यूपी: शामली में ‘लव जिहाद’ के आरोप में महिला की गिरफ़्तारी के बाद मुस्लिम समुदाय में बढ़ी खामोशी

शामली में आयुष मलिक नाम के एक व्यक्ति द्वारा इस्लाम धर्म कबूलने को लेकर विवाद पसरा है. मलिक ने सार्वजनिक रूप से कहा कि उन्होंने अपनी इच्छा से इस्लाम धर्म अपनाया है. इसके बावजूद मुस्लिम समुदाय से आने वाली उनकी पत्नी और ससुर की गिरफ़्तारी ने भारत में धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार को लेकर मौजूद गहरे अंतर्विरोधों और दोहरे मानकों की बहस को फिर से सामने ला दिया है.

उत्तर प्रदेश का धर्मांतरण-विरोधी कानून कई अन्य राज्यों को भी अपने मौजूदा कानूनों को सख्त करने या धर्म परिवर्तन को नियंत्रित करने के लिए नए कानून बनाने की दिशा में प्रेरित कर चुका है. (फोटो: विपुल कुमार)

शामली: उत्तर प्रदेश के शामली जिले के भारत मेडिकल स्टोर के बाहर हमेशा की तरह भीड़ और हलचल है. कोई अपनी बारी का इंतजार कर रहा है तो कोई पर्ची दिखाकर लाइन तोड़ने की कोशिश कर रहा है. लेकिन इन दिनों यहां आने वाले लगभग हर व्यक्ति की बातचीत जून की शुरुआत में टीवी चैनलों पर छाई रही एक खबर के इर्द-गिर्द ही घूमती है.

यह मेडिकल स्टोर मलिक परिवार चलाता है, जिनकी इसी सड़क पर दो और दवा की दुकानें हैं. हालांकि, जहां यह परिवार रहता है, उस घर के नीचे वाली दुकान पिछले एक सप्ताह से बंद है, और सड़क के दूसरे छोर पर स्थित दुकान अब भी खुली है. इलाके के लोग मलिक परिवार के घर की ओर इशारा करते हुए आयुष मलिक के बारे में धीमी आवाज में चर्चा करते दिखाई देते हैं.

आरोप और गिरफ्तारियां

जून की शुरुआत में शामली के रहने वाले 27 वर्षीय आयुष मलिक अचानक कैमरों, आरोपों और विवादों के केंद्र में आ गए. बघरा स्थित साधना आश्रम के प्रमुख स्वामी यशवीर महाराज ने दावा किया कि प्रशासन की मौजूदगी में आयुष को जबरन इस्लाम कबूल करने के लिए मजबूर किया गया.

महाराज ने आरोप लगाया कि आयुष की पत्नी चांदनी कुरैशी और उसके पिता इस्लाम कुरैशी ने उनका ‘ब्रेनवॉश’ किया. उन्होंने चेतावनी दी कि यदि कार्रवाई नहीं की गई तो 12 जून को कुरैशी समुदाय के इलाके में एक हिंदू महापंचायत बुलाई जाएगी.

इसके बाद 6 जून को आयुष के पिता देवराज मलिक ने शामली कोतवाली में उत्तर प्रदेश गैरकानूनी धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम, 2021 और भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज कराई. उन्होंने आरोप लगाया कि उनके बेटे को एक मुस्लिम महिला ने प्रेम संबंध में फंसाया और बाद में उस पर इस्लाम स्वीकार करने का दबाव बनाया गया.

आयुष मलिक धर्मांतरण मामले में शामली पुलिस ने नौ लोगों को गिरफ्तार किया है. (फोटो: तारुषि असवानी)

द वायर द्वारा देखी गई एफआईआर में महिला के परिवार के नौ सदस्यों को नामजद किया गया है. उन पर धर्म परिवर्तन की साजिश रचने, कथित तौर पर फर्जी निकाहनामा तैयार करने, मानसिक दबाव बनाने, धमकियां देने और परिवार की संपत्ति पर नियंत्रण हासिल करने की कोशिश करने के आरोप लगाए गए हैं.

एफआईआर में यह भी कहा गया है कि आरोपियों ने आयुष के परिवार के अन्य सदस्यों पर भी इस्लाम अपनाने का दबाव बनाया. मामला दर्ज होने के बाद पुलिस ने कथित धर्मांतरण के मामले में नौ लोगों के खिलाफ कार्रवाई की.

