नई दिल्ली: अहमदाबाद के घाटलोडिया इलाके में दूषित पानी पीने से दर्जनों लोग बीमार पड़ गए. उन्हें दस्त और उल्टी की शिकायत हुई. आधिकारिक तौर पर 50 लोगों के बीमार पड़ने की बात कही जा रही है, लेकिन खबरों के अनुसार हजारों लोग बीमार पड़े हैं.
समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार, नगर निगम के अधिकारियों ने बुधवार को बताया कि ड्रेनेज सिस्टम का दूषित पानी पीने के पानी की पाइपलाइनों में घुस गया था, जिससे यह समस्या पैदा हुई. इनमें से 11 लोगों को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा.
इस दूषित पानी का असर नौ रिहायशी सोसाइटियों पर पड़ा, जहां के निवासियों को कथित तौर पर चार दिन पहले से ही गंदा पानी मिल रहा था.
अहमदाबाद नगर निगम (एएमसी) के स्वास्थ्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. भाविन सोलंकी के अनुसार, दूषित पानी की शिकायतें मिलने के बाद बीमारी के कई मामले सामने आए.
सोलंकी ने बताया, ‘घाटलोडिया की नौ रिहायशी सोसाइटियों के लोगों ने दूषित पानी की सप्लाई मिलने की शिकायत की थी, जिसके बाद चार दिन पहले दस्त और उल्टी के कई मामले सामने आए.’
उन्होंने आगे बताया कि 11 मरीज़ों को अस्पताल में भर्ती कराने की ज़रूरत पड़ी. हालात पर काबू पाने के लिए एएमसी ने प्रभावित इलाकों में चार मेडिकल वैन और 40 स्वास्थ्य टीमों को तैनात किया.
इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, अहमदाबाद नगर निगम के अधिकारियों ने बताया कि जहां 40 स्वास्थ्य टीमों द्वारा मौके पर बीमारी की रोकथाम का काम चल रहा है, वहीं स्वास्थ्य अधिकारियों ने सभी प्रभावित सोसायटियों में घर-घर जाकर सर्वे किया.
उन्होंने बताया कि निवासियों के बीच क्लोरीन की गोलियां बांटी गईं. इसके अलावा, मेयर हितेश बारोट ने प्रभावित निवासियों से मुलाकात की.
एएमसी अधिकारियों ने अखबार को बताया, ‘गोटा वार्ड के सोला इलाके में सत्ताधार पुल के पास आकांक्षा फ्लैट, नवरत्न फ्लैट और त्रिदेव सोसाइटी में दस्त और उल्टी के मामलों की जानकारी मिलने पर अहमदाबाद नगर निगम के स्वास्थ्य विभाग के मेडिकल और पैरामेडिकल स्टाफ की एक टीम, साथ ही इंजीनियरिंग विभाग के स्टाफ तुरंत मौके पर पहुंचे और तुरंत बीमारी की रोकथाम के लिए गतिविधियां शुरू कीं.’
प्रशासन 50 लोगों के बीमार पड़ने बात कह रही है. हालांकि, निवासियों का दावा है कि बीमारी का प्रकोप इससे कहीं ज़्यादा बड़ा है. उन्होंने आरोप लगाया कि घर पर दूषित पानी पीने से ‘सैकड़ों लोग’ बीमार पड़ गए हैं.
लेकिन, एएमसी कमिश्नर बंछानिधि पाणि ने कहा कि नगर निगम की मेडिकल टीमों ने 50 लोगों का ओपीडी में इलाज किया है. उन्होंने पीटीआई को बताया कि ये बीमारियां 30 मई को पानी और ड्रेनेज की पाइपलाइनों में आई खराबी की वजह से फैली थीं, जिसे तुरंत ठीक कर दिया गया था. एएमसी कमिश्नर ने कहा कि सभी मरीज़ सुरक्षित हैं.
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले दो दिनों में 1,000 से अधिक निवासी बीमार पड़ गए हैं. आकांक्षा और नवरत्न अपार्टमेंट में रहने वाले 700 से ज़्यादा लोग दूषित पीने के पानी की वजह से गंभीर दस्त और उल्टी की चपेट में आ गए हैं. कई लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है.
वहीं, नवरत्न एवेन्यू में चार दिनों के भीतर लगभग 200 निवासी बीमार पड़ गए. निवासियों का दावा है कि वंदे मातरम फ्लैट्स में 200 में से लगभग 100 निवासी प्रभावित हुए. विनायक बंगलों में रहने वाले लगभग 50 लोग बीमार पड़ गए
लापरवाही का आरोप
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, शहर में पानी के दूषित होने की घटना को लेकर नागरिक प्रशासन की घोर लापरवाही आरोप लगाया है.
