नई दिल्ली: नीट-यूजी पेपर लीक को लेकर हुए युवा आंदोलन ने हाल के वर्षों में दिल्ली का सबसे बड़ा विरोध प्रदर्शन खड़ा कर दिया, जिसके चलते केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफ़ा देने पर मजबूर कर दिया. इस आंदोलन के खत्म होने के कुछ दिनों बाद केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने मंगलवार (28 जुलाई) को मई 2026 में हुई परीक्षा के पेपर लीक मामले में 13 आरोपियों के ख़िलाफ़ चार्जशीट दाखिल की है.
मंगलवार रात जारी एक बयान में सीबीआई ने कहा कि एजेंसी ने 13 आरोपियों पर आपराधिक साज़िश, धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात और सबूत मिटाने के साथ-साथ ‘सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) अधिनियम, 2024’ और ‘भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम’ की धाराओं के तहत आरोप लगाए हैं.
सीबीआई ने कहा कि वह यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है कि ऐसे अपराधों के लिए ज़िम्मेदार लोगों को उनके किए की पूरी कानूनी सज़ा मिले.
बताया गया है कि इस संबंध में एजेंसी ने आरोपियों के ख़िलाफ़ 360 गवाह, 422 दस्तावेज़ और 43 भौतिक सबूत पेश किए हैं; सभी आरोपी न्यायिक हिरासत में हैं.
सीबीआई ने मंगलवार को बताया कि 13 आरोपियों में नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) के तीन विषय विशेषज्ञ, ‘कई बिचौलिए’ (जिन्होंने कथित तौर पर प्रश्न पत्र लीक किए) और कोचिंग सेंटरों से जुड़े दो लोग (जिन पर लीक हुए प्रश्न पत्र लेने का आरोप है) शामिल हैं.
इसमें कहा गया है कि लीक हुए सवालों के बारे में डिजिटल फॉरेंसिक एनालिसिस रिपोर्ट, हैंडराइटिंग एक्सपर्ट की राय और एकेडमिक विषेज्ञों की राय हासिल कर ली गई है. इन रिपोर्ट्स और राय से लीक मामले में आरोपी की भूमिका की पुष्टि हुई है. साथ ही इस मामले में आगे की जांच और फ़ोरेंसिक एनालिसिस जारी है.
खबरों के मुताबिक, सीबीआई ने राउज़ एवेन्यू कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की है. एजेंसी द्वारा यह कदम नीट-यूजी पेपर लीक (2024 और इस साल मई) के खिलाफ़ हुए कॉकरोच जनता पार्टी के जंतर-मंतर पर महीनेभर चले विरोध-प्रदर्शन के ख़त्म होने के कुछ दिनों बाद उठाया गया है.
मालूम हो कि यह विरोध प्रदर्शन एक देशव्यापी आंदोलन में बदल गया था, जो 20 जुलाई को ‘संसद चलो’ मार्च के साथ चरम पर देखने को मिला. इस मार्च में युवाओं का भारी जनसैलाब दिल्ली की सड़कों पर देखने को मिला, जिस पर दिल्ली पुलिस द्वारा बर्बर कार्रवाई की गई थी.
करीब महीनेभर चले इस आंदोलन में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े की मांग की गई थी, और भारी दबाव के बीच मंत्री का पिछले शनिवार को इस्तीफ़ा भी सामने आया. उनकी जगह भाजपा और लोकसभा में उनके साथी प्रह्लाद जोशी को लाया गया है.
इस आंदोलन की वजह से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, जिन्होंने कभी भी इन विरोध प्रदर्शनों पर खुलकर बात नहीं की, को पेपर लीक में शामिल होने के आरोपी लोगों पर मुकदमा चलाने के लिए एक फास्ट-ट्रैक कोर्ट बनाने की घोषणा करनी पड़ी. कोर्ट की पहली सुनवाई सोमवार को हुई, लेकिन दो आरोपियों की ज़मानत याचिकाओं पर सुनवाई 3 अगस्त तक टाल दी गई, क्योंकि सीबीआई के वकील सुबह 10:45 बजे तक बेंच के सामने पेश नहीं हुए थे.
ज्ञात हो कि इस साल 3 मई को आयोजित की गई नीट-यूजी परीक्षा का पेपर लीक होने की ख़बर सामने आने के बाद इसे रद्द कर दिया गया था और 21 जून को लगभग 20 लाख छात्रों के लिए दोबारा परीक्षा आयोजित की थी.
गौरतलब है कि सीबीआई 2024 के नीट पेपर लीक मामले की भी जांच कर रही है. इस संबंध में एजेंसी ने पिछले हफ़्ते बताया था कि नीट-यूजी 2024 के प्रश्नपत्र लीक मामले में कथित मास्टरमाइंड संजीव कुमार उर्फ संजीव मुखिया के खिलाफ प्रश्नपत्र की चोरी या उसके वितरण में शामिल होने का कोई सबूत नहीं मिला है. हालांकि, बिहार पुलिस ने दर्ज एफआईआर में शुरुआत में उन्हें आरोपी बनाया था.
सीबीआई ने कहा था कि उसने इस मामले में 45 आरोपियों के खिलाफ पटना की अदालत में कई आरोपपत्र दाखिल किए, लेकिन जांच के दौरान नीट-यूजी 2024 प्रश्नपत्र लीक की साजिश में संजीव मुखिया की भूमिका साबित करने वाला कोई सबूत नहीं मिला.
सीबीआई ने आगे कहा था कि उसकी जांच में नीट-यूजी 2024 प्रश्नपत्र चोरी की पूरी साजिश का खुलासा हो चुका है और इस मामले में शामिल सभी लोगों को कानून के दायरे में लाया गया है.
(अरविंद गुणशेखर के सहयोग के साथ.)