इस्लाम और पहचान

पत्नी और ससुर की गिरफ्तारी के बाद आयुष ने चुप रहने या कहीं चले जाने के बजाय खुलकर अपनी बात रखने का फैसला किया. मीडिया के कैमरों के बीच आयुष ने कई टीवी चैनलों को इंटरव्यू दिए. कई एंकरों ने उनके इस्लाम अपनाने का मजाक उड़ाया, लेकिन वह शांत और आत्मविश्वास से भरे नजर आए.

आयुष ने कहा, ‘मैंने इस्लाम का अध्ययन किया है. कई वर्षों से अपनी इच्छा से इस धर्म का पालन और अभ्यास कर रहा हूं.’

द वायर ने शामली में आयुष के पिता देवराज मलिक से मुलाकात की. धीमी आवाज में उन्होंने कहा कि उनके बेटे को चांदनी कुरैशी से शादी कराने के उद्देश्य से धर्म परिवर्तन के लिए प्रेरित किया गया.

आंखों में आंसू भरे उन्होंने कहा, ‘उसकी लड़की से 2019 या 2020 से बातचीत थी. लेकिन हमें उनकी शादी के बारे में इसी साल फरवरी में पता चला.’ उन्होंने कहा, ‘मुझे बस अपना बेटा वापस चाहिए. हम संपत्ति के लिए नहीं लड़ रहे, सिर्फ अपने बेटे के लिए लड़ रहे हैं.’

66 वर्षीय देवराज का कहना है कि मीडिया के लगातार घर पहुंचने और सवाल पूछने से उनकी तबीयत खराब हो गई है. उन्हें अपने बेटे के भविष्य की चिंता है.

उन्होंने कहा, ‘वह सर्वगुण संपन्न था. पता नहीं उसके दिमाग में क्या बात आ गई. जब मैंने उसे वीडियो में बोलते देखा तो लगा जैसे किसी ने उसे ये बातें सिखाई हों. बहुत से मुस्लिम लोग उसके इंटरव्यू की क्लिप अपने वॉट्सऐप स्टेटस पर लगा रहे थे.’

भारत में धर्म परिवर्तन को लेकर विवाद कोई नई बात नहीं है, लेकिन आयुष के मामले पर सामने आई प्रतिक्रियाएं इस सवाल को फिर सामने लाती हैं कि धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार किसे और किन परिस्थितियों में स्वीकार किया जाता है.

साल 2021 में उत्तर प्रदेश शिया केंद्रीय वक्फ बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष वसीम रिजवी ने इस्लाम छोड़कर हिंदू धर्म अपनाया था और अपना नाम जितेंद्र नारायण सिंह त्यागी रख लिया था. उनके धर्म परिवर्तन का स्वागत मालाओं, समारोहों और व्यापक मीडिया कवरेज के साथ किया गया था. इसे व्यक्तिगत पसंद और आध्यात्मिक जागृति के रूप में प्रस्तुत किया गया.

इसके विपरीत, उसी राज्य में लोगों को आयुष पर धर्म परिवर्तन का दबाव बनाने के आरोप में गिरफ्तार किया गया, जबकि आयुष स्वयं कह रहे हैं कि उन्होंने अपनी इच्छा से इस्लाम अपनाया है. फिर भी उनके फैसले को आपराधिक जांच का विषय बनाया गया है.

यह मामला केरल की अखिला अशोकन, जिन्हें बाद में हादिया के नाम से जाना गया, की याद भी दिलाता है. उन्होंने इस्लाम स्वीकार किया और एक मुस्लिम युवक से विवाह किया था. कई बार यह कहने के बावजूद कि उनका धर्म परिवर्तन स्वेच्छा से हुआ है, मामले में पुलिस जांच, अदालती सुनवाई और राष्ट्रीय स्तर पर तथाकथित ‘लव जिहाद’ की बहस चली थी. अंततः सुप्रीम कोर्ट ने उनकी अपने जीवन और फैसलों पर स्वायत्तता को मान्यता देते हुए उनकी शादी बहाल की थी.

