यूपी: पेपर लीक आरोपों का विरोध कर रहे छात्रों के समर्थन में आए कोचिंग सेंटर योगी सरकार के निशाने पर

प्रयागराज विकास प्राधिकरण ने फायर सेफ्टी नियमों का पालन न करने के आरोप में शहर के तीन कोचिंग संस्थानों के परिसरों को सील कर दिया. हालांकि, वहां के शिक्षकों को लगता है कि मामला इससे कहीं ज़्यादा है. तीनों कोचिंग संस्थानों के मालिकों का आरोप है कि यह कार्रवाई जान-बूझकर, और यह लेखपाल परीक्षा में कथित पेपर लीक के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन कर रहे छात्रों का समर्थन करने के जवाब में की गई थी.

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एग्जामपुर कोचिंग के बाहर लगा एक नोटिस, जिसमें बताया गया है कि परिसर को सील कर दिया गया है. (सभी फोटो: आकांक्षा कुमार/द वायर)

प्रयागराज: उत्तर प्रदेश के प्रयागराज शहर के बीचों-बीच स्थित तेलियरगंज कॉलोनी के चहल-पहल वाले बाज़ार में एक संकरी और धूल भरी सड़क पर अजीब सी शांति थी. बस कुछ-कुछ देर में तेज़ी से गुज़रते दो-पहिया वाहनों की आवाज़ ही सुनाई दे रही थी.

यहां रेडीमेड कपड़े बेचने वाली कुछ दुकानों के बीच कंप्यूटर टाइपिंग सिखाने वाला एक साधारण-सा संस्थान भी था. संस्थान के बाहर लगे बोर्ड पर लिखा था कि वहां टैली (Tally) कंप्यूटर लैंग्वेज और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के कोर्स सिखाए जाते हैं.

वहीं, सीढ़ियों के नीचे कंप्यूटर टाइपिंग इंस्टिट्यूट के अंदर विमल* इतिहास की क्लास ले रहे थे. उन्होंने नीले रंग की शर्ट पहनी थी, जिसकी सामने वाली जेब पर ‘एग्जामपुर’ (Exampur) लिखा था. यह क्लास एक घंटे का ऑनलाइन सत्र था, जिसमें दिल्ली सल्तनत की शुरुआत के बारे में बताया जाना था.

विमल ने अपने छात्रों को बता रहे थे, ‘1707 में औरंगज़ेब की मौत के बाद 1857 तक मुग़ल साम्राज्य की बागडोर अंग्रेज़ों के हाथों में आ गई थी. इस बदलाव की अहम घटना 1858 में इलाहाबाद के मिंटो पार्क में हुई वह मशहूर घोषणा थी, जिसमें महारानी विक्टोरिया को सत्ता सौंपने का ऐलान किया गया था.’

ज़ाहिर है, अब इलाहाबाद का मतलब प्रयागराज है, जिसका नाम आदित्यनाथ सरकार ने 2018 में बदल दिया था.

विमल एक कामचलाऊ स्टूडियो में दिल्ली सल्तनत पर क्लास ले रहे हैं.

इस बीच अचानक विमल ने अपनी बात का रुख़ बदल लिया. उन्होंने मानो खुद से ही बात करते हुए कहा, ‘आजकल कुछ लोग शिक्षकों से कह रहे हैं कि वे सिर्फ़ पढ़ाने के अपने काम पर ध्यान दें. लेकिन यह बात ध्यान में रखनी चाहिए कि अगर कुछ गलत हो रहा है, तो हमें उसके खिलाफ़ आवाज़ उठानी चाहिए.’

लेक्चर के अगले हिस्से पर बढ़ने से पहले उन्होंने आगे कहा, ‘याद रखिए कि 1857 का विद्रोह इसलिए नाकाम रहा था क्योंकि पढ़ा-लिखा वर्ग उससे अनजान था.’

विमल के सामने वाली बेंच खाली पड़ी थीं. ऐसा इसलिए था क्योंकि वह एक कामचलाऊ स्टूडियो से पढ़ा रहे थे. उनके ज़्यादातर छात्र दूर से ही लेक्चर में शामिल हो रहे थे और एक डिजीकैम के ज़रिए उन्हें देख रहे थे, जबकि उनके ठीक पीछे लगे 75-इंच के स्मार्टबोर्ड पर नोट्स दिखाए जा रहे थे.

