नई दिल्ली: दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार (18 मई) को पहलवान विनेश फोगाट को 30 और 31 मई को होने वाले 2026 एशियाई खेलों के चयन ट्रायल में हिस्सा लेने की अनुमति देने से इनकार कर दिया है.
हिंदुस्तान टाइम्स की ख़बर के मुताबिक, जस्टिस पुरुषेंद्र कुमार कौरव की अध्यक्षता वाली एक बेंच ने कहा कि फोगाट को घरेलू प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने के लिए पहले ही अयोग्य घोषित किया जा चुका है. इसलिए, भारतीय कुश्ती महासंघ (डब्ल्यूएफआई) की एशियाई खेलों की चयन नीति और 9 मई के उस नोटिस को चुनौती देने वाली उनकी याचिका पर कोई अंतरिम राहत नहीं दी जा सकती, जिसके तहत फोगाट को 26 जून तक नेशनल ओपन रैंकिंग टूर्नामेंट सहित सभी घरेलू प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने से रोक दिया गया था.
उल्लेखनीय है कि पहले तीन बार की ओलंपियन पहलवान विनेश फोगाट को भारतीय कुश्ती महासंघ ने नए सर्कुलर के तहत मई के अंत में होने वाले एशियाई खेलों के चयन ट्रायल के लिए अयोग्य घोषित कर दिया था. महासंघ की ओर से कहा गया कि इसमें केवल अहमदाबाद में 2025 सीनियर नेशनल चैंपियनशिप, गाजियाबाद में आयोजित 2026 सीनियर फेडरेशन कप और भिलाई में 2026 राष्ट्रीय अंडर-20 के पदक विजेता ही भाग लेने के लिए पात्र होंगे.
इस सर्कुलर में यह भी कहा गया था कि खिलाड़ियों की पिछली परफॉर्मेंस या नियमों में ढील पर विचार नहीं किया जाएगा.
मालूम हो कि 2018 एशियाई खेलों की चैंपियन विनेश फोगाट, जिन्होंने पेरिस ओलंपिक के फाइनल में 100 ग्राम अधिक वजन होने के कारण अयोग्य घोषित किए जाने के बाद अगस्त 2024 में संन्यास की घोषणा की थी, ने पिछले साल दिसंबर में अपना फैसला बदलते हुए वापसी का ऐलान किया था, लेकिन अभी तक उन्होंने किसी भी प्रतिस्पर्धी प्रतियोगिता में भाग नहीं लिया है.
6 मई के सर्कुलर के बाद भारतीय कुश्ती महासंघ 9 मई को पहलवान विनेश फोगाट को कारण बताओ नोटिस जारी किया था. इस नोटिस में डब्ल्यूएफआई ने विनेश पर अनुशासनहीनता, डोपिंग रोधी नियमों के उल्लंघन के आरोप लगाए थे. साथ ही संघ ने विनेश को 26 जून 2026 तक घरेलू प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने के लिए अयोग्य घोषित किया था.
इसमें कहा गया था कि उन्होंने संन्यास से वापसी की सूचना देने के बाद विश्व डोपिंग संस्था वाडा के एंटी-डोपिंग नियमों के तहत अनिवार्य छह महीने की नोटिस अवधि पूरी नहीं की है. वाडा के डोपिंग विरोधी नियमों के तहत संन्यास से वापसी कर रहे किसी भी खिलाड़ी के लिए पंजीकृत परीक्षण पूल का हिस्सा बनने के लिए यह अवधि अनिवार्य है.
विनेश की याचिका पर सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि वह इस बात की सराहना करती है कि फोगाट मातृत्व अवकाश पर थीं, लेकिन राष्ट्रीय हित को भी ध्यान में रखना ज़रूरी है. इसलिए कुश्ती महासंघ को अपना जवाब दाखिल करने दीजिए.
कोर्ट ने आगे कहा, ‘अंतरिम राहत के लिए अब शायद ही कोई समय बचा है. उन्हें पहले ही अयोग्य घोषित किया जा चुका है; ऐसे में अदालत दूसरे पक्ष को सुने बिना आपको वह राहत कैसे दे सकते हैं? बेवजह आपको भाग लेने की अनुमति दे देने और फिर यह कहने कि यह सब व्यर्थ था, का कोई मतलब नहीं है.’
विनेश फोगाट की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता राजशेखर राव ने कोर्ट में कहा कि इस मामले में जो दिख रहा है, उससे कहीं ज्यादा बात है. उन्होंने विनेश को फिलहाल ट्रायल में हिस्सा लेने की अनुमति दिए जाने की मांग की. इस पर बेंच ने कहा कि उसे कुश्ती महासंघ की नीति की समीक्षा करनी होगी. इसमें आपसी हित जुड़े हुए हैं.
विनेश की दलील थी कि उन्हें अप्रैल में 10 और 11 मई को होने वाले गोंडा टूर्नामेंट के लिए रजिस्टर करने की अनुमति दी गई थी, लेकिन 9 मई को—इवेंट से ठीक एक दिन पहले—उन्हें एक नोटिस थमा दिया गया, और बाद में जब वे वेन्यू पर पहुंचीं, तो उन्हें हिस्सा लेने से रोक दिया गया.
राव ने तर्क दिया कि इस साल फोगाट के लिए अपनी काबिलियत साबित करने का यह एकमात्र मौका था. उन्होंने यह भी कहा कि योग्यता की समय-सीमा उनके घोषित अवकाश, ट्रेनिंग पर लौटने की अवधि, प्रेग्नेंसी से जुड़े ब्रेक और बच्चे के जन्म के बाद ठीक होने के समय से मेल खाती थी.
हालांकि, कोर्ट ने फोगाट को 9 मई के नोटिस पर एक विस्तृत जवाब दाखिल करने की अनुमति दी और डब्ल्यूएफआई से कहा कि वह 6 जुलाई को कोर्ट में याचिका पर अगली सुनवाई से पहले इस पर अंतिम फैसला ले.
कोर्ट ने केंद्र सरकार, डब्ल्यूएफआई और भारतीय ओलंपिक संघ को भी नोटिस जारी कर फोगाट की याचिका पर जवाब मांगा है.
गौरतलब है कि यह मामला डब्ल्यूएफआई और विनेश फोगाट के बीच लंबे समय से चले आ रहे तनाव की नई कड़ी है. हाल ही में विनेश फोगाट ने भारतीय कुश्ती महासंघ के पूर्व प्रमुख बृजभूषण शरण सिंह पर यौन उत्पीड़न के आरोपों से जुड़े मामले में चौंकाने वाला खुलासा करते हुए बताया था कि सिंह के ख़िलाफ़ यौन उत्पीड़न का आरोप लगाने वाली छह पहलवानों में वह एक हैं. इसके साथ ही उन्होंने भारतीय कुश्ती महासंघ द्वारा सिंह के गृह क्षेत्र में टूर्नामेंट आयोजित करवाए जाने को लेकर विरोध जताया था.