अहमदाबाद के घाटलोडिया स्थित आकांक्षा सोसाइटी के निवासियों ने आरोप लगाया है कि शनिवार से ही एएमसी के अधिकारियों को नल के पानी के दूषित होने के बारे में बार-बार चेतावनी दी जा रही थी, लेकिन इसके बावजूद कोई तत्काल कार्रवाई नहीं की गई.
एक स्थानीय निवासी ने आरोप लगाते हुए कहा, ‘चूंकि रविवार को छुट्टी थी, इसलिए एएमसी ने हमारी शिकायत को गंभीरता से नहीं लिया. सोमवार से लोगों के बीमार पड़ने का सिलसिला शुरू हो गया था, लेकिन बुधवार आते-आते स्थिति पूरी तरह से नियंत्रण से बाहर हो चुकी थी.’
आकांक्षा सोसाइटी के एक निवासी ने अपना नाम न छापने की शर्त पर अखबार से कहा कि प्रशासन ने तभी कार्रवाई की जब यह समस्या इतनी बढ़ गई कि इसे नज़रअंदाज़ करना नामुमकिन हो गया. निवासी ने कहा, ‘अगर एएमसी ने तुरंत कार्रवाई की होती, तो सैकड़ों लोग इस तकलीफ़ से बच सकते थे.’ उन्होंने दावा किया कि अकेले आकांक्षा सोसाइटी में ही 500 से ज़्यादा लोग बीमार पड़ गए थे.
निवासियों के अनुसार, जनता नगर क्रॉसिंग के पास चल रहे खुदाई के काम के दौरान पेयजल की मुख्य पाइपलाइन टूट गई. इसके अलावा, पाइपलाइन के ठीक नीचे से गुजर रही जल निकासी (ड्रेनेज) की एक लीक होती हुई लाइन से सीवेज का पानी रिसकर पेयजल आपूर्ति नेटवर्क में मिल गया. बार-बार शिकायतें मिलने के बावजूद कथित तौर पर कई दिनों तक यह दूषित पानी बिना किसी रोक-टोक के लोगों तक पहुंचता रहा.
बुधवार को जब सैकड़ों निवासियों ने गैस्ट्रोएंटेराइटिस (पेट के संक्रमण) के गंभीर लक्षणों की शिकायत की, तब जाकर प्रशासन ने इस मामले में बड़े पैमाने पर कार्रवाई शुरू की. निवासियों के बीच दहशत फैलने के बाद एएमसी के अधिकारी, राजनीतिक पदाधिकारी और चिकित्सा दल तत्काल प्रभावित सोसाइटियों में पहुंचे. क्षेत्र में पानी के टैंकर तैनात किए गए, सोसाइटियों की पानी की टंकियों को सैनिटाइज किया गया और चार चिकित्सा वाहनों (मेडिकल वैन) को भी वहां तैनात किया गया.
आकांक्षा सोसाइटी के चेयरमैन राकेश पटेल ने बताया कि शिकायतें बढ़ने पर उन्होंने खुद जनता नगर जल वितरण केंद्र गए. उन्होंने कहा, ‘केंद्र पर पानी साफ़ था, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि पानी में मिलावट कहीं सप्लाई लाइन में हो रही थी.’
पटेल ने दावा किया कि उन्होंने एएमसी अधिकारियों को इस बात की चेतावनी दी थी कि खुदाई वाली जगह से सीवेज पाइपलाइन में घुस सकता है, और निवासियों को नल का पानी न पीने की सलाह दी थी. उन्होंने कहा, ‘लेकिन तब तक तो नुकसान हो ही चुका था.’
उन्होंने आगे कहा, ‘हमारी आकांक्षा सोसाइटी में कुल 386 घर हैं. लगभग हर घर में दूषित पानी की वजह से एक या दो लोग बीमार पड़ गए हैं. अकेले हमारी सोसाइटी में ही 500 से ज़्यादा लोग बीमार हैं.’
बता दें कि पिछले साल देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर में दूषित पानी पीने से कई लोगों की जान चली गई थी. ऑडिट समिति ने पाया था कि 23 में से 16 मौतें दूषित जल से फैली महामारी के कारण हुई थीं. सात मौतों के संबंध में भी अनिश्चितता के तत्व मौजूद थे.
इंदौर शहर के भागीरथपुरा में नर्मदा नदी की पाइपलाइन में ड्रेनेज लाइन का पानी मिल जाने से सप्लाई का पानी दूषित हो गया था. 3 जनवरी को नगर निगम द्वारा जीवाणु परीक्षण के लिए भागीरथपुरा से एकत्र किए गए 51 नमूनों में से 35 में मल कोलीफॉर्म जीवाणु की मात्रा पाई गई.
