मुंबई: मीरा रोड सोसाइटी में बकरे के विरोध में सुअर लेकर पहुंचे हिंदुत्ववादी समूह, वायरल वीडियो की असल कहानी

मुंबई के मीरा रोड स्थित रिहायशी इलाके में बकरीद की तैयारियों को सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश के तहत ईद की कुर्बानी से पहले सोसाइटी की मैनेजिंग कमेटी द्वारा निर्धारित जगह पर बकरे रखने के विरोध में हिंदुत्ववादी समूह सुअर लेकर पहुंचे. इस घटना का वीडियो भी वायरल हुआ, जिसमें अफ़रातफ़री के बीच पुलिस, पत्रकारों और लोगों की भीड़ को देखा जा सकता है.

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मीरा रोड कॉम्प्लेक्स के कथित वीडियो का स्क्रीनग्रैब, जिसमें एक व्यक्ति को एक सूअर ले जाते हुए देखा जा सकता है. (फोटो साभार: एक्स)

नई दिल्ली: मुंबई में बकरीद से ठीक पहले मीरा रोड सोसाइटी का 26 मई को एक नाटकीय वीडियो वायरल हुआ, जिसमें मीरा रोड पर एक पुलिसकर्मी को भीड़-भाड़ वाली जगह से एक सुअर को ले जाते हुए देखा गया. इस दौरान दर्जनों लोग सुअर को पुलिसकर्मी के हाथों से छीनने की ज़ोरदार कोशिश कर रहे थे. वर्दी पहने अधिकारी, उग्र भीड़, और कैमरे लिए टीवी पत्रकार, जो जगह बनाने के लिए धक्का-मुक्की कर रहे थे, ने इस अफरा-तफरी के माहौल को अपने कैमरों में कैद किया.

यह क्लिप उन गहरे तनावों की महज़ एक झलक थी, जो मुंबई के बाहरी इलाके मीरा रोड स्थित एक रिहायशी कॉम्प्लेक्स- पूनम क्लस्टर 1 में ईद-उल-अज़हा (जिसे आम बोलचाल में बकरीद कहा जाता है) से पहले से ही पनप रहे थे.

पूनम क्लस्टर सोसाइटी, जिसमें 600 से ज़्यादा अपार्टमेंट हैं और लगभग बराबर संख्या में मुस्लिम और हिंदू परिवार रहते हैं, हमेशा यहां बिना किसी दिक्कत के सभी धर्मों के लोग अपना त्योहार मनाते रहे हैं. इस साल भी सोसाइटी के मुस्लिम सदस्यों ने सोसाइटी की मैनेजिंग कमेटी द्वारा तय की गई जगह पर एक पंडाल बनाया था, ताकि ईद पर कुर्बानी के लिए खरीदे गए बकरों को वहां रखा जा सके.

इस संबंध में सोसाइटी के एक निवासी, जो यहां किसी भी तरह के सांप्रदायिक तनाव को फैलने से रोकने में सक्रिय रूप से शामिल रहे हैं, ने बताया, ‘यह कुर्बानी बाहर नगर निगम द्वारा तय की गई जगह पर होनी थी.’

एक अन्य निवासी ने कहा कि हर साल ईद-उल-अज़हा से लगभग 10-12 दिन पहले सोसाइटी में रहने वाले मुस्लिम परिवार धीरे-धीरे त्योहार के लिए अपनी बकरियां लाना शुरू कर देते हैं. सोसाइटी के अंदर जो जगह तय की गई है, वहीं उन्हें बांधकर रखा जाता है और चारा खिलाया जाता है.

उन्होंने द वायर को बताया, ‘यह 10 दिनों तक चलने वाले एक शानदार उत्सव जैसा होता है.’

सोसाइटी में रहने वाले कई लोगों ने द वायर से कहा कि इस पूरे समय के दौरान सोसाइटी में रहने वाले हिंदू समुदाय को इन उत्सवों के किसी भी पहलू से कोई दिक्कत नहीं हुई है. लेकिन इस साल तीन परिवारों, जो सभी ब्राह्मण समुदाय से हैं, ने इस पर आपत्ति जताई थी.

एक निवासी ने बताया, ‘उनकी आपत्ति मुख्य रूप से तय की गई जगह को लेकर थी. वे चाहते थे कि इस व्यवस्था को वहां से हटा दिया जाए. लेकिन, क्योंकि मैनेजिंग कमेटी पहले ही वह जगह तय कर चुकी थी, इसलिए हमने उन्हें समझाने की कोशिश की कि जैसे ही हमें कोई नई जगह मिलेगी, हम वहां चले जाएंगे.’

बता दें कि द वायर से बात करने वाले ज़्यादातर लोगों ने अपनी पहचान ज़ाहिर होने को लेकर चिंता जताई. उनका कहना था कि इस समय माहौल इतना तनावपूर्ण है कि उन्हें हिंदुत्ववादी कट्टरपंथी समूहों और पुलिस, दोनों की तरफ़ से बदले की कार्रवाई का डर सता रहा है.

