पश्चिम बंगाल में ‘संदिग्ध विदेशियों’ के लिए हिरासत केंद्र बनाने का आदेश, बांग्लादेशी और रोहिंग्या का विशेष उल्लेख

पश्चिम बंगाल की नवनिर्वाचित भाजपा सरकार ने सभी जिला मजिस्ट्रेटों को ‘संदिग्ध अवैध विदेशियों’ के लिए होल्डिंग सेंटर स्थापित करने का निर्देश दिया है. आदेश में विशेष रूप से बांग्लादेशी नागरिकों और रोहिंग्या लोगों का उल्लेख किया गया है. बताया गया है कि यह कदम गृह मंत्रालय के दिशानिर्देशों के तहत उठाया जा रहा है.

पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुभेंदु अधिकारी. (फोटो: पीटीआई)

कोलकाता: पश्चिम बंगाल की नवनिर्वाचित भारतीय जनता पार्टी (भाजपा)  सरकार ने सभी जिला मजिस्ट्रेटों को निर्देश दिया है कि वे ‘संदिग्ध अवैध विदेशियों और निर्वासन या प्रत्यावर्तन की प्रतीक्षा कर रहे विदेशी बंदियों’ के लिए होल्डिंग सेटर (अस्थायी हिरासत केंद्र) स्थापित करें. आदेश में विशेष रूप से बांग्लादेशी और रोहिंग्या लोगों का उल्लेख किया गया है.

अधिसूचना में कहा गया है कि यह कदम गृह मंत्रालय के दिशानिर्देशों के अनुरूप उठाया जा रहा है. द वायर हिंदी ने इस वर्ष की शुरूआत में रिपोर्ट किया था कि 23 जनवरी 2026 को सूचना के अधिकार (आरटीआई) आवेदन के जवाब में केंद्रीय गृह मंत्रालय ने कहा था कि उसके पास देश में ‘घुसपैठियों’ की पहचान, गिरफ्तारी या निर्वासन से संबंधित कोई केंद्रीकृत उपलब्ध आंकड़ा नहीं है.

गृह और पर्वतीय मामलों के विभाग द्वारा जारी एक आधिकारिक सूचना के अनुसार, ज़िलों से कहा गया है कि वे देश में अवैध रूप से रह रहे लोगों की पहचान कर उन्हें रखने के लिए ज़रूरी कदम उठाएं; इनमें वे लोग भी शामिल हैं जिन्होंने अपनी जेल की सज़ा पूरी कर ली है और अब निर्वासन का इंतज़ार कर रहे हैं. इस निर्देश में अधिकारियों को हिदायत दी गई है कि वे भारत में अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशी नागरिकों और रोहिंग्या लोगों के निर्वासन और प्रत्यावर्तन की प्रक्रियाओं के संबंध में गृह मंत्रालय के तय ढांचे के अनुसार ही काम करें.

पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुभेंदु अधिकारी ने अपने चुनावी अभियान के दौरान कई बार कहा था कि वे बंगाल से ‘मुस्लिम विदेशियों’ और ‘बांग्लादेशी घुसपैठियों’ को बाहर निकाल देंगे.

दिसंबर 2025 में अधिकारी ने कोलकाता स्थित बांग्लादेश के उप उच्चायोग तक एक विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व किया था, जहां उन्होंने पत्रकारों से कहा था कि बांग्लादेश को ‘वैसा ही सबक सिखाया जाना चाहिए जैसा इज़रायल ने गाज़ा को सिखाया था.’

द वायर पहले भी यह उल्लेख कर चुका है कि अधिकारी ने बिना किसी सबूत के दावा किया था कि 1.5 करोड़ ‘घुसपैठिए’ मौजूद हैं. भाजपा के चुनाव अभियान में ‘बांग्लादेशी घुसपैठियों’ का मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया था.

इसके अलावा, विधानसभा चुनावों से ठीक पहले चुनाव आयोग द्वारा चलाए गए मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान के तहत मतदाता सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया का असर मुख्य रूप से मुसलमानों पर पड़ा है – खासकर सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले मुसलमानों पर. इससे यह चिंता पैदा हो गई है कि कहीं मतदाता सूची से नाम हटाए जाने का मतलब बंगाल से इन लोगों का अंततः देश-निकाला तो नहीं है.

अब तक न तो चुनाव आयोग और न ही केंद्रीय गृह मंत्रालय ने यह संख्या बताई है कि एसआईआर कवायद में बंगाल में कितने ‘घुसपैठियों’ की पहचान की गई.

एसआईआर कवायद शुरू होने से पहले भी भारत के विभिन्न हिस्सों से बांग्ला भाषी मुस्लिम प्रवासी मजदूरों को उनकी नागरिकता की पर्याप्त जांच के बिना बांग्लादेश भेजे जाने की घटनाएं सामने आई थीं.

बांग्लादेश के विदेश मंत्री खलीलुर रहमान ने मई में कहा था कि ‘अगर पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बीच जबरन धकेलने (पुश-इन) की घटनाएं होती हैं तो ढाका कार्रवाई करेगा.’

इससे पहले अधिकारी ने राज्य पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिया था कि वे अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों को अदालतों की प्रक्रिया को दरकिनार करते हुए ‘सीधे’ सीमा सुरक्षा बल को सौंप दें.

भारत-बांग्लादेश सीमा पर सिलीगुड़ी उपखंड के फांसीदेवा क्षेत्र में बाड़बंदी का काम भी शुरू हो गया है, क्योंकि बंगाल सरकार ने 27 किलोमीटर भूमि सीमा सुरक्षा बल को सौंप दी है – ऐसा कदम जिसे पहले की अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस सरकार ने टाल रखा था.