नई दिल्ली: पंजाब के लुधियाना में रविवार और सोमवार (1 जून) की दरमियानी रात एक औजार निर्माण कारखाने में सीवेज टैंक की सफाई के दौरान कथित तौर पर जहरीली गैस के संपर्क में आने से पिता-पुत्र समेत तीन मजदूरों की मौत हो गई, जबकि दो अन्य को अस्पताल में भर्ती कराया गया.
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि यह घटना इंडस्ट्रियल एरिया-ए में राजदीप जैन के मालिकाना हक वाली कंपनी M/S Deeps Tools में हुई, जहां मज़दूरों को सीवेज साफ़ करने के लिए बुलाया गया था.
उन्होंने आगे बताया कि इस बात की जांच की जा रही है कि क्या फैक्ट्री मैनेजमेंट ने पीड़ितों को अस्पताल पहुंचाने में देरी की थी.
पुलिस के अनुसार, यह घटना रविवार और सोमवार की दरमियानी रात करीब 2:30 बजे हुई थी, लेकिन फैक्ट्री मैनेजमेंट ने सुबह 10 बजे तक पुलिस को इसकी कोई सूचना नहीं दी थी.
इस संबंध में डिप्टी कमिश्नर हिमांशु जैन, जिन्होंने इस घटना की मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दिए हैं, ने बताया कि शुरुआती जानकारी के अनुसार, मज़दूर कचरे से भरे एक टैंक की सफाई कर रहे थे और ज़हरीली गैस सांस में जाने से वे बेहोश हो गए.
जैन ने कहा, ‘हमने पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (पीपीसीबी) से भी ज़हरीली गैस के प्रकार और उन परिस्थितियों के बारे में रिपोर्ट मांगी है जिनके तहत रात के समय फैक्ट्री में काम चल रहा था.’
इस हादसे में मारे गए लोगों की पहचान ग्यासपुरा के रहने वाले 46 वर्षीय मान सिंह, उनके बेटे 24 वर्षीय अमित और एक अन्य कर्मचारी श्रीराम के रूप में हुई है. वहीं, जिन दो लोगों का इलाज चल रहा है, उनकी पहचान दीपक कुमार और राजेंदर कुमार के रूप में हुई है.
पुलिस कमिश्नर स्वपन शर्मा ने बताया कि मान सिंह के पिता राम लाल की शिकायत पर मोती नगर थाने में फैक्ट्री प्रबंधन के खिलाफ ‘गैर-इरादतन हत्या’ का मामला दर्ज किया गया है.
एफआईआर के मुताबिक 71 साल के राम लाल ने अपने बयान में पुलिस को बताया कि पिछले कुछ दिनों से मान और अमित दोनों को डीप्स टूल्स से उनके केमिकल वाले टैंक (10,000 लीटर के दो टैंक) में गाद साफ करने के लिए फोन आ रहे थे.
उन्होंने आगे बताया कि रविवार को उनके बेटे और पोते को फैक्ट्री से फिर फोन आया और वे रात करीब 9:30 बजे घर से निकल गए.
उन्होंने कहा, ‘जब सुबह तक वे घर नहीं लौटे, तो हम सुबह करीब 7:30 बजे फैक्ट्री पहुंचे. हमें पता चला कि मेरे बेटे, पोते और 3-4 अन्य मज़दूरों से बिना किसी सेफ़्टी किट के केमिकल से भरा टैंक साफ़ करवाया गया था… मेरे बेटे और पोते की मौत हो गई और 2-3 अन्य लोग बेहोश हो गए. यह सब फैक्ट्री मैनेजमेंट की घोर लापरवाही की वजह से हुआ.’
इस मामले को लेकर एसीपी (औद्योगिक क्षेत्र-A) इंदरजीत सिंह बोपाराई ने कहा, ‘मजदूरों को फैक्ट्री के अंदर इलेक्ट्रोप्लेटिंग यूनिट के वेस्ट डिस्पोजल टैंक को साफ करने के लिए बुलाया गया था. उन्होंने केमिकल वाले टैंक को हाथ से साफ करना शुरू कर दिया और उन्हें कोई प्रोटेक्टिव गियर नहीं दिया गया. उनके पास केमिकल वाले वेस्ट को संभालने की स्किल और ट्रेनिंग की कमी थी.’