4 जून की शाम को जब यह रिपोर्टर विमल से मिलीं, तो वह कुछ दिनों के ब्रेक के बाद फिर से पढ़ाना शुरू कर चुके थे.

31 मई को प्रकाशित दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, प्रयागराज विकास प्राधिकरण (पीडीए) ने फायर सेफ्टी नियमों का पालन न करने के आरोप में तीन कोचिंग संस्थानों को सील कर दिया था. इनमें एग्जामपुर कोचिंग भी शामिल था.

तीनों कोचिंग संस्थानों के मालिकों का आरोप है कि यह कार्रवाई जान-बूझकर की गई थी और यह लेखपाल परीक्षा में कथित पेपर लीक के खिलाफ विरोध कर रहे छात्रों का समर्थन करने के जवाब में की गई थी.

मालूम हो कि ये परीक्षाएं लेखपालों की भर्ती के लिए आयोजित की जाती हैं, जो राजस्व विभाग में ग्राम स्तर के क्लर्क होते हैं और आमतौर पर भूमि अभिलेखों के रखरखाव और संपत्ति हस्तांतरण को दर्शाने वाली प्रविष्टियों (mutation entries) का रिकॉर्ड रखने के लिए जिम्मेदार होते हैं.

एक अस्थायी लेक्चर रूम में द वायर ने एक्जामपुर कोचिंग से जुड़े दो शिक्षकों से बात करके इस घटनाक्रम पर उनका पक्ष और पेपर लीक के विरोध का समर्थन करने को लेकर उनका पक्ष जानने की कोशिश की.

एग्जामपुर कोचिंग के एक कामचलाऊ स्टूडियो के अंदर का दृश्य.

‘बैच की संख्या 50% कम हुई’

द वायर से बात करते हुए विमल ने कहा, ‘परिसर को सील करने का मतलब है कि हम अपने रेगुलर स्टूडियो से ऑनलाइन लेक्चर नहीं ले सकते, इसलिए हम दूसरी जगहों से क्लास ले रहे हैं.’

उन्होंने आगे कहा, ‘अभी हालात ऐसे हैं कि जिन जगहों पर हम अस्थायी स्टूडियो बनाने की कोशिश कर रहे हैं, वे मना कर रही हैं. उन्हें डर है कि हमारी वजह से उन्हें किसी तरह की परेशानी का सामना करना पड़ सकता है.’

पीडीए की कार्रवाई के बाद एग्जामपुर कोचिंग के बैच में छात्रों की संख्या लगभग 50% कम हो गई है. जहां फिजिकल बैच में पहले करीब 400 छात्र होते थे, उन्हें अब ऑनलाइन कर दिया गया है, जिससे हर बैच में उपस्थिति घटकर 100-150 रह गई है.

कोचिंग में स्मार्टबोर्ड और पढ़ाई के दूसरे सामान मौजूद थे, जिससे मेंटर्स परीक्षा से पहले ‘मैराथन रिविज़न सेशन’ करवा पाते. ऑनलाइन मोड में अचानक हुए इस बदलाव की वजह से वे रेगुलर सेशन रुक गए हैं.

हाशिमपुर रोड पर सील किए गए एग्जामपुर कोचिंग सेंटर में 18-20 स्टूडियो भी थे- जिससे उन्हें ऐसी जगह मिल रही थी जो कामचलाऊ क्लासरूम में मिलना नामुमकिन है.

विमल जो लेक्चर दे रहे थे, वह एक सीरीज़ का हिस्सा था, जो यूपी पुलिस कॉन्स्टेबल परीक्षा में शामिल होने वाले छात्रों की मदद करता. यह परीक्षा 8 से 10 जून के बीच हुई है.

एग्जामपुर कोचिंग के विमल, जो हिस्ट्री की क्लास ले रहे हैं.

एग्जामपुर के ही एक अन्य टीचर निपुण*, जो 2018 से पढ़ा रहे हैं, ने भी ऐसी ही चिंताएं ज़ाहिर कीं.

प्रयागराज के कटरा इलाके में 29 मई को हुए कैंडललाइट मार्च का ज़िक्र करते हुए निपुण ने कहा, ‘यह एक सांकेतिक मार्च था, जिसका मकसद यह सुनिश्चित करना था कि सत्ता में बैठे लोग छात्रों की चिंताओं को सुनें.’

