नई दिल्ली: राष्ट्रीय अपराध रिकॉड ब्यूरो (एनसीआरबी) द्वारा बुधवार (6 मई) को जारी ‘क्राइम इन इंडिया 2024’ रिपोर्ट के डेटा से पता चलता है कि देश की राजधानी दिल्ली लगातार चौथे साल भी महिलाओं के लिए सबसे असुरक्षित महानगर होने का भयावह रिकॉर्ड बरकरार रखे हुए है. यहां बलात्कार के मामलों की संख्या सबसे अधिक है और महिलाओं के ख़िलाफ़ हिंसक अपराधों में भी इसकी हिस्सेदारी ज्यादा है.
हिंदुस्तान टाइम्स के मुताबिक, पिछले साल राष्ट्रीय राजधानी में बलात्कार के कुल 1058 मामले दर्ज किए गए – जो सूची में अगले दो शहरों जयपुर (497) और मुंबई (411) के आंकड़ों से दोगुने से भी अधिक हैं. फिर भी यह 2023 और 2022 की तुलना में दिल्ली के लिए मामूली गिरावट थी, जब क्रमशः 1,094 और 1,212 मामले दर्ज किए गए थे.
उल्लेखनीय है कि एनसीआरबी ‘मेगा सिटी’ को उन शहरों के रूप में परिभाषित करता है जिनकी आबादी बीस लाख से अधिक है.
शहरों के हिसाब से डेटा देखें, तो पता चला कि राजधानी में महिलाओं के ख़िलाफ़ कुल अपराध के 13,396 मामले दर्ज किए गए. हालांकि यह 2024 में सभी महानगरों में सबसे अधिक था, लेकिन यह 2023 में दर्ज 13,439, 2022 में 14,247 और 2021 में 14,277 मामलों से कम था.
2024 के कुल मामलों में अपहरण के 3,974, पति या रिश्तेदारों द्वारा क्रूरता के 4,647, पीछा करने के 178, छेड़छाड़ के 755, यौन उत्पीड़न के 316 मामले और बलात्कार के साथ हत्या के सात केस शामिल हैं.
बता दें कि 31,008 से अधिक मामलों की जांच के साथ दिल्ली में 19 प्रमुख शहरों में कुल मामलों का लगभग एक तिहाई हिस्सा है, और यहां अपराध दर प्रति 100,000 लोगों पर 176.8 है – जो कि देश में सबसे अधिक में से एक है.
इसके बाद मुंबई (6,358 मामले) और बेंगलुरु (4,748 मामले) का स्थान आता है. चेन्नई (1,093) और कोलकाता (1,958) जैसे शहरों में तुलनात्मक रूप से दिल्ली से कम मामले दर्ज किए गए हैं.
मालूम हो कि भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), 2023 के अनुसार, भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) में महिलाओं के विरुद्ध अपराधों को फिर से पुनर्गठित किया गया है. उदाहरण के लिए, आईपीसी की धारा 375-376 के अंतर्गत बलात्कार अब बीएनएस की धारा 63-70 के अंतर्गत आता है; यौन उत्पीड़न (आईपीसी 354) अब बीएनएस की धारा 74 है; यौन उत्पीड़न (आईपीसी 354ए) अब धारा 75 है; ताक-झांक (आईपीसी 354सी) अब धारा 77 है, और पीछा करना (आईपीसी 354डी) अब धारा 78 है. इसी प्रकार, पति या रिश्तेदारों द्वारा क्रूरता (आईपीसी 498ए) को बीएनएस की धारा 85 के अंतर्गत पुनर्वर्गीकृत किया गया है.
एनसीआरबी के आंकड़ों से यह और भी स्पष्ट होता है कि अपहरण और अगवा करना एक गंभीर समस्या बनी हुई है. दिल्ली में दर्ज 3,974 मामले मुंबई के 1,224 और बेंगलुरु के 802 मामलों से कहीं अधिक हैं, जो सूची में अगले दो स्थान पर हैं.
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि दिल्ली में इन मामलों की अधिक संख्या के पीछे बेहतर रिपोर्टिंग और जागरूकता एक महत्वपूर्ण कारण है.
एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने अखबार से कहा, ‘दिल्ली में सभी श्रेणियों में लगातार उच्च मामले दर्ज किए जा रहे हैं, जो बेहतर रिपोर्टिंग को दर्शाता है.’
एनसीआरबी के अनुसार, 2024 में दिल्ली में बच्चों के ख़िलाफ़ अपराध के 7,662 मामले दर्ज किए गए, जो 2023 में दर्ज 7,769 मामलों से मामूली रूप से कम हैं.
आंकड़ों के अनुसार, 2022 में राष्ट्रीय राजधानी में ऐसे 7,468 मामले दर्ज किए गए थे. हालांकि मामलों की संख्या में मामूली गिरावट आई है, फिर भी 2024 में दिल्ली में बच्चों के ख़िलाफ़ अपराध दर देश में सबसे अधिक रही, जहां प्रति 100,000 बच्चों पर 138.4 मामले दर्ज किए गए, जो राष्ट्रीय औसत 42.3 से काफी अधिक है.
एनसीआरबी के आंकड़ों से यह भी पता चलता है कि 2024 में दिल्ली में बच्चों के ख़िलाफ़ अपराध के मामलों में चार्जशीट दाखिल करने की दर 31.7% रही, जो राष्ट्रीय औसत 61.4% से काफी कम है.
आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली में 2024 की शुरुआत में 17,612 लंबित मामले थे और 2024 में 13,396 नए मामले जुड़ गए. आंकड़ों से यह भी पता चला कि सभी मामलों की जांच शुरू कर दी गई है.
महिलाओं के ख़िलाफ़ अपराधों की जांच में हुई प्रगति की बात करें तो, दिल्ली में आरोपपत्र दाखिल करने की दर 73.6% है, जो कोलकाता और चेन्नई जैसे शहरों की तुलना में कम है, जहां यह दर 90% से अधिक है.
एनसीआरबी के आंकड़ों के मुताबिक, 2024 में भी दिल्ली महानगरों में किशोर अपराध के मामले में शीर्ष पर रहा, जहां कानून से संघर्ष कर रहे बच्चों (सीसीएल) के ख़िलाफ़ 2,306 मामले दर्ज किए गए.
राजधानी में अपराध दर भी सबसे अधिक रही, जहां प्रति 100,000 नाबालिगों में से लगभग 42 किशोर कथित तौर पर अपराधों में शामिल थे. ये आंकड़े लगातार उच्च बने हुए हैं – 2022 में 2,336 मामले और 2023 में 2,278 मामले दर्ज किए गए – जो समग्र रुझानों में मामूली बदलाव का संकेत देते हैं.
नाबालिगों से जुड़े मामलों में महिलाओं और बच्चों से जुड़े अपराध भी एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं. दिल्ली में नाबालिगों द्वारा आरोपित बलात्कार के 58 मामले, महिलाओं पर हमले के 48 मामले, निर्वस्त्र करने के इरादे से हमले के सात मामले और महिलाओं की गरिमा को ठेस पहुंचाने से संबंधित नौ मामले दर्ज किए गए.
कुल मिलाकर, ऐसे 134 मामले दर्ज किए गए, साथ ही पॉक्सो अधिनियम के तहत 132 मामले भी दर्ज किए गए.
2024 के दौरान गिरफ्तार किए गए 3,270 नाबालिगों में से अधिकांश की शिक्षा का स्तर कम था – 1,672 ने केवल प्राथमिक या मैट्रिक स्तर तक पढ़ाई की थी, जबकि 428 निरक्षर थे.
गौरतलब है कि एनसीआरबी की ताज़ा रिपोर्ट के मुताबिक, देशभर में महिलाओं के ख़िलाफ़ अपराध में 1.5% की गिरावट देखी गई है. 2024 में ऐसे 4.41 लाख केस दर्ज हुए, जबकि 2023 में यह संख्या 4.48 लाख थी.
इसके अलावा महिलाओं के ख़िलाफ़ अपराध दर भी 2023 में 66.2 से घटकर 2024 में 64.6 हो गई है. अपराध दर प्रति एक लाख महिलाओं पर महिलाओं के ख़िलाफ़ अपराधों की संख्या को दर्शाती है.
