लस्ट फॉर लाइफ: रंगों में घुलते एक कलाकार की त्रासदी और विन्सेंट वॉन गॉग का अंतहीन अकेलापन

पुस्तक समीक्षा: अशोक पांडे द्वारा अनूदित इरविंग स्टोन की ‘लस्ट फॉर लाइफ’ महज विन्सेंट वॉन गॉग की जीवनी नहीं, बल्कि एक कलाकार के भीतर टूटते, जलते और सृजन में ख़ुद को खपा देने वाले मनुष्य की कथा है. यह किताब बताती है कि महान कला के पीछे कई बार गहरा अकेलापन, अस्वीकार का दर्द और आत्मक्षय की लंबी यातना छिपी होती है.

(आवरण साभार: संवाद प्रकाशन/पृष्ठभूमि में गॉग की 'स्टारी नाईट'/साभार: गूगल आर्ट्स)

इस धरती के कलाकार वही लोग होते हैं, जिन्हें ईश्वर या शैतान तब तक नहीं मार सकता जब तक वे उन सारी बातों को कह नहीं देते, जो वे कहना चाहते हैं- ये कथन ‘लस्ट फॉर लाइफ ‘ से ही है मगर संयोग से इसका निर्वहन जो किसी चित्रकार को विन्सेंट वॉन गॉग बना देता है, वह कितना मारक होता है, यह प्रसिद्ध चित्रकार विन्सेंट वॉन गॉग पर ‘इरविंग स्टोन’ द्वारा लिखे इस जीवनीपरक उपन्यास को बरसों पहले पढ़कर जाना गया होगा अथवा बरसों बाद पढ़कर जाना जा सकता है.

हिंदी में इस कालजयी पुस्तक का बाकमाल अनुवाद जाने-माने अनुवादक अशोक पांडे ने किया था. मुझे लगता है कि कम-से-कम हर चित्रकार को इस भय के बावजूद कि कहीं वॉन गॉग का जीवन उन्हें भय अथवा गहरे अवसाद में न धकेल दे या उन्हें कला और जीवन के प्रति निराश और उदासीन न बना दे, इसे जरूर पढ़ना चाहिए.

इस सच को जानना चाहिए कि जीते जी वॉन गॉग, वॉन गॉग नहीं होता उसका वॉन होना उसकी मृत्यु के बाद संभव होता है. ऐसा महान चित्रकार जिसे जीवित रहते मात्र केवल एक चित्र अच्छे दर पर बिकता है. इस जीवनी परक उपन्यास की प्रभावोत्पादकता इतनी है कि कोई पाठक या चित्रकार इसे पढ़ने के बाद इसकी स्मृति और वॉन गॉग होने की प्रक्रिया से पीछा नहीं छुड़ा सकता. कैनवस के सामने खड़े होकर वह रंग में लिथड़ी जब अपनी कूची उठायेगा, उसे द बोरीनाज से आर्वेस तक चित्र बनाता और चित्रों के लिए खुद को मिटाता विंसेंट वॉन गॉग याद आयेगा.

मगर पाठक के सामने इसके दीर्घ और कंटीले रास्ते में एक बहाव भरी उल्लेखनीयता और आती है.  वह यह कि क्या उस पाठक-चित्रकार के पास वॉन गॉग जैसी आत्मघाती संवेदनशीलता है जिसके चलते द बोरीनाज में वह कोयला खदान मजदूरों के लिए अंतिम रूप से स्वयं को लगभग मिटा बैठता है. दरअसल बोरीनाज वॉन गॉग के लिए उसकी कब्रगाह होते-होते रह जाती है. पर उस कब्रगाह में दफ़न होता है ईश्वर की उपस्थिति पर उसका विश्वास. वह वहां गया तो पादरी बनने ही था, और इस विश्वास के साथ कि ईश्वर और उसके उपदेशों की इन कोयला खान मजदूरों को कितनी आवश्यकता है. पर जब वहां पहुंच कर उसका सामना बीमारियों, मौसम की क्रूरताओं, जीवन बचाने के लिए आवश्यक वस्त्र, ईधन और भोजन की कमी से जूझते कोयला मज़दूरों की असहायता से होता है तो उस चित्रकार की आत्मा का कैनवस तड़प उठता है. उसकी नसों में दौड़ते सुर्ख रंग फीके पड़ने लगते हैं. वह मिटने की ओर बढ़ने लगता है.