21 मई को लेखपाल परीक्षा में शामिल हुए लगभग 5,000 छात्रों ने कथित पेपर लीक के विरोध में मनमोहन पार्क चौराहे से चंद्रशेखर आज़ाद पार्क तक मार्च किया.

प्रदर्शनकारियों के साथ वे उम्मीदवार भी शामिल हुए जिन्होंने हाल ही में 14 और 15 मार्च को यूपी सब-इंस्पेक्टर परीक्षा दी थी. उनकी मांग थी कि उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती और प्रोन्नति बोर्ड (यूपीपीआरपीबी) बिना किसी देरी के स्कोर कार्ड जारी करे.

निपुण ने कहा, ‘अभी जो हो रहा है, उसमें हमारा संस्थान बंद होने की वजह से छात्रों को बाहर निकाल दिया गया है, जबकि शिक्षकों को लग रहा है कि उन्हें परेशान किया जा रहा है. एक तरफ तो आप नौकरियां पैदा नहीं कर रहे हैं और दूसरी तरफ आपने 400 लोगों की रोजी-रोटी छीन ली है.’

निपुण एग्जामपुर कोचिंग के उन कर्मचारियों की बात कर रहे थे, जो उनके मुताबिक अचानक बेरोज़गार हो गए हैं. निपुण ने आगे कहा, ‘ज़रा देखिए कि हमें किस तरह छिपकर क्लास लेने के लिए मजबूर किया जा रहा है? इन्हीं हालात में हम पढ़ा रहे हैं.’

‘छात्रों के साथ खड़े होना हमारी नैतिक ज़िम्मेदारी थी’

हाशिमपुर रोड पर जब से एग्जामपुर कोचिंग बंद हुआ है, तब से उत्तर प्रदेश पुलिस के दो कॉन्स्टेबल इसकी सील की गई जगह की रखवाली कर रहे हैं.

गेट के बाहर पीडीए का एक नोटिस बोर्ड लगा है. उस पर लिखा है: ‘ज़रूरी सूचना: यह जगह अनधिकृत होने के कारण सील कर दी गई है. सील तोड़ना, मरम्मत का काम करना, या इस प्रॉपर्टी को खरीदने-बेचने का कोई भी लेन-देन करना गैर-कानूनी माना जाएगा और इसके लिए उचित कार्रवाई की जाएगी.’

प्रयागराज में पीडीए ऑफिस के बाहर होर्डिंग.

जब मैं नोटिस बोर्ड की तस्वीरें ले रही थी, तो पुलिस के एक जवान ने मेरी तस्वीर खींची. बाद में उन्होंने पूछा कि मैं किस संस्था का प्रतिनिधित्व करती हूं. जब मैं बिल्डिंग के बाहर एग्जामपुर कोचिंग के कुछ स्टाफ सदस्यों से बात कर रही थी, तो पुलिस का एक तीसरा जवान पास ही खड़ा था.

एग्जामपुर कोचिंग से जुड़े एक स्टाफ सदस्य ने कहा, ’21 मई को लेखपाल परीक्षा खत्म होने के बाद कुछ वीडियो वायरल हुए थे, जिनसे पता चला कि कुछ सेंटरों पर कुछ उम्मीदवार परीक्षा खत्म होने के तय समय (दोपहर 12 बजे) के लगभग एक घंटे बाद बाहर निकल रहे थे. इससे छात्रों को शक हुआ.’

उल्लेखनीय है कि लखनऊ, देवरिया और मुज़फ़्फ़रनगर के परीक्षा केंद्रों पर ऐसी घटनाओं को दिखाने वाले वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गए थे.

हालांकि, 24 मई को आदित्यनाथ सरकार ने सूचना और जनसंपर्क विभाग के ज़रिए जारी एक बयान में इन आरोपों को खारिज कर दिया.

प्रेस नोट में कहा गया, ‘लेखपाल परीक्षा शांतिपूर्ण और निष्पक्ष तरीके से आयोजित की गई है, फिर भी कुछ लोग गलत इरादे से गलत जानकारी फैला रहे हैं, जो आपत्तिजनक है. ऐसे लोगों के खिलाफ़ पुलिस सख्त कार्रवाई करेगी.’

