नई दिल्ली: पुणे की विशेष सांसद/विधायक अदालत में चल रहे आपराधिक मानहानि मामले की सुनवाई के दौरान विनायक दामोदर सावरकर के रिश्तेदार सत्यकी सावरकर ने स्वीकार किया है कि सावरकर ने ब्रिटिश शासन के दौरान पांच बार दया याचिकाएं दाखिल की थीं. उन्होंने यह भी माना कि सावरकर ने गाय को कभी भगवान नहीं कहा, बल्कि एक उपयोगी पशु माना था.
यह मामला कांग्रेस नेता राहुल गांधी के खिलाफ दायर आपराधिक मानहानि शिकायत से जुड़ा है. शिकायत सत्यकी सावरकर ने की है. आरोप है कि राहुल गांधी ने लंदन में दिए गए एक भाषण में सावरकर को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी.
सावरकर और दया याचिकाएं
कानूनी समाचार वेबसाइट लाइव लॉ की रिपोर्ट के अनुसार, जिरह के दौरान सत्यकी सावरकर ने कहा कि यह सही है कि सावरकर ने सेल्युलर जेल में रहते हुए पांच बार दया याचिकाएं दी थीं. हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि उस समय कई अन्य राजनीतिक बंदियों ने भी ब्रिटिश सरकार को इसी तरह की याचिकाएं भेजी थीं.
उन्होंने यह भी कहा कि कुछ इतिहासकार सावरकर पर दो-राष्ट्र सिद्धांत का आरोप लगाते हैं, लेकिन उनके अनुसार मूल रूप से यह विचार सावरकर का नहीं था. सत्यकी ने दावा किया कि यह अवधारणा सबसे पहले सर सैयद अहमद ख़ान ने रखी थी, जबकि सावरकर ने केवल उस विवाद पर तथ्यात्मक टिप्पणी की थी.
गाय को लेकर सावरकर के विचारों पर पूछे गए सवाल के जवाब में सत्यकी सावरकर ने कहा कि सावरकर गाय को उपयोगी पशु मानते थे, न कि ईश्वर.
ब्रिटिश सेना में भर्ती की अपील पर भी टिप्पणी
राहुल गांधी की ओर से पेश वकील मिलिंद पवार ने जिरह के दौरान यह सवाल भी उठाया कि सावरकर ने द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान ब्रिटिश सेना में भर्ती का आह्वान किया था. इस पर सत्यकी सावरकर ने कहा कि इसे आरोप की तरह नहीं देखा जाना चाहिए.
उनका कहना था कि सावरकर का उद्देश्य भारतीय युवाओं को सैन्य प्रशिक्षण, हथियारों के इस्तेमाल और सेना में प्रशासनिक अनुभव दिलाना था, ताकि स्वतंत्रता के बाद भारत के पास प्रशिक्षित सैन्य बल मौजूद हो. उन्होंने दावा किया कि इसी दूरदृष्टि के कारण स्वतंत्रता के तुरंत बाद पाकिस्तान के हमले के समय भारत के पास प्रशिक्षित सैनिक उपलब्ध थे.
भगत सिंह से तुलना पर जवाब देने से इनकार
सुनवाई के दौरान सत्यकी सावरकर से यह भी पूछा गया कि सावरकर को अन्य क्रांतिकारियों, जैसे भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त की तुलना में अधिक महिमामंडित क्यों किया जाता है. इस पर उन्होंने सीधा जवाब देने से इनकार किया.
उन्होंने कहा कि हर बड़े व्यक्ति को लेकर मतभेद और बहस होती है, और राष्ट्रीय गौरव से जुड़े फैसले भारत सरकार का विषय हैं.
आरएसएस और भारत रत्न पर भी सवाल
जब उनसे पूछा गया कि क्या सावरकर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और समान विचारधारा वाली राजनीतिक पार्टियों के वैचारिक प्रेरणा स्रोत हैं, तो सत्यकी सावरकर ने कहा कि उन्हें इसकी जानकारी नहीं है.
सावरकर को भारत रत्न दिए जाने की मांग पर उन्होंने कहा कि यह फैसला भारत सरकार का अधिकार क्षेत्र है. इस दौरान उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि इंदिरा गांधी, राजीव गांधी और जवाहरलाल नेहरू को भारत रत्न दिया जा चुका है.
मामले की अगली सुनवाई 1 जून को होगी.