उल्लेखनीय है कि 22 मई को मीरा भायंदर नगर निगम (एमबीएमसी) के कुछ अधिकारियों ने हाउसिंग सोसाइटी का दौरा किया था. चूंकि शेड को तिरपाल से ढका गया था-लजिसे आग लगने का खतरा माना जाता है, इसलिए पंडाल समिति से उसे हटाने के लिए कहा गया. तब तक जिन तीन परिवारों (कुल 640 परिवारों में से) ने इस पर आपत्ति जताई थी, वे पहले से ही इस बात पर ज़ोर दे रहे थे कि पंडाल को पूरी तरह से कॉम्प्लेक्स के बाहर ही हटा दिया जाए.

इसके बाद 25 मई को नगर निगम ने एक और दौरा किया, इस बार यह कहा गया कि बांस के ढांचे को भी हटा दिया जाए. इस संबंध में निवासियों में से एक ने आरोप लगाया, ‘इनमें से किसी भी बात की जानकारी हमें किसी आधिकारिक आदेश के ज़रिए नहीं दी गई थी.’

हालांकि, बांस के उस खाली ढांचे को भी हटा दिया गया.

निवासियों का आरोप है कि जिन परिवारों ने इस पर आपत्ति जताई थी, उन्हें भी इस समय तक शांत कर दिया गया था. लेकिन अचानक 26 मई को सोसाइटी के बाहर एक बड़ी भीड़ जमा हो गई, जिसके साथ एक बड़ा सुअर भी था. उन्होंने हनुमान चालीसा का पाठ करना शुरू कर दिया.

यहां रहने वाले लोगों ने द वायर को बताया कि- चाहे भीड़ में शामिल लोग किसी भी धर्म के हों- ये उपद्रवी ‘बाहर से आए थे.’

निवासियों का आरोप है कि हाउसिंग सोसाइटी के ही किसी व्यक्ति ने इस समूह को सचेत किया था; कहा जाता है कि यह समूह बजरंग दल और सकल हिंदू समाज से जुड़ा था- ये दोनों ही खुद को हिंदुत्ववादी बताने वाले ऐसे समूह हैं, जो पिछले कुछ वर्षों से राज्य में अशांति फैलाने और सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने के लिए जाने जाते हैं.

इस संबंध में द वायर ने मीरा रोड-भयंदर-विरार-वसई पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी से बात की, जिन्होंने अनुरोध किया कि न उनका नाम और न ही उनका पद सार्वजनिक किया जाए.

पुलिस के अनुसार, ‘सुअर वाली घटना से एक दिन पहले बजरंग दल के स्थानीय नेता पवन ठाकुर और कई कार्यकर्ता सोसाइटी में आए थे और उन्होंने अंदर की व्यवस्था में बाधा डालना शुरू कर दिया था. कुछ घंटों बाद एक और दक्षिणपंथी नेता नागनाथ कांबले भी इस हंगामे में शामिल हो गए और जल्द ही हालात बेकाबू हो गए. दक्षिणपंथी कार्यकर्ताओं में से एक ने दावा किया कि उन पर चाकू से हमला किया गया था, जिसे स्थानीय लोगों ने सोसाइटी में रहने वाले मुसलमानों को गिरफ्तार करवाने की एक चाल बताया.’

इस घटना के बाद से मीरा-भायंदर-वसई-विरार (एमबीवीवी) पुलिस ने इस इलाके में और शहर के उन अन्य इलाकों में भी पुलिसकर्मी तैनात कर दिए हैं, जहां मुसलमानों की अच्छी-खासी आबादी है.

गौरतलब है कि पूनम क्लस्टर में हुई इस घटना का असर शहर के दूसरे हिस्सों में भी देखने को मिला. कई हाउसिंग सोसाइटियों को तय जगहों पर बकरियों को रखने की अनुमति होने के बावजूद उन्हें वहां से हटाना पड़ा है.

पिछले कुछ सालों में मीरा भायंदर में हिंसक सांप्रदायिक झड़पें हुई हैं. नितेश राणे जैसे भाजपा नेताओं ने इस जगह का दौरा किया है और पुलिस की मौजूदगी में खुलेआम भड़काऊ बयान दिए हैं. स्थानीय निवासियों ने इसमें हस्तक्षेप की मांग करते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट का दरवाज़ा भी खटखटाया, लेकिन उससे भी कोई नतीजा नहीं निकला.

पूनम क्लस्टर सोसाइटी के बाहर हुई घटना के बाद किरीट सोमैया जैसे भाजपा नेता सबसे पहले घटनास्थल पर पहुंचने वालों में से थे, और उन्होंने हाउसिंग सोसाइटी के अंदर जानवरों की कुर्बानी पर रोक लगाने की मांग की.

स्थानीय मुसलमानों का कहना है कि सोमैया और अन्य भाजपा नेता जान-बूझकर गलत जानकारी फैला रहे हैं. उनमें से एक ने द वायर को बताया कि कुर्बानी कभी भी हाउसिंग सोसाइटी के अंदर नहीं दी जाती. यह तो बस ईद से कुछ दिन पहले बकरियों को रखने की एक जगह है.

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