सीबीएसई ओएसएम विवाद: एआई के जरिए पोर्टल हैक, पुनर्मूल्यांकन साइट को लेकर जूझते छात्र

आईआईटी के विशेषज्ञों ने बताया है कि एआई के ज़रिये सीबीएसई ओएसएम पोर्टल में सेंध लगाई गई है. जानकारों के मुताबिक, विशेष रूप से क्लाउड एआई का उपयोग सीबीएसई की ओएसएम प्रणाली एक्सेस करने के लिए किया गया था. इस बीच बारहवीं के हज़ारों छात्र पुनर्मूल्यांकन पोर्टल पर लॉग इन करने और अपनी शिकायतें दर्ज कराने के लिए संघर्ष कर रहे हैं.

सीबीएसई के खिलाफ प्रदर्शन करते एनएसयूआई के सदस्य. (फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: केंद्रीय माध्यमिक परीक्षा बोर्ड (सीबीएसई) की ऑन-स्क्रीन मार्किंग (ओएसएम) प्रणाली का विवाद दिन-प्रतिदिन गहराता जा रहा है. रोज़ाना इसे लेकर नए दावे और तथ्य सामने आ रहे हैं. इस बीच भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) के विशेषज्ञों ने बताया है कि कृत्रिम मेधा (एआई) के जरिए इस पोर्टल में सेंध लगाई गई है.

इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, आईआईटी कानपुर और आईआईटी मद्रास के विशेषज्ञों के एक उच्च स्तरीय पैनल ने पाया है कि एआई उपकरणों, विशेष रूप से क्लाउड (Claude) एआई का उपयोग सीबीएसई की ओएसएम प्रणाली तक पहुंच प्राप्त करने के लिए किया गया था.

उल्लेखनीय है कि सिस्टम की खामियों और एआई के उपयोग की यह रिपोर्ट ऐसे समय में सामने आई है जब कक्षा बारहवीं के हजारों छात्र पुनर्मूल्यांकन पोर्टल पर लॉग इन करने और अपनी शिकायतें दर्ज कराने के लिए संघर्ष कर रहे हैं.

न्यू इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, लगातार तकनीकी खराबी के कारण छात्र बुधवार (3 जून) को ओएसएम पोर्टल तक पहुंचने और आवेदन जमा करने में असमर्थ रहे, जबकि सीबीएसई ने दावा किया कि हजारों आवेदनों पर सफलतापूर्वक कार्रवाई की गई है.

सैकड़ों छात्रों ने तकनीकी गड़बड़ियों की शिकायत की

कृष्णा नाम के एक छात्र ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर लिखा, ‘मुझे पुनर्मूल्यांकन पोर्टल के साथ एक बड़ी समस्या का सामना करना पड़ रहा है. मैंने आवेदन करने की कोशिश में चार घंटे लगाए, और पूरी प्रक्रिया का सावधानी से पालन किया. लेकिन, जब भी मैं सबमिट पर क्लिक करता हूं, तो यह एरर दिखाता है और फेल हो जाता है. मैं पहले ही दो बार कोशिश कर चुका हूं. कृपया मदद करें! इसे ठीक करवाने के लिए मुझे किससे संपर्क करना चाहिए?’

इस पर सीबीएसई के एक्स अकाउंट द्वारा जवाब दिया गया, ‘कृपया अपना डायरेक्ट मैसेज देखें. सीबीएसई की टीम आपकी मदद करेगी.’

मालूम हो कि कृष्णा उन सैकड़ों छात्रों में से एक हैं, जिन्होंने नई लागू की गई डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली में तकनीकी अनियमितताओं की शिकायत करने के लिए सोशल मीडिया का सहारा लिया है.

एक अन्य छात्र अंकुश ने एक्स पर कहा, ‘मैं लॉग इन कर पा रहा हूं और सवाल चुनकर समस्या को फ़्लैग भी कर पा रहा हूं, लेकिन जब भी पेमेंट पेज आता है, तो यह (सिस्टम) बार-बार रिफ्रेश हो जाता है या कोई एरर दिखाता है. मुझे क्या करना चाहिए?’

ऐसे ही और छात्रों की शिकायतों को उठाते हुए एडवोकेट विनीत जिंदल ने कहा, ‘हाल ही में एक मां ने मुझसे अपनी शिकायत साझा की. उनके बेटे को तीन विषयों में ‘री-टेस्ट’ श्रेणी में रखा गया था और उसने 20 मई को अपनी उत्तर पुस्तिकाओं की प्रतियां प्राप्त करने के लिए आवेदन किया था. हालांकि, आज तक भी उसे वे उत्तर पुस्तिकाएं नहीं मिली हैं.’

एक्स पर एक अन्य पोस्ट में उन्होंने लिखा, ‘मुझे सीबीएसई के ओएसएम प्रोसेस में गड़बड़ियों के सबूतों के साथ कई ईमेल मिले हैं. छात्रों को गलत आंसर शीट दिए जाने के दो और मामले भी सामने आए हैं.’

