दिल्ली हाईकोर्ट ने यूट्यूब चैनल 4PM न्यूज़ को बहाल करने का निर्देश दिया, ‘आपत्तिजनक’ वीडियो ब्लॉक रहेंगे

दिल्ली हाईकोर्ट ने 4PM न्यूज़ नेटवर्क और इसके संपादक संजय शर्मा द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए उनके यूट्यूब चैनल को बहाल करने का आदेश दिया है. यह चैनल बीते 12 मार्च से देश में अनुपलब्ध था. केंद्र सरकार ने इसे प्रतिबंधित करने के पीछे राष्ट्रीय सुरक्षा, संप्रभुता और सार्वजनिक व्यवस्था से जुड़ी चिंताओं का हवाला दिया था.

(फोटो साभार: यूट्यूब)

नई दिल्ली: दिल्ली हाईकोर्ट ने यूट्यूब चैनल 4PM न्यूज़ को बहाल करने का आदेश दिया है. इस चैनल को केंद्र सरकार के निर्देशों के बाद भारत में प्रतिबंधित कर दिया गया था, जिसमें राष्ट्रीय सुरक्षा, संप्रभुता और सार्वजनिक व्यवस्था से जुड़ी चिंताओं का हवाला दिया गया था.

लाइव लॉ की ख़बर के मुताबिक, यह बहाली इस शर्त पर की गई कि चैनल के कथित तौर पर आपत्तिजनक 26 वीडियो को अस्थायी रूप से निलंबित रखा जाएगा.

उल्लेखनीय है कि जस्टिस पुरुशेंद्र कुमार कौरव ने यह आदेश चैनल के संपादक संजय शर्मा और 4PM न्यूज़ नेटवर्क द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया. इस याचिका में यूट्यूब चैनल और उसके सभी कंटेंट को बहाल करने की मांग की गई थी.

याचिका के अनुसार, 12 मार्च को यूट्यूब ने याचिकाकर्ताओं को सूचित किया कि उसे इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय से सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यवर्ती दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021 के नियम 16(2) के तहत भारत में चैनल को ब्लॉक करने के निर्देश मिले हैं.

याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अखिल सिब्बल ने तर्क दिया कि उन्हें न तो चैनल प्रतिबंधित करने से संबंधित आदेश दिया गया और न ही उसके कारणों के बारे में बताया गया. इस वजह से वे अधिकारियों के सामने वह अपना पक्ष प्रभावी ढंग से नहीं रख पाए.

याचिका का विरोध करते हुए एडिशनल सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने कहा कि अंतर-विभागीय समिति (आईडीसी) ने 24 मार्च, 2026 को चैनल पर मौजूद कंंटेंट की जांच करने के बाद आदेश पारित किया था. समिति ने पाया था कि इस सामग्री को जनता के लिए उपलब्ध रहने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए.

केंद्र सरकार ने तर्क दिया कि यह सामग्री भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा, संप्रभुता और सार्वजनिक व्यवस्था के लिए हानिकारक है. हालांकि कोर्ट ने यह बात पर प्रकाश डाला कि चैनल पर लगभग 50,000 वीडियो अपलोड किए गए, लेकिन उनमें से केवल 26 वीडियो को ही कथित तौर पर आपत्तिजनक बताया गया है.

कोर्ट ने उन पिछले मामलों का भी हवाला दिया, जिनमें समान स्थिति वाले याचिकाकर्ताओं को आईडीसी के समक्ष कार्यवाही पूरी होने तक अपने चैनल चलाना जारी रखने की अनुमति दी गई.

दोनों पक्षकारों के हित में संतुलन बनाते हुए कोर्ट ने निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता आईडीसी के सामने पेश हों. आईडीसी कथित तौर पर आपत्तिजनक सामग्री की पहचान करेगी और याचिकाकर्ताओं को उस सामग्री के बारे में स्पष्टीकरण देने या उसे सही ठहराने का पर्याप्त अवसर दिया जाएगा.

कोर्ट ने आगे आदेश दिया कि  यूट्यूब कथित तौर पर आपत्तिजनक वीडियो को अस्थायी रूप से ब्लॉक कर दे और उसके बाद चैनल को बहाल कर दे.

कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि आईडीसी द्वारा सूचना और प्रसारण मंत्रालय के सचिव को की गई कोई भी सिफारिश याचिकाकर्ताओं को भी उपलब्ध कराई जाए.

इसमें यह स्पष्ट किया गया कि मंत्रालय चैनल पर भविष्य में अपलोड की जाने वाली सामग्री की निगरानी करने और यदि कोई आपत्तिजनक सामग्री पोस्ट की जाती है तो कानून के अनुसार कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र रहेगा.

हाईकोर्ट के आदेश पर प्रतिक्रिया देते हुए चैनल के संपादक संजय शर्मा ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर कहा, ‘मोदी सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा का डर दिखाकर 85 लाख सब्सक्राइबर्स वाले 4PM चैनल को बंद कर दिया. लेकिन जब मामला दिल्ली हाईकोर्ट पहुंचा तो सच अदालत के रिकॉर्ड में खुद सामने आ गया.’

उन्होंने आगे बताया कि आज देश ऐसे हालत हैं कि सरकार से सवाल पूछने और सत्ता की आलोचना करने पर पूरा चैनल बंद कर दिया जाता है. इतिहास गवाह है, सत्ता हमेशा सवालों से डरती है. और जब सरकार मीडिया से डरने लगे, समझ लीजिए सच अभी ज़िंदा है.

गौरतलब है कि यूट्यूब चैनल ‘4PM न्यूज़’ 12 मार्च से देश में अनुपलब्ध था. इस संबंध में संपादक संजय शर्मा ने बताया था कि यह चैनल सिर्फ देश में प्रतिबंधित किया गया है, विदेशों में इसे अभी भी देखा जा सकता है.

संजय शर्मा ने द वायर से यह भी कहा था कि यह पहली बार नहीं है, जब उनके चैनल को सरकार द्वारा इस तरह की कार्रवाई का सामना करना पड़ रहा है. इससे पहले भी पिछले साल पहलगाम आतंकी हमले के समय चैनल बंद करवाया गया था और बाद में जब मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, तो सरकार ने चुपचाप अपना आदेश वापस ले लिया और चैनल को बहाल कर दिया गया था.

गौरतलब है कि सरकार द्वारा बीते कुछ समय में राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देते हुए अनेकों चैनल और वेबसाइट प्रतिबंधित की गई हैं. पिछले साल मई में भारत और पाकिस्तान के बीच सैन्य टकराव के दौरान रफाल विमानों को कथित रूप से गिराए जाने से जुड़ी एक सीएनएन रिपोर्ट प्रकाशित करने के बाद द वायर की वेबसाइट को 12 से 15 घंटे से अधिक समय तक ब्लॉक कर दिया गया था.

इस साल फरवरी में द वायर का इंस्टाग्राम अकाउंट मोदी सरकार पर व्यंग्यात्मक कार्टून को लेकर भारत में 9 फरवरी की शाम क़रीब दो घंटे तक ब्लॉक रहा. इस संबंध में मंत्रालय ने ज़िम्मेदारी लेने से इनकार किया, जबकि मेटा द्वारा ‘ग़लती’ की बात सामने आई. बिना पूर्व सूचना की गई इस कार्रवाई ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और डिजिटल सेंसरशिप पर सवाल खड़े किए.