हालत यह होती है कि वहां भी कोयला खान मजदूरों के चित्र बना पाता वॉन गॉग स्वयं एक कोयले सा काला चित्र बनकर रह जाता है. तड़पकर अपना सर्वस्व कोयला खान-मज़दूरों के बच्चों, उनकी विधवा स्त्रियों को सौंपकर एकदम उन्हीं जैसी हालत में पहुंचकर, लगातार भूखे बना रहना चुनने वाले वॉन का बचकर लौट आना एक चमत्कार ही लगता है. शायद वॉन गॉग ने भी बोरीनाज से अपने जीवित लौट आने पर दिनों तक अविश्वास किया होगा.

वॉन गॉग की नजर जब भी अपनी परछाई पर जाती होगी उसे उसमें अपना भाई थियो नजर आता होगा. संभव है वॉन गॉग को हर माह बिना चूके एक सौ पचास फ्रेंक भेजते थियो को अपने चेहरे में भी अपने भाई का चेहरा दिखाई देता हो. दुनिया में थियो जैसे भाई कितने होंगे जो बेझिझक कैनवस में रंग भरते अपने भाई के जीवन में आखिर तक उस रंग को भरते रहे होंगे, जो घर के किराये, भोजन, कपड़े और दवाईयों में बदल जाता हो. कभी-कभार शराब और औरतों की अतरंगता हासिल करने में भी. यहां तक कि जब वॉन एक शराबखाने में मिली उस साधारण वेश्या क्रिस्टीन से विवाह करने पर उतर आता है और सबको उसे अपनी पत्नी बताते हुए धिक्कार और तिरस्कार का पात्र बनता है, तब भी थियो उसे आर्थिक सहायता भेजना बंद नहीं करता. वॉन गॉग को प्रेम करने के लिए एक स्त्री की कितनी ज़रुरत थी, भाई थिओ इससे निरपेक्ष नहीं था.

देखें तो महान वॉन गॉग के इस कृत्य से वह हमारे सामने एक प्रश्नचिह्न की तरह भी खड़ा होता है. किंतु तड़प यह कि वॉन के जीवन के लेखे में औरत कहां थी? जो कैनवस पर रंग उतारने की यात्रा में परिपक्वता हासिल करता जाता हो और अपने भीतर के प्रेम के रंगों से एक औरत को रंग देने के लिए तरसता और कलपता हो. किसी स्त्री के लिए उसके भीतर सुरक्षित रंग अपने ताप से उसे भीतर ही भीतर दहकाते और जलाते हों. जब सबसे पहले उर्सुला उसे ठुकराती है, तो पाठक इसे पहले प्यार की विफलता मानकर स्वीकार कर लेते हैं.

मगर वॉन की स्मृति से उर्सुला की याद तब जाकर धुंधली होती है जब उसकी मुलाकात अपनी शादीशुदा कज़िन (चचेरी बहन) ‘के’ से होती है. कितने प्यार, कितनी मार्मिक कवि-दृष्टि से देखता है वॉन उसे, मगर उसके विधवा होने के बाद भी वह उसे हासिल नहीं कर पाता. ‘उर्सुला’ से ‘के’ तक की किसी स्त्री को न पा पाने की उसकी यात्रा पाठक के मन में भी स्थायी निराशा की तरह घर कर लेती है.

आगे जब भी वह किसी स्त्री के पास पहुंचता है, पाठक का दिल धड़कने लगता है यह सोच कर कि इस स्त्री से भी कब उसे दुत्कार मिल जाए. पर वॉन गॉग के अंत के पश्चात एक प्रश्न यह भी उभरता है कि यदि उर्सुला अथवा के, में से कोई एक उसके प्रारंभिक जीवन में आ गई होती तब क्या वॉन को चित्रकार बनाने वाला, उसके जीवन को मिटाता चलता यह आत्मघाती-अस्थिर-अनिश्चित भटकाव संभव हो पाता.

जीवनी एक चित्रकार के मानस की भीतरी यात्रा भी है. वह यात्रा जहां अपने अंत से पहले वह अपनी सृजनशीलता के चरम को पा लेना चाहता है. दिमाग को भूनकर रख देने वाली आर्लेस की धूप में तपती हुई गर्म मौत उसे पुकार रही थी. यहां अस्पताल में जाने से पहले, तपती धूप के नीचे रहकर, अपने चित्रों में सूरज की तपिश भरते वॉन ने यहीं अपने अधिकतम चित्र बनाये. हालांकि, घरों के अंधेरे कोनों और बाहर की प्राकृतिक निरंतरता, उतार-चढ़ाव और बदलाव के चित्र तो वह अनथक बनाता ही रहा. क्या वह दुनिया से अपने जल्दी विदा लेने की आत्मानुभूति से परिचित था. शायद हां, तभी वह विचलित होते जाने के बीच खुद को रंगों में पीसता और घोलता तथा कैनवस पर खुद को पसारता रहा.

