वीबी-जी राम जी क़ानून के विरोध में श्रमिकों का प्रदर्शन, नई रोज़गार योजना वापस लेने की मांग

संयुक्त कृषि एवं ग्रामीण श्रमिक यूनियन मंच और नरेगा संघर्ष मोर्चा के बैनर तले श्रमिकों ने देश के कई हिस्सों में वीबी-जी राम जी क़ानून के ख़िलाफ़ गांवों में रैलियां निकालीं और जनसभाएं आयोजित कीं. संगठनों ने इस क़ानून को वापस लेने और मज़बूत मनरेगा व्यवस्था को फिर से लागू करने की मांग की.

(फोटो साभार: फेसबुक/NREGA Sangharsh Morcha)

नई दिल्ली: कृषि और ग्रामीण श्रमिकों ने शुक्रवार (15 मई) को देश के कई हिस्सों में वीबी-जी राम जी क़ानून के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया. इस कानून के तहत रोजगार योजना पर होने वाले खर्च का 40 प्रतिशत वहन राज्यों को करना होगा.

‘विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण)’ यानी वीबी-जी राम जी कानून मौजूदा महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) की जगह लेगा. वर्तमान व्यवस्था में राज्यों को कुल खर्च का 10 प्रतिशत से भी कम वहन करना पड़ता है, जबकि 90 प्रतिशत खर्च केंद्र सरकार उठाती है.

द टेलीग्राफ की रिपोर्ट के मुताबिक, संयुक्त कृषि एवं ग्रामीण श्रमिक यूनियन मंच और नरेगा संघर्ष मोर्चा के बैनर तले श्रमिकों ने पश्चिम बंगाल, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, तमिलनाडु, कर्नाटक, राजस्थान, हरियाणा, पंजाब और उत्तर प्रदेश के गांवों में रैलियां निकालीं और जनसभाएं आयोजित कीं.

अखिल भारतीय कृषि मजदूर यूनियन ने एक बयान में कहा कि यह विरोध 2014 से भारतीय जनता पार्टी सरकार द्वारा मनरेगा के ‘कुप्रबंधन’ के खिलाफ वर्षों से बढ़ते आक्रोश का परिणाम है.

बयान में कहा गया, ‘वर्षों तक मनरेगा श्रमिकों की मजदूरी स्थिर बनी रही. हर साल कार्य-दिवसों की संख्या घटती गई. भाजपा के सत्ता में आने के बाद से मनरेगा के लिए आवंटित धन बेहद कम रहा और बकाया भुगतानों के बढ़ते बोझ को निपटाने में भी नाकाम साबित हुआ.’

यूनियन ने आधार-आधारित भुगतान प्रणाली, चेहरे की पहचान (facial recognition), जियो-टैगिंग और ऑनलाइन उपस्थिति प्रणाली जैसी ‘बहिष्कारी तकनीकों’ की शुरुआत की भी आलोचना की. बयान के अनुसार, इन तकनीकों के कारण कुछ ही वर्षों में करोड़ों श्रमिकों के नाम सूची से हटा दिए गए.

बयान में कहा गया, ‘राज्यों पर बढ़ते आर्थिक बोझ के कारण वीबी-जी राम जी कानून को राज्यों में सही तरीके से लागू नहीं किया जा सकेगा.’ संगठन ने इस कानून को वापस लेने और मजबूत मनरेगा व्यवस्था को फिर से लागू करने की मांग की.

1 जुलाई से वीबी-जी राम जी अधिनियम लागू होने के साथ ही मनरेगा समाप्त हो जाएगा. सरकार ने आश्वासन दिया है कि यह बदलाव बिना किसी बाधा के और सुचारु रूप से किया जाएगा.

सरकारी अधिसूचना में कहा गया, ‘30 जून तक मनरेगा के अंतर्गत चल रहे कार्य सुरक्षित रखे जाएंगे और उन्हें बिना किसी रुकावट के नई व्यवस्था में स्थानांतरित किया जाएगा.’