नोएडा श्रमिक आंदोलन मामले में गिरफ़्तार नाबालिग जुवेनाइल होम से जमानत पर रिहा

नोएडा श्रमिक आंदोलन मामले में गिरफ्तार 16 वर्षीय किशोर को छह दिन जुवेनाइल होम में रखने के बाद 18 जून को जमानत पर रिहा कर दिया गया. इसके पहले उन्हें करीब दो महीने तक वयस्क आरोपियों के साथ जेल में रखा गया था. परिवार ने मारपीट और कानूनी प्रक्रियाओं के उल्लंघन के आरोप लगाए हैं.

16 वर्षीय महेंद्र(बाएं) का हाथ बांध कर व्यस्कों की तरह कोर्ट में पेश करती यूपी पुलिस. (फोटो: अरेंजमेंट)

नई दिल्ली: नोएडा श्रमिक आंदोलन मामले में गिरफ़्तार 16 वर्षीय नाबालिग को गुरुवार (18 मई) को जुवेनाइल होम से रिहा कर दिया गया. नाबालिग को पिछले छह दिनों से जुवेनाइल होम  में रखा गया था. इसके पहले दो महीनों तक उन्हें वयस्क आरोपियों के साथ जेल में रखा गया था. उनकी जमानत राशि 45 हज़ार रुपए से घटाकर 30 हज़ार रुपये कर दी गई, जिसके बदले एक मोटरसाइकिल के कागज़ अदालत में जमानत के तौर पर जमा किए गए.

द वायर हिंदी ने मंगलवार (16 जून) को नितिन (बदला हुआ नाम) की गिरफ्तारी से जुड़ी खबर प्रकाशित की थी. नितिन को नोएडा मजदूर आंदोलन के संबंध में 14 अप्रैल को नोएडा के भंगेल इलाके से हिरासत में लिया गया था. नितिन के आधार कार्ड में उनकी उम्र 16 वर्ष दर्ज है, इसके बावजूद करीब दो महीनों तक उन्हें वयस्कों के जेल में रखा गया. बाद में ओसिफिकेशन (अनुमानित उम्र का पता लगाने के लिए किया जाने वाला जांच) जांच में भी उनकी उम्र 16 वर्ष आंकी गई.

नितिन के वकील के अनुसार, गिरफ्तारी और रिमांड से जुड़े दस्तावेज़ों में उसकी उम्र 25 वर्ष दर्ज की गई थी. यही कारण था कि उन्हें शुरू में वयस्क आरोपी की तरह जेल भेजा गया.

नितिन के वकील माणिक गुप्ता ने द वायर हिंदी को बताया, ‘नितिन को 14 अप्रैल को एक फोन कॉल आया और कहा गया कि उसका कोई पार्सल आया है. वह उसने कहा कि उसने कोई पार्सल नहीं मंगाया है, तब भी उसे बाहर आने के लिए कहा गया. नितिन के अनुसार, वह जब बताए गए स्थान पर पहुंचा तो वहां पुलिस मौजूद थी और उसे अपने साथ ले गई.’

इसके बाद करीब दो महीनों तक वयस्कों के साथ जेल में रखे जाने के बाद शुक्रवार (12 जून) को उन्हें किशोर गृह (जुवेनाइल होम) में स्थानांतरित किया गया. 6 जून को उनकी ओसिफिकेशन (अनुमानित उम्र का पता लगाने के लिए किया जाने वाला जांच) जांच का सर्टिफिकेट जारी किया गया था, जिसमें नाबालिग साबित होने के बाद भी उन्हें 6 दिन तक जेल में रखा गया.

नितिन के वकील और उनके भाई दिनेश का कहना है कि हिरासत में लेने के बाद उनके साथ मारपीट भी की गई. 

जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड में दायर आवेदन में यह दर्ज है कि नितिन को गिरफ्तार किए जाने के बाद न तो उनके परिवार को इसकी सूचना दी गई और न ही उन्हें किसी वकील से संपर्क करने दिया गया. आवेदन में कहा गया है कि गिरफ्तारी के लगभग एक महीने बाद 15 मई को वर्तमान वकील की उनसे मुलाकात हुई और तब ही उन्हें कानूनी प्रतिनिधित्व मिला.

आवेदन में यह भी आरोप लगाया गया है कि नितिन को अदालत में जंजीरों से बांधे हुए पेश किया गया था. माणिक गुप्ता ने द वायर हिंदी से इस बात की पुष्टि की है कि उन्होंने ख़ुद नितिन को जंजीरों में बंधा देखा है.

ज्ञात हो कि किसी नाबालिग को इस तरह से जंजीरों में बांधना किशोर न्याय कानून और सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देशों का उल्लंघन है.

अदालत से 29 मई को मिली थी जमानत 

बीते 29 मई को गौतम बुद्ध नगर की एक सत्र अदालत ने नितिन को जमानत दे दी. अपने आदेश में अदालत ने कहा कि नितिन का नाम एफआईआर में नहीं था. अदालत ने यह भी नोट किया कि रिकॉर्ड पर ऐसा कोई सीसीटीवी फुटेज, वीडियो या फोटोग्राफिक साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया जिससे घटना में उसकी विशिष्ट भूमिका स्थापित होती हो.

अदालत ने यह भी कहा कि अभियोजन पक्ष के जिन गवाहों के बयान रिकॉर्ड पर हैं, वे नितिन की भूमिका को स्पष्ट रूप से स्थापित नहीं करते. इसी आधार पर अदालत ने किशोर की जमानत को मंजूरी दी.

हालांकि, जमानत आदेश के बावजूद नितिन हिरासत से बाहर नहीं आ पा रहे थे. किशोर न्याय बोर्ड में दाखिल आवेदन के अनुसार, नितिन का परिवार इतना गरीब है कि वह जमानत के लिए आवश्यक 50 हज़ार रुपये के दो जमानती और 45 हज़ार रुपये की धनराशि की व्यवस्था नहीं कर पा रहा था.