नई दिल्ली: हरियाणा की शिक्षिका और कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) की समर्थक सुलेखा दलाल के खिलाफ जारी निलंबन आदेश को वापस ले लिया गया है. पार्टी के एक प्रवक्ता ने दावा किया कि सीजेपी द्वारा इस कार्रवाई की सार्वजनिक रूप से आलोचना किए जाने के बाद यह फैसला लिया गया.
दलाल के खिलाफ निलंबन आदेश बुधवार (10 जून) को जारी किया गया था, जो उनके नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर आयोजित पार्टी के विरोध प्रदर्शन में शामिल होने के बाद आया था. हालांकि, बाद में सीजेपी के प्रवक्ता ने एक्स पर पोस्ट कर बताया कि निलंबन ‘रद्द कर दिया गया’ है.
Very happy to inform you all that Sulekha Dalal’s suspension was revoked about 40 minutes ago. Better sense has prevailed.
This is a victory for every teacher, student and citizen who believes that no one should be punished for peacefully standing with the youth and asking… https://t.co/lGxWWTbx3Y
— Saurav Das (@SauravDassss) June 12, 2026
सीजेपी के प्रवक्ता सौरव दास ने एक्स पर लिखा, ‘आप सभी को यह बताते हुए बहुत खुशी हो रही है कि लगभग 40 मिनट पहले सुलेखा दलाल का निलंबन वापस ले लिया गया. समझदारी की आखिरकार जीत हुई. यह हर शिक्षक, छात्र और नागरिक की जीत है जो यह मानता है कि युवाओं के साथ शांतिपूर्वक खड़े होने और सवाल पूछने के लिए किसी को दंडित नहीं किया जाना चाहिए.’
बता दें कि जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी (डीईईओ) बिजेंद्र हुड्डा द्वारा जारी आदेश में कहा गया था कि सुलेखा दलाल को 8 जून से निलंबित किया जाता है. उन पर सेवा आचरण नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाया गया था, क्योंकि उन्होंने ऐसे कार्यक्रम में भाग लेने से पहले आवश्यक अनुमति नहीं ली थी.
हिंदुस्तान टाइम्स के अनुसार, इन घटनाक्रमों के सामने आने के तुरंत बाद सीजेपी के आधिकारिक संचार प्रकोष्ठ ने एक बयान जारी कर इस आदेस को ‘हर नागरिक के बोलने, एकत्र होने, सवाल पूछने और असहमति व्यक्त करने के संवैधानिक अधिकार पर हमला’ बताया था.
बयान में कहा गया, ‘देश के युवाओं के साथ खड़े होने के कारण किसी भी शिक्षक को दंडित नहीं किया जाना चाहिए. किसी भी नागरिक को अपनी आजीविका और अंतरात्मा की आवाज़ में से किसी एक को चुनने के लिए मजबूर नहीं किया जाना चाहिए. और कोई भी सरकार इतनी असुरक्षित नहीं होनी चाहिए कि वह किसी शांतिपूर्ण सार्वजनिक विरोध प्रदर्शन में भागीदारी को कदाचार मानने लगे.’
पार्टी ने आगे कहा, ‘अधिकारियों को यह भी सार्वजनिक करना चाहिए कि उनके खिलाफ कार्रवाई के असली कारण क्या थे. ‘आचरण नियमों’ का अस्पष्ट हवाला असहमति को दंडित करने का हथियार नहीं बन सकता.’
बयान में विरोध प्रदर्शन करने और कमजोर वर्गों के साथ खड़े होने के संवैधानिक अधिकारों को दोहराते हुए कहा गया कि ये राज्य द्वारा दिए गए ‘उपहार’ नहीं, बल्कि नागरिकों को प्राप्त ‘गारंटी’ हैं.
अखबार के अनुसार, दलाल ने कहा था कि निलंबन आदेश में उनके खिलाफ कार्रवाई का कोई स्पष्ट कारण नहीं बताया गया है, इसलिए उन्होंने इस आदेश को अदालत में चुनौती देने का फैसला लिया था.
उन्होंने कहा, ‘मैं दिल्ली केवल उन बच्चों के लिए आवाज उठाने गई थी, जो प्रश्नपत्र लीक होने के कारण परेशान हो रहे हैं. मैंने सिर्फ एक अनुरोध किया था, क्योंकि मैं भी ऐसे बेटे की मां हूं जो प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहा है.’