परिवार ने आरोप लगाए
मान सिंह के चाचा जगदीश सिंह ने कहा कि फैक्ट्री मैनेजमेंट ने उन्हें इस घटना के बारे में कोई जानकारी नहीं दी.
जगदीश ने कहा, ‘सुबह 7 बजे फैक्ट्री पहुंचने के बाद ही हमें पता चला कि पांच वर्कर को मोहनदाई ओसवाल अस्पताल ले जाया गया है. अस्पताल के मुताबिक उन्हें सुबह करीब 4 बजे लाया गया और तब तक तीन की मौत हो चुकी थी. हमें इंसाफ चाहिए. मान और अमित अपने परिवार के कमाने वाले थे. मान के परिवार में बूढ़े माता-पिता, पत्नी और चार बेटियां हैं. अमित के परिवार में पत्नी और एक छोटी बेटी है. अब उनका ख्याल कौन रखेगा?’
अखबार से बात करते हुए मान सिंह की बेटी रेनू ने कहा, ‘उन्होंने (फैक्ट्री मैनेजमेंट) मेरे पिता और भाई का इस्तेमाल किया और फिर उन्हें फेंक दिया. उन्हें मरे हुए कुत्तों की तरह फेंक दिया गया. वे सुबह 4 बजे से मोहनदाई ओसवाल हॉस्पिटल में मरे पड़े थे लेकिन हमें बताया नहीं गया. हमें घटना के बारे में सुबह 7 बजे फैक्ट्री पहुंचने के बाद ही पता चला.’
एसीपी इंदरजीत सिंह बोपाराय ने कहा कि फैक्ट्री मैनेजमेंट ने पुलिस को घटना के बारे में जानकारी नहीं दी.
इस संबंध में लुधियाना के असिस्टेंट डिविजनल फायर ऑफिसर जसविंदर सिंह भंगू ने कहा, ‘हमें इसके बारे में सुबह करीब 10 बजे एक सोशल वर्कर से पता चला. यह घटना सुबह करीब 2.30 बजे हुई, लेकिन हमें कई घंटे बाद सुबह बुलाया गया. उस समय तक गैस उड़ चुकी थी और हमें मौके पर कुछ भी पता नहीं चला.’
एसीपी ने कहा कि यूनिट में निकेल जैसी बहुत ज़्यादा ज़हरीली चीज़ें भी इस्तेमाल की गई थीं.
उन्होंने कहा, ‘हमने पूरे मैनेजमेंट पर बीएनएस के सेक्शन 105 के तहत केस दर्ज किया है और जांच शुरू कर दी गई है. पिता-पुत्र को एक दिन के लिए बाहर से काम पर रखा गया था और तीन अन्य उनके अपने कर्मचारी थे.’
गौरतलब है कि इस साल मार्च में समाजवादी पार्टी की सांसद इकरा चौधरी के सीवर में मौत और मैनुअल स्कैवेंजर के पुनर्वास से जुड़े सवाल के जवाब में सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय द्वारा संसद में बताया था कि साल 2017 से अब तक (मार्च 17) भारत में सीवर और सेप्टिक टैंक हादसों में कम से कम 622 सफाईकर्मियों की मौत हुई, लेकिन इनमें से 52 परिवारों को आज तक कोई मुआवजा नहीं मिला.
राज्यों में सबसे ज्यादा मौतें उत्तर प्रदेश में 86 हुईं, इसके बाद महाराष्ट्र में 82, तमिलनाडु में 77, हरियाणा में 76, गुजरात में 73 और दिल्ली में 62 मौतें दर्ज की गईं.
मौतों और मुआवजा पाने वाले परिवारों के बीच सबसे बड़ा अंतर उत्तर प्रदेश में देखा गया, जहां 86 में से 13 परिवारों को कोई आर्थिक मदद नहीं मिली और दो को सिर्फ आंशिक भुगतान मिला.
दिल्ली में 62 में से 9 परिवारों को कुछ नहीं मिला. गुजरात में दो परिवारों को अब तक मुआवजा नहीं मिला और एक मामला बंद हो गया. महाराष्ट्र में 9 परिवारों को कोई भुगतान नहीं मिला.
