लंदन में सीजेआई से ‘असहमति’ पर किया सवाल बीच में रोका गया, भारतीय उच्चायोग बोला- असभ्य बर्ताव

भारत में असहमति के बढ़ते दमन और सीजेआई सूर्यकांत की हालिया ‘कॉकरोच’ संबंधी टिप्पणी को लेकर लंदन में उनसे एक सवाल पूछा गया. हालांकि, प्रश्न पूरा होने से पहले ही संचालक ने हस्तक्षेप करते हुए कहा कि वे यह सवाल नहीं ले पाएंगी क्योंकि कार्यक्रम का विषय एआई और अंतरराष्ट्रीय क़ानून है.

लंदन विश्वविद्यालय के बिर्कबेक कॉलेज में ‘एआई और अंतरराष्ट्रीय कानून’ विषय पर व्याख्यान देते भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत. (फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: भारत में असहमति के बढ़ते दमन और मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) जस्टिस सूर्यकांत की हालिया ‘कॉकरोच’ संबंधी टिप्पणी को लेकर लंदन में उनसे एक सवाल पूछा गया था. भारतीय उच्चायोग, लंदन ने शुक्रवार (5 जून) को इस घटना को ‘श्रोताओं के असभ्य व्यवहार’ का उदाहरण बताया.

यह सवाल गुरुवार (4 जून) को लंदन विश्वविद्यालय के बर्कबेक परिसर में आयोजित मुख्य न्यायाधीश के व्याख्यान के दौरान पूछा गया था.

सीजेआई सूर्य कांत लंदन विश्वविद्यालय में आर्टिफीशियल इंटेलिजेंस (एआई) विषय पर व्याख्यान दे रहे थे. इस दौरान एक श्रोता ने उनसे असहमति को लेकर सवाल पूछा. हालांकि, प्रश्न पूरा होने से पहले ही कार्यक्रम की संचालक ने हस्तक्षेप करते हुए कहा कि चूंकि यह सवाल एआई से संबंधित नहीं है, इसलिए इसे नहीं लिया जा सकता.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, व्याख्यान के बाद हुए संवाद सत्र के वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किए जा रहे हैं, जिसमे एक महिला को यह कहते हुए सुना जा सकता है, ‘मुझे लगता है कि माननीय न्यायाधीश ने एआई के संदर्भ में लोकतंत्र की रक्षा के भारत के रिकॉर्ड को लेकर कुछ बहुत महत्वपूर्ण बातें कही हैं. लेकिन देश के भीतर और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई कानूनी पर्यवेक्षक यह चिंता जता रहे हैं कि भारत में असहमति के प्रति बढ़ती शत्रुता देखी जा रही है. ऐसा भी प्रतीत होता है कि यह शत्रुता माननीय न्यायाधीश के हाल के बहुचर्चित…’

महिला का सवाल पूरा होने से पहले ही संचालक ने हस्तक्षेप करते हुए कहा, ‘ मैडम, पूरे सम्मान के साथ मुझे खेद है कि मैं यह सवाल नहीं ले पाऊंगी क्योंकि कार्यक्रम का विषय एआई और अंतरराष्ट्रीय कानून है. इसके लिए मैं क्षमा चाहती हूं.’

जब प्रश्न पूछने वाली महिला ने अपनी बात जारी रखने की कोशिश की, तो संचालक ने कहा, ‘मुझे बेहद खेद है, लेकिन हमें आपको यहीं रोकना होगा.’

कार्यक्रम का एक अन्य वीडियो भी सामने आया है, जिसमें एक अलग श्रोता को यह कहते हुए सुना जा सकता है, ‘…कृपया हमें थोड़ा सम्मान दीजिए.’

उच्चायोग का जवाब

इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए भारतीय उच्चायोग, लंदन ने शुक्रवार (6 जून) को जारी एक बयान में कहा कि ‘श्रोताओं का ऐसा असभ्य व्यवहार’ स्वीकार्य नहीं है.

उच्चायोग ने कहा, ‘4 जून 2026 को भारत के माननीय मुख्य न्यायाधीश ने आयोजकों के निमंत्रण पर लंदन विश्वविद्यालय के बर्कबेक परिसर में ‘एआई और अंतरराष्ट्रीय कानून’ विषय पर व्याख्यान दिया. उनके संबोधन के बाद एक जीवंत चर्चा हुई. इसके पश्चात एक व्यक्ति ने कार्यक्रम में व्यवधान डालने का प्रयास किया. श्रोताओं का ऐसा असभ्य व्यवहार स्वीकार्य नहीं है और यह उस सम्मानजनक संवाद की भावना के विपरीत है, जो सार्वजनिक विमर्श का आधार होना चाहिए. विचारों में मतभेद लोकतांत्रिक समाज का स्वाभाविक हिस्सा हैं, लेकिन उन्हें सभ्य और सम्मानजनक तरीके से व्यक्त किया जाना चाहिए.’

सीजेआई की कॉकरोच टिपण्णी

महिला का सवाल सीजेआई की कॉकरोच टिप्पणी से संबंधित था.

सीजेआई ने एक सुनवाई के दौरान सरकार की आलोचना करने वाले युवाओं को ‘कॉकरोच’ और ‘परजीवी’ कहा था. इसके बाद सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नाम की तर्ज पर एक व्यंग्यात्मक संगठन बनाया गया- कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी). सोशल मीडिया पर इस संगठन को जेन-ज़ी का अप्रत्याशित समर्थन मिला और इसके इंस्टाग्राम पर 22 मिलियन फॉलोवर्स हैं.

हालांकि बाद में जस्टिस कांत ने कहा कि उनकी टिप्पणियों को संदर्भ से हटाकर पेश किया गया. 

6 जून को सीजेपी ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन आयोजित कर अपना पहला ऑफलाइन अभियान शुरू किया है.

एआई पर व्याख्यान

अपने व्याख्यान में मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने एआई को एक ऐसी वास्तविकता बताया जो शासन, व्यापार, युद्ध, संचार, लोक प्रशासन तथा न्यायिक और संप्रभु शक्तियों के प्रयोग को नए सिरे से आकार दे रही है. उन्होंने जोर देकर कहा कि तकनीकी शक्ति को ‘संवैधानिक मूल्यों, लोकतांत्रिक वैधता और मानवीय गरिमा के प्रति जवाबदेह’ बने रहना चाहिए.

उन्होंने यह भी कहा कि इस दशक में लिए जाने वाले फैसले तकनीक, सत्ता, स्वतंत्रता और न्याय के बीच भविष्य के संबंधों को निर्धारित करेंगे. उनके अनुसार, यह आधुनिक दौर में अंतरराष्ट्रीय कानून के सामने मौजूद सबसे महत्वपूर्ण चुनौतियों में से एक है.