इस्लाम अपनाने वालों पर बढ़ती निगरानी ऐसे समय में सामने आ रही है जब देश में धर्मांतरण विरोधी कानूनों का दायरा तेजी से बढ़ा है. पिछले एक दशक में उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड, हरियाणा, गुजरात, छत्तीसगढ़ और असम समेत कई भाजपा शासित राज्यों ने या तो नए धर्मांतरण विरोधी कानून बनाए हैं या मौजूदा कानूनों को और सख्त किया है.

आस्था, डर और भविष्य

आयुष की पत्नी और ससुर की गिरफ्तारी के कुछ दिनों बाद स्वामी यशवीर महाराज ने इस मामले पर एक और बयान दिया. उन्होंने दावा किया कि आयुष जल्द ही ‘सनातन धर्म में वापस लौटेंगे’ और उनके साथ शामली तथा कैराना के 100 अन्य मुस्लिम भी ऐसा करेंगे.

मुजफ्फरनगर के रहने वाले यशवीर महाराज पहले भी अपने बयानों के कारण चर्चा में रहे हैं. वर्ष 2025 में छत्रपति शिवाजी सेना के नेता के रूप में उन्होंने कथित तौर पर कांवड़ यात्रा मार्ग पर दुकानों और ढाबों की ‘पहचान अभियान’ चलाया था, ताकि मालिकों की धार्मिक पहचान पता की जा सके और यह सुनिश्चित किया जा सके कि श्रद्धालु केवल हिंदुओं द्वारा संचालित दुकानों से ही सेवाएं लें.

2014 में उन्होंने मुस्लिम समुदाय को 2013 के मुजफ्फरनगर दंगों की याद दिलाते हुए सार्वजनिक चेतावनी भी दी थी.

द वायर से बातचीत में शामली के कुछ हिंदू निवासियों ने भी ‘घर वापसी’ की बात दोहराई. उनका कहना था कि जिले में तनावपूर्ण माहौल को खत्म करने के लिए आयुष को फिर से हिंदू धर्म अपनाना चाहिए.

विवाद बढ़ने के बाद से शामली में चांदनी कुरैशी के घर की गली में सन्नाटा पसरा हुआ है. (फोटो: तारुषि असवानी)

हालांकि, शामली के मुस्लिम समुदाय के लिए स्थिति पहले से ही असहज है. कई लोगों ने नाम गुप्त रखने की शर्त पर भी अपनी राय साझा करने से इनकार कर दिया.

एक स्थानीय मुस्लिम दुकानदार ने कहा, ‘हमारे कई हिंदू ग्राहक चुपचाप आना बंद कर चुके हैं. किसी ने बहिष्कार का आह्वान नहीं किया, लेकिन यह शामली है. यहां पुराने घाव भी हैं. बर्ताव में बदलाव हम समझ जाते हैं. हम चुप हैं क्योंकि दोबारा दंगे या हिंसा नहीं चाहते.’

शामली पुलिस का मानना है कि इस पूरे विवाद ने जिले की सामाजिक शांति को प्रभावित किया है.

द वायर से बातचीत में पुलिस अधीक्षक एनपी सिंह ने कहा कि पुलिस केवल एक चिंतित पिता की शिकायत पर कार्रवाई कर रही है. उन्होंने कहा कि प्रशासन को इससे कोई मतलब नहीं कि कौन किस धर्म का पालन करता है और इस मामले को सनसनीखेज बनाने के बजाय एक पारिवारिक विवाद के रूप में देखा जाना चाहिए.

फिलहाल स्थानीय लोग इस मामले पर नजर बनाए हुए हैं. कुछ लोग आयुष के हिंदू धर्म में वापस लौटने की उम्मीद कर रहे हैं, जबकि कुछ केवल सामान्य स्थिति बहाल होने की कामना कर रहे हैं.

हालांकि, इलाके में धीमी आवाज में हो रही चर्चाओं का केंद्र अब सिर्फ आयुष नहीं, बल्कि उनकी पत्नी चांदनी हैं. क्योंकि चांदनी शायद उन चंद महिलाओं में से एक हैं जिन पर ‘लव जिहाद’ का आरोप लगाया गया है, जबकि यह आरोप आमतौर पर मुस्लिम पुरुषों पर लगाया जाता रहा है.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें.)