उन्होंने आगे कहा कि जिस किसी को भी ओएसएम पोर्टल में कोई दिक्कत आ रही है, वह सबूतों के साथ उनसे संपर्क करें.

सीबीएसई का जवाब

तकनीकी गड़बड़ियों और सिस्टम में अनियमितताओं को लेकर लगातार और बिना रुके शिकायतें मिलने के बावजूद बोर्ड ने कहा कि बुधवार (3 जून) दोपहर तक 43,980 आवेदन स्वीकार किए जा चुके थे, जिनमें 4,924 वेरिफिकेशन के अनुरोध और 39,056 री-इवैल्यूएशन के आवेदन शामिल थे.

सीबीएसई ने आगे कहा, ‘हमारी टीमें एक सुरक्षित, भरोसेमंद और छात्र-हितैषी प्लेटफॉर्म सुनिश्चित करने के लिए लगातार निगरानी रख रही हैं.’

अख़बार के अनुसार, बोर्ड ने मंगलवार (2 जून) को ‘डिनायल ऑफ सर्विस’ (सेवा से इनकार) साइबर अटैक की भी जानकारी दी, जिसका मकसद पोर्टल को ओवरलोड करना था. इस अटैक में ‘दो मिनट के अंदर 15 लाख हिट्स और 1 लाख से ज़्यादा अनधिकृत फ़ाइल एक्सेस’ हुए.

दिलचस्प बात यह है कि रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने सीबीएसई मामले को ‘साइबर अटैक’ का मामला नहीं माना, बल्कि इसे ‘एथिकल हैकर्स द्वारा कमियों की जांच करने का मामला’ माना – यह जांच तब शुरू हुई जब पोर्टल लाइव होने की कोशिश कर रहा था – और इन कमियों को आखिरकार ठीक कर दिया गया, ऐसा अख़बार द्वारा बताया गया है.

कुछ घंटों बाद जारी एक अपडेट में बोर्ड ने दावा किया कि बुधवार (3 जून) रात 9:30 बजे तक 56,000 से ज़्यादा पुनर्मूल्यांकन और सत्यापन के अनुरोध जमा किए जा चुके थे, और ‘वेबसाइट पर हुआ 38 लाख पैकेट का ‘डिनायल ऑफ सर्विस’ अटैक सफलतापूर्वक नाकाम कर दिया गया.’

बोर्ड ने आगे दावा किया कि तकनीकी टीमें ‘सक्रिय रूप से परफ़ॉर्मेंस की निगरानी कर रही हैं और एक ज़्यादा आसान, तेज़ और निर्बाध अनुभव देने के लिए सुधार कर रही हैं.’

एआई का इस्तेमाल कर पोर्टल में सेंध

इस बीच आईआईटी कानपुर और मद्रास के विशेषज्ञों के पैनल ने यह खुलासा किया है कि सीबीएसई पोर्टल में सुरक्षा खामियों का पता लगाने और उनमें सेंध लगाने के लिए एआई का इस्तेमाल किया गया था. इस खुलासे ने ओएसएम सिस्टम को लेकर चल रहे विवाद को और भी तेज़ कर दिया है.

यह पैनल पिछले एक हफ़्ते से काम कर रहा है और इसने यह सुनिश्चित करने में अहम भूमिका निभाई कि री-इवैल्यूएशन और वेरिफिकेशन पोर्टल 2 जून को लाइव हो जाए.

अख़बार की रिपोर्ट के अनुसार, सीबीएसई के प्लेटफ़ॉर्म्स के अलावा इस पैनल ने जेईई एडवांस्ड पोर्टल में पाई गई विसंगतियों की भी जांच की और उन्हें ठीक किया.

इन सिफारिशों पर कार्रवाई करते हुए इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के समर्थन से सीबीएसई-ओएसएम डेटा को एक निजी वेंडर से हटाकर अमेज़न वेब सर्विसेज (एडब्लूएस) इंडिया के सरकार द्वारा प्रबंधित हिस्से में भेज दिया गया है.

अख़बार ने यह भी बताया कि क्लाउड जैसे एआई टूल्स को लागू करने के साथ-साथ पैनल ने यह भी पाया कि बोर्ड द्वारा डिजिटल मूल्यांकन प्लेटफॉर्म के लिए इस्तेमाल किए जा रहे वेंडर, ‘कोएम्प्ट एडुटेक’ के पास पोर्टल सुरक्षा तंत्र को सुनिश्चित करने के लिए ज़रूरी क्षमताएं या वैचारिक ढांचा मौजूद नहीं था.

कोएम्प्ट एडुटेक की सेवा प्रदाता के रूप में कमियों के संबंध में पैनल के फैसले को 17 वर्षीय एथिकल हैकर सार्थक सिद्धांत के दावों का समर्थन मिला है.

