नई दिल्ली: राजस्थान सरकार द्वारा संचालित कोटा मेडिकल कॉलेज से संबद्ध जेके लोन अस्पताल में सीज़ेरियन प्रसव के बाद आई जटिलताओं के चलते एक और महिला की मौत हो गई. इसके साथ ही पिछले एक सप्ताह में जिले में ऐसी मौतों की संख्या बढ़कर चार हो गई है.
हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, मृतक महिला की पहचान श्रीराम नगर की रहने वाली पिंकी महावर (30) के रूप में हुई है. पिछले 24 घंटों में जेके लोन अस्पताल में सीज़ेरियन ऑपरेशन के बाद मौत होने वाली वह दूसरी महिला हैं. इससे पहले की दो घटनाएं कोटा मेडिकल कॉलेज से संबद्ध न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल से सामने आई थीं.
न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल के प्रिंसिपल डॉक्टर नीलेश जैन ने कहा, ‘एक जैसे कारणों से होने वाली यह चौथी मौत है. पहली दो मौतें हमारे मेडिकल कॉलेज के अस्पताल में हुई थीं, जबकि तीसरी और चौथी मौत शनिवार और रविवार रात को जेके लोन अस्पताल में हुई.’
30 वर्षीय पिंकी महावर को 7 मई को जेके लोन अस्पताल में भर्ती कराया गया था. अधिकारियों के अनुसार, उसी रात उनका सीज़ेरियन ऑपरेशन किया गया और उन्होंने एक बच्ची को जन्म दिया. हालांकि, अगले दिन उनकी हालत कथित रूप से बिगड़ गई, जिसके बाद उनका एक और ऑपरेशन किया गया और उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया.
उनके पति चंद्र प्रकाश, जो दिहाड़ी मजदूर हैं, ने इलाज में लापरवाही का आरोप लगाया. उनका कहना है कि हालत गंभीर होने तक उनकी पत्नी को किसी बड़े मेडिकल केंद्र में रेफर नहीं किया गया. उन्होंने दावा किया कि 10 मई को रात करीब साढ़े आठ बजे जेके लोन अस्पताल का स्टाफ उन्हें न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल के सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक में ले गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई.
ख़बरों के मुताबिक, परिवार का गुस्सा तब और बढ़ गया, जब मेडिकल स्टाफ़ ने लापरवाही दिखाते हुए पिंकी के गर्भाशय को सर्जरी के बाद एक डिब्बे में बंद करके उसके बिस्तर के पास रखी मेज़ पर ही छोड़ दिया. स्टाफ़ ने कहा था कि इसे जांच के लिए भेजा जाएगा. प्रकाश ने बताया, ‘लेकिन, वह डिब्बा वहीं का वहीं पड़ा रहा.’
इससे पहले 9 और 10 मई की दरम्यानी रात को 22 वर्षीय प्रिया महावर की जेके लोन अस्पताल में सीज़ेरियन ऑपरेशन के बाद गुर्दे में संक्रमण होने से मौत हो गई थी. उनसे पहले 26 वर्षीय पायल और 19 वर्षीय ज्योति नायक की क्रमशः 5 मई और 7 मई को न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल में मौत हुई थी.
डॉक्टर जैन ने कहा, ‘सभी महिलाओं में ब्लड प्रेशर कम होने और किडनी में इन्फ़ेक्शन जैसे एक जैसे लक्षण थे, जिनकी वजह से उनकी मौत हुई.’
उन्होंने बताया कि जयपुर के सवाई मानसिंह अस्पताल की एक टीम दोनों अस्पतालों में हुई मौतों की जांच कर रही है. उन्होंने कहा, ‘टीम ने मूत्र और रक्त के नमूने एकत्र कर प्रयोगशाला भेजे हैं, ताकि वास्तविक कारण का पता लगाया जा सके. यह बेहद असामान्य है कि दो अलग-अलग अस्पतालों में सीज़ेरियन ऑपरेशन के बाद सभी महिलाओं में एक जैसी समस्याएं हुईं.’
उन्होंने यह भी बताया कि वर्तमान में न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल में प्रसव के बाद इलाज करा रही छह अन्य महिलाओं की हालत गंभीर बनी हुई है.
महिला की मौत के बाद उसके परिजनों, स्थानीय लोगों और कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन किया. कोटा कांग्रेस अध्यक्ष गौतम ने कहा, ‘यह अस्पतालों की घोर लापरवाही है. यह सरकारी स्वास्थ्य सुविधाओं की बदहाल स्थिति का परिणाम है. हमने परिजनों से बात की. उनका कहना है कि डॉक्टरों ने उसकी हालत को नजरअंदाज किया.’
उन्होंने कहा, ‘जब तक जिम्मेदार डॉक्टरों को हटाया नहीं जाता, तब तक शव का पोस्टमार्टम नहीं कराया जाएगा.’
इधर, राज्य की स्वास्थ्य सचिव गायत्री राठौड़ भी सोमवार शाम स्थिति का जायजा लेने कोटा पहुंचीं.
बता दें कि 2020 में कोटा स्थित जेके लोन अस्पताल नवजात शिशुओं की मौत को लेकर सुर्खियों में रहा था, जहां एक महीने में 100 से अधिक शिशुओं की मौत हो गई थी.