एग्जामपुर कोचिंग के संस्थापक विवेक कुमार ने द वायर से फोन पर बात करते हुए कहा, ‘कुछ केंद्रों के वीडियो वायरल हुए थे जिनमें परीक्षा हॉल से बाहर निकल रहे उम्मीदवारों ने देरी का कारण पूछे जाने पर कोई जवाब नहीं दिया. असल में यूपीएसएसएससी को ऐसे केंद्रों की जांच करनी चाहिए थी और सीसीटीवी फुटेज जारी करना चाहिए था. अविश्वास के इस माहौल को दूर करने के लिए कुछ किया जाना चाहिए था. इसके बजाय, इसने उन छात्रों के लिए एक चिंगारी का काम किया जिन्हें लगा कि उनकी चिंताओं को नहीं सुना जा रहा है.’

ऑनलाइन क्लास लेने के लिए डिजीकैम का इस्तेमाल किया जा रहा है.

उल्लेखनीय है कि उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (यूपीएसएसएससी) वह संस्था है जिसने लेखपाल परीक्षा आयोजित की थी.

विवेक कुमार ने रिपोर्टर को बताया, ‘हम इन छोत्रों के मार्गदर्शन में लगभग 15-18 घंटे बिताते हैं, इसलिए एक भावनात्मक जुड़ाव बन जाता है. कोचिंग क्लास के लिए प्रयागराज आने वाले ज़्यादातर छात्र साधारण बैकग्राउंड से होते हैं, और हमें लगा कि उनके साथ खड़े होना हमारी नैतिक ज़िम्मेदारी है.’

कुमार से यह सवाल पूछा गया था कि एक कोचिंग मालिक होने के नाते वह पेपर लीक के मुद्दे पर इतने मुखर क्यों रहे हैं.

एग्जामपुर कोचिंग के गेट के बाहर चिपकाए गए एक और एक-पेज के नोटिस में पीडीए ने परिसर को सील करने के कारण बताए हैं.

विवेक कुमार को भेजे गए 30 मई, 2026 के नोटिस में कहा गया है, ‘250 वर्ग मीटर के एरिया में बने निर्माण – जिसमें बेसमेंट, ग्राउंड फ्लोर और दो ऊपरी मंज़िलें शामिल हैं – के संबंध में, 11 मई, 2026 को एक नोटिस जारी किया गया था. इसमें आपको उत्तर प्रदेश शहरी योजना और विकास अधिनियम, 1973 की धारा 14 और 15 के तहत नियमों के उल्लंघन के बारे में सूचित किया गया था.’

उल्लेखनीय है कि इस एक्ट की धारा 14 ज़मीन के विकास से जुड़े नियमों के बारे में है, वहीं धारा 15 लोकल डेवलपमेंट अथॉरिटी के संबंधित वाइस चेयरमैन से मंज़ूरी लेने से जुड़ी है.

द वायर से बात करते हुए कुमार ने पहले कोई नोटिस मिलने की बात से इनकार किया.

कुमार ने कहा, ‘हमें पहले वाले नोटिस के बारे में कोई जानकारी नहीं थी. इस बार भेजे गए नोटिस में आग से सुरक्षा और जनरेटर से जुड़ी चिंताएं जताई गई हैं. अगर हमें सिर्फ़ 3-4 दिन भी दिए जाते, तो हम इस मसले को सुलझाने की कोशिश करते.’

‘पहले ही नोटिस जारी किया गया था’: पीडीए अधिकारी

इस संबंध में द वायर ने पीडीए सेक्रेटरी विनीत कुमार सिंह से संपर्क किया, लेकिन उन्होंने कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया.

सिविल लाइन्स में प्रयागराज विकास प्राधिकरण का कार्यालय.

पीडीए के एक अन्य अधिकारी, जिन्होंने अपना नाम गुप्त रखने का अनुरोध किया और जो तीनों कोचिंग संस्थानों को नोटिस जारी करने की प्रक्रिया से जुड़े थे, ने  रिपोर्टर को बताया, ‘कुछ निर्माण कार्यों के लिए आग से संबंधित ‘नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट’ (एनओसी) की आवश्यकता होती है, और यूपी अर्बन प्लानिंग एंड डेवलपमेंट एक्ट, 1973 की धारा 15(1) के तहत ‘कंप्लीशन सर्टिफिकेट’ अनिवार्य है. इस संबंध में समय-समय पर नोटिस जारी किए गए थे.’