सिद्धांत ने बताया था कि सीबीएसई के प्रस्ताव के लिए अनुरोध (आरएफपी) दस्तावेजों में कई बदलावों के कारण कंपनी को योग्यता प्राप्त करने में मदद मिली, जबकि अन्यथा ऐसा नहीं होता.

आरएफपी की शर्तों में बदलाव के कारण कोएम्प्ट को योग्यता प्राप्त हुई

सिद्धांत ने द वायर से बात करते हुए मई 2025 के आरएफपी, अगस्त 2025 के आरएफपी और सितंबर 2020 के शुद्धिपत्र (corrigendum) के बीच कई बड़े अंतरों पर जोर दिया.

विशेष रूप से टेंडर अनुरोधों के दूसरे दौर के बाद किए गए बदलावों का जिक्र करते हुए उन्होंने तर्क दिया कि दूसरे प्रस्ताव के विपरीत, जिसमें सीबीएसई को डेटा उल्लंघन और तकनीकी समस्याओं जैसी ‘अन्य गलतियों’ के मामले में सेवा प्रदाता को अयोग्य घोषित करने का अधिकार था, अंतिम दस्तावेज ने बोर्ड से यह शक्ति छीन ली.

20 सितंबर के सुधार पत्र में योग्य सेवा प्रदाताओं के लिए ज़रूरी अनुभव की शर्त में भी बदलाव किया गया. इसमें कहा गया कि जिन प्रदाताओं के पास 25 लाख ‘कुल’ उत्तर-पुस्तिकाओं का अनुभव है, वे आवेदन कर सकते हैं.

सिद्धांत ने कहा कि इस बदलाव से कोएम्प्ट एडुटेक जैसी छोटे सेवा प्रदाताओं को फ़ायदा हुआ, क्योंकि वे नए नियमों के तहत आयोजित परीक्षाओं का एक साथ मिला-जुला रिकॉर्ड जमा कर सकते थे.

संशोधित प्रस्ताव के तहत कंपनी के पास कम से कम 100 अनुभवी पेशेवर होने की शर्त को काफ़ी कम करके सिर्फ़ 15 पेशेवर कर दिया गया. इससे एक बार फिर कोएम्प्ट एडुटेक को व्यवस्थित रूप से फ़ायदा हुआ, क्योंकि बोर्ड से निगरानी और जवाबदेही की शक्तियां छीन ली गईं.

सिद्धांत ने कोएम्प्ट एडुटेक के ख़राब प्रदर्शन के पिछले रिकॉर्ड को हटाने के बड़े असर के बारे में भी बात की. यह कंपनी, जिसे पहले ग्लोबरेना टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड के नाम से जाना जाता था, 2019 के तेलंगाना इंटरमीडिएट परीक्षा परिणामों से जुड़े विवाद में शामिल थी, जिसके कारण कई छात्रों ने आत्महत्या कर ली थी.

विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने एक एक्स पोस्ट में कंपनी की पिछली गड़बड़ियों का ज़िक्र करते हुए पूछा था, ‘कंपनी का विवादित अतीत होने के बावजूद उसकी पृष्ठभूमि की जांच क्यों नहीं की गई?’

सिद्धांत ने ज़ोर देकर कहा कि अगर फाइनल रिक्वेस्ट फॉर प्रपोज़ल दस्तावेज़ में वे विवादित बदलाव नहीं किए गए होते, तो कोएम्प्ट एडुटेक लाखों स्टूडेंट्स के बेहद संवेदनशील डेटा को संभालने के लिए कभी भी योग्यता प्राप्त नहीं कर पाता.

अगला कदम

अख़बार के अनुसार, हाल के घटनाक्रमों के बाद एक्सपर्ट पैनल ने भारतीय कंप्यूटर आपातकालीन प्रतिक्रिया टीम (CERT-In) को सीबीएसई पोर्टल का सिक्योरिटी ऑडिट करने का निर्देश दिया है. जबकि इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय, एनटीए और सीबीएसई के साथ मिलकर ‘किसी भी और घटना को रोकने के लिए’ काम करेगा.

खबरों के मुताबिक, विभागों को सलाह दी गई है कि वे खरीद प्रक्रियाओं के दौरान सावधानी बरतें और निजी वेंडरों की क्षमताओं की जांच काफी पहले ही कर लें; यह सलाह राष्ट्रीय परीक्षण प्राधिकरणों की हालिया असफलताओं के बाद दी गई है. ये घटनाक्रम इस बात पर ज़ोर देते हैं कि अगर महत्वपूर्ण सार्वजनिक बुनियादी ढांचे का काम किसी ऐसे वेंडर को सौंप दिया जाए जो उसे संभालने में सक्षम न हो, तो इसके कितने दूरगामी परिणाम हो सकते हैं.