नई दिल्ली: केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने एक व्यक्ति के खिलाफ़ केस दर्ज किया है. उस पर आरोप है कि उसने प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) में अंडर सेक्रेटरी बनकर धोखाधड़ी की.
द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक, आरोपी की पहचान पी. इलांगोवन के रूप में हुई है. प्रधानमंत्री कार्यालय से प्राप्त शिकायत के बाद सीबीआई ने 8 जनवरी 2026 को उसके खिलाफ प्रारंभिक जांच शुरू की थी. शिकायत का आधार एक विवाह निमंत्रण पत्र था, जिसमें इलांगोवन को पीएमओ में कार्यरत अवर सचिव के रूप में जिक्र किया गया था.
जांच में पता चला कि 2023 में आरोपी ने हिंदू धार्मिक और धर्मार्थ बंदोबस्ती विभाग के संयुक्त आयुक्त वी. कुमारेशन को फोन किया था. उसने खुद को पीएमओ अधिकारी बताया था. उसने तमिलनाडु के तिरुवन्नामलाई में अन्नामलाई मंदिर में अपने रिश्तेदारों के लिए ‘वीआईपी दर्शन’ का इंतज़ाम करने का अनुरोध किया था. कुमारेशन ने उसकी बात मान ली थी.
इसके बाद आरोपी ने अपने मित्रों और रिश्तेदारों की ओर से तमिलनाडु के विभिन्न मंदिरों में दर्शन और अन्य व्यवस्थाओं के लिए बार-बार अनुरोध किए. पीएमओ अधिकारी समझकर कुमारेशन ने सद्भावना के आधार पर इन अनुरोधों को पूरा कराया.
इसके बाद इलांगोवन ने कुमारेशन को मना लिया कि वे अपने बेटे की शादी (जो 9 अप्रैल, 2025 को होनी थी) के निमंत्रण पत्र में उसका नाम परिवार के सदस्य के तौर पर शामिल करें, ताकि वह अपने ऑफ़िस से छुट्टी ले सके.
कुमारेशन ने निमंत्रण पत्र पीएमओ को भेजा. बाद में पीएमओ ने यह पुष्टि कि पी. इलांगोवन नाम का कोई व्यक्ति वहां काम नहीं करता, उसके बाद सीबीआई में शिकायत दर्ज कराई.
यह पीएमओ का नाम लेकर फायदा उठाने का पहला मामला नहीं है.
नवंबर 2024 में नोएडा के जेके परिदा नामक व्यक्ति के खिलाफ पीएमओ अधिकारी बनकर लोगों को ठगने के आरोप में सीबीआई ने मामला दर्ज किया था.
प्रधानमंत्री कार्यालय ने आरोप लगाया था कि परिदा खुद को पीएमओ का अधिकारी बताकर लोगों को विभिन्न प्रकार के फायदा या सुविधाएं दिलाने का आश्वासन देता था और बदले में उनसे धनराशि लेता था.
अक्टूबर 2023 में वडोदरा के मयंक तिवारी नाम के व्यक्ति के ख़िलाफ़ केस दर्ज किया था. उन पर आरोप था कि प्रधानमंत्री कार्यालय का निदेशक (सरकारी सलाहकार) होने का दावा किया. वह लोगों को धमकाकर या ‘विवादों को निपटाने’ के लिए पीएमओ के नाम का इस्तेमाल करके करोड़ों रुपये इकट्ठा कर रहा था.
उससे पहले अहमदाबाद निवासी किरण पटेल ने खुद को पीएमओ के अतिरिक्त निदेशक (रणनीति और अभियान) के रूप में पेश किया था, अपने आरएसएस कनेक्शन के बारे में डींगें मारी और जम्मू-कश्मीर में आधिकारिक दौरे करने के लिए जेड सुरक्षा का लाभ उठाया. उनकी पत्नी ने भी ऐसे ही दावे किए थे.
किरण पटेल और उनकी पत्नी के खिलाफ पीएमओ नाम का इस्तेमाल कर लोगों को धमकाने और पैसे वसूलने की आठ शिकायतें थीं. पटेल और उनकी पत्नी पर कई भूमि धोखाधड़ी मामलों में भी आरोप लगाए गए थे.
एक मामले में उसने कथित तौर पर एक व्यक्ति से भूमि विवाद निपटाने का दावा करके कमीशन के रूप में 80 लाख रुपये की धोखाधड़ी की. उन्होंने जमीन और निर्माण गतिविधियों के लिए एक पूर्व भाजपा विधायक को धोखा दिया. पटेल ने छह महीने में चार बार जम्मू-कश्मीर का दौरा किया और दावा किया कि वह आधिकारिक ड्यूटी पर थे. उन्होंने शीर्ष सुरक्षा और अन्य सरकारी सुविधाओं का भी दौरा किया.
मई 2023 में भी महाराष्ट्र की पुणे पुलिस की अपराध शाखा ने खुद को प्रधानमंत्री कार्यालय में तैनात आईएएस अधिकारी बताने वाले एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया था.
गिरफ्तार किए गए व्यक्ति की पहचान 54 वर्षीय वासुदेव निवरुत्ति तायड़े के रूप में हुई थी, जो खुद को पीएमओ में उपसचिव के पद पर तैनात डॉ. विनय देव बताता था. उसका दावा था कि वह खुफिया कामों में शामिल था.
इससे पहले अप्रैल 2023 में उत्तर प्रदेश पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) ने संजय राय ‘शेरपुरिया’ नाम के एक व्यवसायी को लखनऊ से गिरफ्तार किया था. इस शख्स और उसके सहयोगियों पर पीएमओ से जुड़े होने का दावा करते हुए कई लोगों और संगठनों से धन एकत्र करने का आरोप लगा था.
जांच में पता चला था शेरपुरिया ने 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले जम्मू कश्मीर के मौजूदा उपराज्यपाल मनोज सिन्हा को 25 लाख रुपये उधार दिए थे.
