हरियाणा: सोनम वांगचुक के समर्थन में छात्राओं के प्रदर्शन के बाद सरकारी स्कूल के प्रिंसिपल निलंबित

हरियाणा के महेंद्रगढ़ ज़िले में कनीना मंडी स्थित सरकारी स्कूल की पंद्रह छात्राओं ने बीते 17 जुलाई को सोनम वांगचुक के समर्थन में प्रदर्शन किया था. सोशल मीडिया पर प्रदर्शन के वीडियो और तस्वीरें सामने आने के बाद प्रिंसिपल के ख़िलाफ़ यह कार्रवाई की गई. इस बीच, कई सामाजिक संगठनों और स्थानीय लोगों ने प्रिंसिपल को बहाल करने की मांग की है.

(फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: हरियाणा के महेंद्रगढ़ जिले के एक सरकारी स्कूल की 15 छात्राओं द्वारा जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के समर्थन में प्रदर्शन किए जाने के बाद राज्य की भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार ने स्कूल के प्रिंसिपल को निलंबित कर दिया है.

द ट्रिब्यून की रिपोर्ट के अनुसार, सोशल मीडिया पर छात्राओं के प्रदर्शन की तस्वीरें और वीडियो सामने आने के बाद कनीना मंडी स्थित सरकारी सीनियर सेकेंडरी स्कूल के प्रिंसिपल नरेश कौशिक के खिलाफ यह कार्रवाई की गई.

यह घटना 17 जुलाई की है. मामले की सच्चाई का पता लगाने के लिए स्थानीय ब्लॉक शिक्षा अधिकारी (बीईओ) की अध्यक्षता में एक समिति बनाई गई थी. समिति की जांच के बाद मंगलवार (21 जुलाई) को हरियाणा सिविल सेवा (दंड एवं अपील) नियम, 2016 के नियम 5 के तहत नरेश कौशिक के निलंबन का आदेश जारी किया गया.

बीईओ ने बताया कि जांच के दौरान स्कूल के प्रिंसिपल, शिक्षकों, छात्राओं और उनके अभिभावकों के बयान दर्ज किए गए, जिसके बाद समिति ने अपनी रिपोर्ट सौंप दी थी.

कनीना के बीईओ सुरेश कुमार ने द ट्रिब्यून से कहा, ‘प्रदर्शन स्कूल परिसर के बाहर हुआ था, हालांकि छात्राएं स्कूल यूनिफॉर्म में थीं. स्कूल खत्म होने के बाद छात्र सुरक्षित घर पहुंचें, यह सुनिश्चित करना स्कूल स्टाफ और छात्रों के माता-पिता दोनों की ज़िम्मेदारी है.’

निलंबित प्रिंसिपल नरेश कौशिक का कहना है कि उन्हें इस प्रदर्शन की कोई जानकारी नहीं थी, क्योंकि यह स्कूल समय समाप्त होने के बाद हुआ था.

इस बीच, कनीना मंडी के कई सामाजिक संगठनों और स्थानीय निवासियों ने नरेश कौशिक की बहाली की मांग की है. उनका कहना है कि कौशिक अपनी ज़िम्मेदारियां ईमानदारी से निभा रहे थे और किसी भी आपत्तिजनक गतिविधि में शामिल नहीं थे.

बता दें कि बीते 7 जून को दिल्ली के जंतर-मंतर में कॉकरोच जनता पार्टी के विरोध प्रदर्शन में शामिल होने पर हरियाणा की शिक्षिका सुलेखा दलाल को निलंबित कर दिया गया था. हालांकि, इस कार्रवाई की सार्वजनिक रूप से आलोचना होने के बाद उनकी नौकरी बहाल कर दी गई थी.