अधिकारी के अनुसार, एक्जामपुर कोचिंग को जारी किया गया सबसे हालिया नोटिस 27 नवंबर, 2025 का था.

अधिकारी ने कहा, ‘हम तय प्रक्रिया का पालन कर रहे हैं. रिहायशी इलाके के 500 मीटर के दायरे में किसी भी निर्माण कार्य को कुछ नियमों और कानूनों का पालन करना होता है.’

उनसे यह पूछा गया था कि क्या परिसर को सील करने का फैसला कोचिंग संस्थानों द्वारा छात्रों के विरोध-प्रदर्शन का समर्थन करने से जुड़ा था.

इस संबंध में इलाहाबाद हाईकोर्ट के सीनियर वकील कमल कृष्ण रॉय ने कहा, ‘कानून के मुताबिक अगर कोई निर्माण सरकारी ज़मीन, नाले या सड़क या गली पर कब्ज़ा करके नहीं किया गया है, तो मालिक को आम तौर पर तय मुआवज़े और जुर्माने (अगर कोई हो) के साथ एक संशोधित नक्शा जमा करना होता है. तोड़-फोड़ की कार्रवाई आखिरी विकल्प होती है.’

रॉय, जो मानवाधिकार कार्यकर्ता भी हैं, 2022 में प्रयागराज में पीडीए द्वारा ‘वेलफेयर पार्टी ऑफ इंडिया’ के नेता जावेद मोहम्मद का घर तोड़े जाने के बाद प्रमुख आवाज़ों में से एक थे. यह तोड़-फोड़ तब हुई जब जावेद ने तत्कालीन भाजपा प्रवक्ता नूपुर शर्मा द्वारा पैगंबर मोहम्मद पर की गई टिप्पणी के विरोध में प्रदर्शन का आह्वान किया था.

उस दौरान न्यूज़क्लिक ने अपनी रिपोर्ट में बताया था कि जावेद मोहम्मद का प्रतिनिधित्व करने वाले रॉय ने आरोप लगाया था कि उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा एफआईआर में जावेद को मुख्य आरोपी बनाए जाने के बाद पीडीए ने बैकडेट में तोड़-फोड़ का नोटिस जारी किया था.

‘हमने 1 रुपये में बैच शुरू किए हैं, आप मुझे शिक्षा माफिया कह सकते हैं’

लेखपाल परीक्षा में कथित पेपर लीक को लेकर छात्रों के विरोध-प्रदर्शन के एक हफ़्ते से भी कम समय में प्रयागराज के सर्किट हाउस में आम आदमी पार्टी नेता संजय सिंह की एक जनसभा में बाधा डाली गई और विरोध-प्रदर्शन का नेतृत्व करने वाले दो छात्र नेताओं- पंकज पांडे और आशुतोष पांडे को उत्तर प्रदेश पुलिस ने गिरफ़्तार कर लिया.

1 जून को प्रदर्शनकारी छात्रों ने एक और कैंडललाइट मार्च करने की योजना बनाई थी. लेकिन छात्र नेताओं की गिरफ्तारी के बाद, जब यह रिपोर्टर उस शाम प्रयागराज के गोविंदपुर इलाके में तय जगह पर पहुंचीं, तो वहां कोई छात्र प्रदर्शनकारी मौजूद नहीं था और जगह खाली पड़ी थी.

वहीं, अब 12 जून को लखनऊ में पेपर लीक के मुद्दे पर एक बड़े विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया गया है.

पेपर लीक के मामले पर छात्रों के साथ संजय सिंह की बातचीत के दौरान मौजूद वकील रॉय ने पहले द वायर को बताया था, ‘हम अधिकारियों और सरकार से पेपर लीक को रोकने की मांग कर रहे थे, लेकिन सरकार हमसे कह रही थी कि हम इस मुद्दे पर बात करना ही बंद कर दें. जिस हॉल में बैठक हो रही थी, वहां अधिकारियों के कहने पर अचानक लाइट और एसी बंद कर दिया गया.’

5 जून 2026 के एक पत्र, जिसकी एक कॉपी द वायर ने देखी है, में आप नेता संजय सिंह ने राज्यसभा चेयरमैन से प्रयागराज के एडीएम (सिटी) सत्यम मिश्रा के खिलाफ कार्रवाई करने का आग्रह किया है. ​​

सिंह ने आरोप लगाया कि जब एक सांसद पेपर लीक और परीक्षा रद्द होने के आरोपों को लेकर छात्रों की शिकायतें सुन रहे थे, तब इस अधिकारी ने उनके काम में बाधा डालने की कोशिश की.