विधा कोई भी हो क्या उसका प्रतिनिधित्व करने वाले कलाकार एक दूसरे के प्रति ईर्ष्या और अघोषित आपराधिक प्रतिद्वंदिता से भरे होते हैं? जिनकी मनुष्यगत एकता एक-दूसरे की रचना के सामने खड़े होते ही खंडित होकर बिखरने लगती है. किसी कमी को कितनी क्रूरता से प्रदर्शित किया जा सकता है, वॉन गॉग के मित्रों को यहां हम उसे प्रदर्शित करते देख सकते हैं. लस्ट फॉर लाइफ को पढ़कर हमें इसका उत्तर मिलता है.

मृत्यु के बाद जिन चित्रों ने वॉन गॉग को महान चित्रकार बनाया, उसके उन्हीं चित्रों में उसके जीते जी उसके समकालीन चित्रकारों ने किस हद तक मीन-मेख निकालते रहे. अपनी आलोचनाओं से गहरी निराशा में धकेलने की हद तक उसे खुद को संवारने, सीखने और तराशने के लिए खिजाते रहे. उसे अपने समकालीन वरिष्ठ-कनिष्ठ चित्रकारों से कितनी सीखें मिलीं. जबकि वे सब भी शानदार और उल्लेखनीय चित्रकार थे, मगर एक चित्रकार के रूप में वे उसके आगे बढ़ने की राह में बेड़ियों की तरह पड़ते रहे. यह बेचैनी से भर देने वाला है और यह सिलसिला उसके आखिर तक चलता रहा.

मगर पेरिस में अपने उन्हीं आलोचक चित्रकार मित्रों के साथ बिताए दिन अनूठे और रोमांचित करने वाले हैं. यहां वॉन गॉग के चित्रकार मित्रों के जानलेवा संघर्ष से भी हमारा परिचय होता है, जहां सब वॉन गॉग की तरह ही नज़र आने लगते हैं. जो सफल हैं, जिनके चित्र गूपिल्स जैसी बड़ी कलादीर्घाओं में बिकने के लिए चुन लिए जाते हैं, पेरिस उनके लिए स्वर्ग है और जिन्हें अपने चित्रों के लिए कलादीर्घा और खरीददार हासिल नहीं, उनके लिए नर्क.

वॉन गॉग के अधिकांश चित्रकार मित्रों की हालत भी वॉन गॉग की तरह चित्र बनाते हुए भूखों मरने वालों जैसी थी. फिर भूख ने तो बोरीनाज से आर्लेस तक ताउम्र वॉन का पीछा नहीं छोड़ा. कितनी लंबी भूखें उसने सहीं हैं कि उसके ‘आवेर्स’ तक पहुंचने पर आश्चर्य होता है. जबकि वह प्रतिष्ठित विन्सेंट परिवार का एक सदस्य था. दिमाग में दोष (रोग) उत्पन्न हो जाने के बाद भी सेनिटोरियम में रहकर चित्र बनाते वॉन गॉग ने जब खुद को गोली मारी तब उसके पास कोई औरत नहीं थी. वह अपने चित्रों में कितनी औरतों को उकेर गया. मगर उसके हाथ में आजीवन किसी औरत का हाथ नहीं रहा, रही तो रंगों में लिथड़ी कूची और उसका भाई थियो. एक मेरी आधारहीन भावुक कल्पना यह कि वॉन गॉग की मृत्यु के छह माह के भीतर थियो ने जो दुनिया से विदा ली वह वॉन गॉग के पास पहुंचने के लिए ली.

‘लस्ट फॉर लाइफ ‘ दुनिया के महान चित्रकार विन्सेंट वॉन गॉग की दिल दहला देने वाली आत्मकथा है. जो विन्सेंट वॉन गॉग के चित्रों से परिचित हैं और जिन्होंने उनके चित्रों को नहीं भी देखा है उन्हें इस आत्मकथात्मक उपन्यास को पढ़ने से नहीं चूकना चाहिए. इसे पढ़ने के बाद वॉन गॉग के चित्रों को देखें तो संभव है उन चित्रों का महत्व और मूल्य की वास्तविकता समझ में आये.

संभव है समय के साथ-साथ विशेष और अनमोल होते जाते हर चित्र में भूख और बीमारी से मरता, प्रेम के लिए तरसता, आर्लेस की खून सोखती धूप में, जंगल और खेतों में, किसानों और मजदूरों के, प्रकृति के, पुराने घरों और रास्तों के, रात की अंतहीन परतों और तारों के तथा प्रकाशहीन धूल भरे अंधेरे कोनों में बहिष्कृत वस्तुओं तथा निरंतर बनते-बिगड़ते दृश्यों के चित्र बनाता वॉन गॉग आपको दिखाई दे.

(लेखक कवि, सामाजिक और राजनीतिक विश्लेषक हैं.)