भारत सरकार ने 30% तक इथेनॉल मिश्रण वाले पेट्रोल के नए मानक अधिसूचित किए

एक नई अधिसूचना में भारतीय मानक ब्यूरो ने संकेत दिया है कि सरकार ने ई20 कार्यक्रम से आगे बढ़ते हुए ई22, ई25, ई27 और ई30 ईंधन मिश्रणों के लिए मानक अधिसूचित किए हैं, जिनका अर्थ क्रमशः 22%, 25%, 27% और 30% इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल है. पिछले कुछ वर्षों से सरकार ई20 ईंधन को व्यापक रूप से बढ़ावा दे रही है, हालांकि इसे लेकर ईंधन गुणवत्ता, पुराने वाहनों के इंजनों पर असर आदि संबंधी चिंताएं भी सामने आई हैं.

(प्रतीकात्मक फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने 30% तक इथेनॉल मिश्रण वाले पेट्रोल के लिए नए मानक अधिसूचित किए हैं. यह कदम अमेरिका-इज़रायल और ईरान के बीच जारी युद्ध के कारण पश्चिम एशिया में उत्पन्न ऊर्जा संकट की पृष्ठभूमि में उठाया गया है.

मिंट की रिपोर्ट के अनुसार, 18 मई की नई अधिसूचना में भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) ने संकेत दिया है कि सरकार ई20 कार्यक्रम से आगे बढ़ने की तैयारी कर रही है. ई20 के तहत पेट्रोल में 27% तक इथेनॉल मिश्रण की अनुमति है. भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने भारत की ऊर्जा सुरक्षा संबंधी चिंताओं को बढ़ा दिया है.

बीआईएस ने ई22, ई25, ई27 और ई30 ईंधन मिश्रणों के लिए मानक अधिसूचित किए हैं. इनका अर्थ क्रमशः 22%, 25%, 27% और 30% इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल है. हालांकि, यह अधिसूचना केवल ऐसे मिश्रणों को बाजार में लाने के लिए आवश्यक तकनीकी मानकों को निर्धारित करती है. इसका मतलब यह नहीं है कि तुरंत पूरे देश में ई30 ईंधन की बिक्री अनिवार्य कर दी गई है.

हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य, जिससे दुनिया की लगभग 20% तेल आपूर्ति गुजरती है, के बंद होने की आशंका ने सरकार को वैकल्पिक उपायों पर निर्भर होने के लिए प्रेरित किया है. इनमें इथेनॉल उत्पादन क्षमता का अधिक उपयोग भी शामिल है.

पिछले कुछ वर्षों से सरकार ई20 ईंधन को व्यापक रूप से बढ़ावा दे रही है, हालांकि इसको लेकर चिंताएं भी सामने आई हैं कि इससे ईंधन गुणवत्ता प्रभावित होती है और पुराने वाहनों के इंजनों पर असर पड़ता है, जिससे मालिकों की रखरखाव लागत बढ़ गई है.

हालांकि, इस कदम का बचाव करते हुए केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने पिछले साल कहा था कि जब से ई20 एक आधार ईंधन बना है, तब से इंजन फेल होने या खराब होने का एक भी मामला सामने नहीं आया है. ब्राज़ील का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा था कि वह देश बिना किसी समस्या के वर्षों से ई27 पर चल रहा है.

इस बीच, उद्योग संगठनों और जैव-ईंधन निर्माताओं ने ई22 और उससे अधिक मिश्रण वाले ईंधनों की ओर बढ़ने की मांग तेज कर दी है. उनका कहना है कि देश में इथेनॉल की पर्याप्त उपलब्धता है और इससे तेल आयात पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी.

मारुति सुज़ुकी इंडिया लिमिटेड के चेयरमैन आरसी भार्गव ने अख़बार से बातचीत में कहा, ‘अगर सरकार इसे लागू करने का फैसला करती है और यह सभी के लिए एक मानक आवश्यकता बन जाती है, तो हम इसका पालन करेंगे. हमारे पास इसका पालन करने की क्षमता है.’

मिंट की एक अन्य रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय वाहन निर्माताओं ने अब सरकार से ई85 और ई100 जैसे ज़्यादा इथेनॉल वाले ईंधनों की कीमतें कम करने का आग्रह किया है, ताकि ‘फ्लेक्स-फ्यूल’ वाहनों को अपनाने वाले ग्राहकों की संख्या बढ़ सके. उनका कहना है कि जब तक कीमतें काफी कम नहीं होंगी, तब तक ग्राहक इन्हें शायद ही अपनाएंगे.

ऊर्जा सुरक्षा संबंधी बढ़ती चिंताओं के बीच उद्योग जगत कर-राहत की भी मांग कर रहा है.

बिज़नेस स्टैंडर्ड की रिपोर्ट के अनुसार, कुछ विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि ई20 से आगे बढ़ने के लिए ईंधन उपलब्धता, वाहन अनुकूलता मानकों और वितरण अवसंरचना के बीच तालमेल जरूरी होगा, खासकर अलग-अलग जलवायु और परिचालन स्थितियों वाले क्षेत्रों में.

इससे पहले विशेषज्ञ यह भी कह चुके हैं कि यदि भारत पेट्रोल में इथेनॉल मिश्रण को ई20 से अधिक स्तर तक बढ़ाना चाहता है, तो देश को चीनी निर्यात पर रोक लगानी पड़ सकती है.