्ट में टिप्पणी करते हुए कहा, ‘व्यावहारिकता को छोड़ भी दें, तो भी यह एक पारिस्थितिक आपदा का नुस्खा है.’

रमेश, पूर्व एडमिरल अरुण प्रकाश की उस टिप्पणी पर प्रतिक्रिया दे रहे थे, जिसमें उन्होंने कहा था कि प्रस्तावित ट्रांसशिपमेंट कंटेनर टर्मिनल की ‘भविष्य की व्यवहार्यता संदिग्ध’ लगती है, क्योंकि यह सिंगापुर, पोर्ट क्लांग और हंबनटोटा जैसे स्थापित ट्रांसशिपमेंट हब से समान दूरी पर स्थित है, और केरल का विझिंजम भी एक प्रमुख ट्रांस-हब के रूप में उभर रहा है.