वहीं, कामचलाऊ स्टूडियो में विमल और निपुण आने वाले मुश्किल समय के लिए खुद को तैयार कर रहे हैं. अपने कोचिंग संस्थान के एसी से दूर, ये दोनों 40°C से ज़्यादा तापमान में पंखे के नीचे लेक्चर लेने के आदी हो रहे हैं. अगर आने वाले दिनों में छात्रों का आंदोलन जारी रहता है, तो वे उसे अपना समर्थन देना जारी रखने की योजना बना रहे हैं.

कोचिंग संस्थानों में आने वाले छात्रों की मदद के लिए शुरू की गई पहलों के बारे में बात करते हुए निपुण ने कहा, ‘हमने छात्रों के लिए 1 रुपये, 11 रुपये और 99 रुपये वाले बैच शुरू किए हैं. आप मुझे ‘शिक्षा माफिया’ कह सकते हैं.’

एक्जामपुर कोचिंग की सस्ती ऑनलाइन क्लास में अक्सर एक ही ऑनलाइन सेशन में 1 लाख तक छात्र शामिल होते हैं. विमल ने आगे कहा, ‘फिर भी ऐसे छात्र भी आते हैं जो कहते हैं कि वे 99 रुपये भी देने की स्थिति में नहीं हैं.’

निपुण ने कहा, ‘अगर परीक्षाएं ही निष्पक्ष तरीके से नहीं हो सकतीं, तो पढ़ाने का क्या मतलब है?’

अपने वाट्सऐप नंबर पर प्रतियोगी परीक्षा के उम्मीदवारों द्वारा भेजे गए संदेशों को देखते हुए निपुण एक ऐसे संदेश पर रुके जिसने उन्हें बेहद परेशान कर दिया.

निपुण ने आगे कहा, ‘ज़रा सोचिए, एक छात्र जो परीक्षा देने गया है, उसके लिए यह आखिरी मौका है (परीक्षाओं में आयु सीमा के अनुसार), और अगर वही प्रश्नपत्र लीक हो जाए, तो उसका पूरा जीवन बर्बाद हो जाएगा.’

इसके बाद उन्होंने अपने मोबाइल फोन पर रिपोर्टर को एक छात्र का मैसेज दिखाया, जिसने उन्हें तुरंत अपने वकील से संपर्क करने के लिए प्रेरित किया.

हाल ही में एसएससी जीडी परीक्षा में प्रश्नपत्र लीक होने के आरोपों के बाद प्रयागराज के एक परीक्षा केंद्र में तोड़फोड़ के वीडियो के नीचे, छात्र ने निपुण को संदेश भेजा था: ‘प्रयागराज का इवेंट. इसके लिए क्या करना चाहिए? आत्महत्या कर लेनी चाहिए?’

द वायर ने दो अन्य कोचिंग संस्थानों के मालिकों- मारूफ अहमद (सुपर क्लाइमेक्स कोचिंग) और रवि तिवारी (टारगेट वन कोचिंग)- से संपर्क किया था. हालांकि वे शुरू में बात करने के लिए सहमत हो गए थे, लेकिन जब रिपोर्टर ने उनसे दोबारा संपर्क किया, तो उनके फोन नंबर बंद थे.

*पहचान छिपाने के लिए कुछ नाम बदल दिए गए हैं.

(अगर आप किसी ऐसे व्यक्ति को जानते हैं– दोस्त या परिजन– जो मानसिक रूप से परेशान हैं और आत्महत्या का जोखिम है, तो कृपया उनसे संपर्क करें. सुसाइड प्रिवेंशन इंडिया फाउंडेशन के पास उन फोन नंबरों की एक सूची है जिन पर कॉल करके वे गोपनीयता से बात कर सकते हैं. टाटा इंस्टिट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज द्वारा संचालित परामर्श सेवा, आईकॉल ने देश भर के चिकित्सकों/थेरेपिस्ट की एक क्राउडसोर्स्ड सूची तैयार की है. आप उन्हें नज़दीकी अस्पताल भी ले जा सकते हैं.)

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